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मॉनसून की पहली बारिश बनी फुटपाथ पर रहने वालों के लिए परेशानी, सोने के लिए नहीं मिल रही जगह

तकरीबन 20 साल पहले आई फिल्म सड़क का गाना आज भी उन लोगों पर पूरी तरह से लागू होता है कि जिनके पास इन सपनों के शहर में अपने आशियाने नहीं और वो दिनभर मेहनत-मजदूरी करने के बाद सड़क के फुटपाथों पर अपनी राते गुजारते हैं.

विनय तिवारी | Jun 12, 2019, 13:03 PM IST

इस शहर का ये वो हिस्सा है जो दिहाड़ी मजदूरी करता है, और रात को बादलों से छांव में गुजार देता है लेकिन जब यही बादल पानी देने लगते है कि तो सबसे ज्यादा परेशानी फुटपाथ पर रहने वाले लोगों को ही हो जाती है. मुंबई में पिछले दो दिनों से लगातार ठंडर शावर से हो रही बारिश ने जहां मुंबईकरो को गर्मी से राहत दी है तो वही फुटपाथ पर सोने वालों के लिए मूसीबत बनकर आई है.

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जी न्यूज के कैमरे में कैद हुई तस्वीरें

Photos captured in the camera of live news

फुटपाथ पर रहने वाले ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों से आए मजदूर होते है जिनका इस शहर मे कोई नही हैं. जहां वो जाकर अपना सर छुपा सके. इन लोगों के लिए फुटपाथ ही सबकुछ होता हैं. ज़ी न्यूज़ के कैमरे से ली गई इन तस्वीरों को देखिए तस्वीरें ही सब कुछ बयां कर रही है. की इन बेघरों का बरसात में क्या हाल होता है और अपनी रात कैसे गुजारते हैं. 

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देश में 2 लाख लोगों के पास नहीं है घर

2 lakh people do not have a house in the country

दरअसल सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में लगभग दो लाख ऐसे लोग है जिनके सर पर छत नहीं है और वे लोग दिन भर मेहनत मजदूरी करके अपनी रात फुटपाथ पर गुजरते हैं, लेकिन बरसात में इन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है तो पिछले कई सालों से मुंबई के दादर इलाके में फुटपाथ पर सोने वाले विपिन का कहना है कि गरीबों के लिए बरसात हमेशा एक मुसीबत बन कर खड़ी रही है. जिसके चलते कभी कभी इन्हे भूखे पेट सोना पड़ता है.

 

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पूरा परिवार का जीवन ही फुटपाथ पर

The whole family's life on the sidewalk

इसी इलाके में कुछ बेघर ऐसे भी है जो अपने पूरे परिवार के साथ इसी फूटपाथ पर जीवन बसर कर रहे है. हर तरह की मुसीबतों से लड़ रहे है, लेकिन इनके मन में भी सिर्फ एक ही सवाल गूंजता है की जब बरसात आएगी उस वक़्त क्या करेंगे? क्योंकि अकेला इंसान कही भी रह लेगा लेकिन बात परिवार पर आएगी ऐसे में क्या करेंगे? बता दें कि कुछ वक्त पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इन बेघरों के रेन बसेरा बनाने का आर्डर जरूर दिया है.

 

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स्टेशन पर सोने से भागाती है पुलिस

Police flee from sleep at station

वहीं, राकेश जो पिछले पांच सालों से मुंबई के फुटपाथ पर रह रहे है इनका कहना है हमारे पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है गरीबी के कारण खाने की समस्या होती है और बरसात में भीगने के कारन बीमार पड़ जाते है स्टेशनों पर जाते है तो पुलिस भगा देती है आखिर हम जाए तो जाए कहा. 

 

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कहां है रैन बसेरे?

Where is Rains Basare?

वहीं, अगर आंकड़ों की माने तो मुंबई की सड़कों पर लाखों की संख्या में लोग रहते है. ऐसे लोगों के लिए सरकार और बीएमसी की तरफ रैन बसेरे बनाए जाने की बात कही जाती है लेकिन सारे सैकड़ों की संख्या में रैन बसेरों की मांग है कि बनते है 2-4  की संख्या में. सरकारी मिशनरी कभी बजट, तो तभी जगह ना मिलने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती लेकिन बारिश में भींग रहे लोग क्या करे इसका किसी के पास कोई जवाब नही हैं. शिवसेना का कहना है की मॉनसून पैटर्न में बदलाव आये है इस बार हम स्टाम वाटर बढ़ा रहे है साथ ही पम्पिंग स्टेशन बढ़ा रहे है जहा क्रॉनिंग फलोडिंग स्पॉट है वहा पंप लगा रहे है साथ ही सारे प्रिकॉशन भी ले रहे है मतलब साफ़ है की शिवसेना मान रही है की बरसात के लिए बीएमसी पूरी तरह तैयार है.