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मंगल पांडे: एक ऐसा फौजी जिसे गिरफ्तार करने को तैयार नहीं था कोई जवान

एक ऐसा फौजी जिसे गिरफ्तार करने को तैयार नहीं था कोई जवान

Jul 19, 2018, 11:53 AM IST

मंगल पांडे: एक ऐसा फौजी जिसे गिरफ्तार करने को तैयार नहीं था कोई जवान

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Mangal Pandey, the freedom fighter, who had flown against the British

Mangal Pandey, the freedom fighter, who had flown against the British

भारत की आजादी की बात हो तो उमर जवान मंगल पांडे का जिक्र होना स्वाभिव है. भारत को गुलामी की जंजीरो को तोड़ने के लिए असल मायने में अंग्रेजों की रूह को कंपाने वाले मंगल पांडे ही थे. मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी 1831 को संयुक्त प्रांत के बलिया जिले में हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि ब्राह्मण कुल से जन्मे मंगल पांडे को जीविका कमाने के लिए अंग्रेजों की फौज में भर्ती होना पड़ा था. 

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Mangal Pandey, the freedom fighter, who had flown against the British

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1850 में भार में एक नई राइफल का निर्माण किया गया था, ऐसा कहा जाता है कि उस वक्त अफवाह फैली थी कि हथियारों को चिकना बनाने के लिए गाय और सूअर के मीट का प्रयोग किया जाता था. इस अफवाह के फैलने के बाद हिंदुओं और मुस्लिमों में फूट पड़ने लगी और विद्रोह की शुरुआत हुई. कहा जाता है कि मंगल पांडे ने इन राइफल का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था. हालांकि अंग्रेजी हुकूमत की सरकार ने इसे मात्र एक अफवाह बताया. 

 

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Mangal Pandey, the freedom fighter, who had flown against the British

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29 मार्च सन् 1857 को एक बार फिर से अंग्रेजी सरकार ने अपने जवानों को नई कारतूस दी और कहा कि यह किसी भी जानवर की चर्बी से नहीं बनी हैं. तब मंगल पांडे से ये मानने से इनकार दिया साथ ही अधिकारियों को भला-बुरा कहा. (फोटो साभार : ट्विटर/@amit_oldmonk)

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Mangal Pandey, the freedom fighter, who had flown against the British

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इसके बाद अंग्रेजी अफसर ने मंगल पांडे को गिरफ्तार करने का हुकूम जारी किया, लेकिन एक भी सैन्यकर्मी ने ऐसा नहीं किया. इसके बाद खुद पलटन के सार्जेंट हडसन मंगल पांडे को पकड़ने आगे बढ़ा तो, पांडे ने उसे गोली मार दी, इसके बाद जब लेफ्टीनेंट बल आगे बढ़ा तो उसे भी पांडे ने गोली मार दी. मौजूद अन्य अंग्रेज सिपाहियों नें मंगल पांडे को घायल कर पकड़ लिया. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 29 मार्च को पहली बार चिंगारी फूंकी थी. वह गुलाम भारत के पहले शख्स थे, जिन्होंने ब्रिटिश कानून का विरोध किया था. (फोटो साभार : Linkdin)

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Mangal Pandey, the freedom fighter, who had flown against the British

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अंग्रेजी अफसर पर बंदूक तानने के आरोप में मंगल पांडे 6 अप्रैल 1857 को मौत की सजा सुना दी गई. इसके लिए 18 अप्रैल 1857 की तारीख को तय किया गया था. शायद कम लोगों को ही पता है कि 19 जुलाई 1827 को जन्मे मंगल पांडेय ने फांसी से कई दिन पहले खुद की जान लेने की कोशिश की थी. और, इस कोशिश में वह गंभीर रूप से जख्मी भी हुए थे. मंगलपांडे को बेशक से फांसी की सजा सुना दी गई हो, लेकिन उनकी लगाई हुई चिंगारी बुझी नहीं और अंत में भारतीयों से हारकर अंग्रेजो को भारत छोड़ना ही पड़ा.