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घुटनों के दर्द से हैं परेशान, कराना चाह रहे हैं नी रिप्लेसमेंट तो ये मिथक तोड़ने की है जरूरत

भारत में वर्तमान में हर साल 1,20,000 नी रिप्लेसमेंट किए जाते हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 11, 2019, 10:24 AM IST

नई दिल्ली: नी आर्थराइटिस कोई बीमारी नहीं है, बल्कि जोड़ों में सूजन, उनके घिसने की समस्या है. कई सारे आर्थराइटिस मरीज मनोवैज्ञानिक ब्लॉक की वजह से पीड़ादायक और सीमित जिंदगी जीते हैं, जिसकी वजह से वह सर्जरी के विकल्प को अपनाने से बचते रहते हैं. इसलिए, घुटनों की सर्जरी से जुड़े मिथकों को तोड़ने की जरूरत है.

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आर्थराइटिस से परेशान हैं करोड़ों लोग

Crores of people are troubled by arthritis

ऐसा अनुमान है कि लगभग 4.5 से 5 करोड़ लोग आर्थराइटिस की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उनमें से लगभग 5 लाख लोगों को जीवन में कभी न कभी घुटनों की सर्जरी या फिर टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) की जरूरत होती है. 

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भारत में हर साल होते हैं 1,20,000 रिप्लेसमेंट

1,20,000 replacements every year in India

नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल के सीनियर आथोर्पेडिक सर्जन तथा आर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन, डॉ. सुशील शर्मा के अनुसार, भारत में वर्तमान में हर साल 1,20,000 नी रिप्लेसमेंट किए जाते हैं. 

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सर्जरी के लिए उम्र कोई बाध्यता नहीं

Age is no obligation for surgery

सर्जरी के लिए उम्र कोई बाध्यता है इस पर उन्होंने कहा कि इसमें उम्र नहीं बल्कि चलना-फिरना मायने रखता है. रूमेटॉयड आर्थराइटिस के मरीज को बहुत ही कम उम्र में टीकेआर करवाने की जरूरत पड़ सकती है, जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को इसे अधिक उम्र में लगभग 15 साल बाद करवाने की जरूरत पड़ती है.

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Mobility Knees of trouble

इस वजह से होती है ये समस्या

यदि मरीज के घुटनों की मोबिलिटी की वजह से चलना फिरना सीमित हो गया है और वह अपने दैनिक गतिविधियों को अच्छी तरह से नहीं कर पा रहे हैं, जैसे कि सीढियां चढ़ना, सैर पर जाना, तो उन्हें टीकेआर करा लेना चाहिए. यदि कोई मरीज एक किलोमीटर या 2 किलोमीटर भी नहीं चल सकता तो उसके एक्सरे में गंभीर क्षति/बदलाव नजर आता है, तो बेहतर है कि सर्जरी करा ली जाए. 

 

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विज्ञान से काफी हुआ बदलाव

Significant change from science

वैज्ञानिक उन्नति होने से जॉइंट इम्प्लांट्स में काफी बदलाव आ गये हैं और ये 20 से 25 सालों तक चलते हैं. 55 साल से अधिक उम्र के लोग जो टीकेआर करवाते हैं उन्हें अपने जीवनकाल में शायद ही दूसरी सर्जरी करवाने की नौबत आती है. नी सर्जरी के बाद लोग एक्सराइज कर सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं और लंबी दूरी की वॉक कर सकते हैं.