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अपनी ही जमीन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे बाप बेटे, कहा- इंसाफ दो या पाकिस्तान भेज दो

भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय कितने ही ऐसे लोग थे जिन्होंने अपने घर-बाए खोए, अपने परिवार से जुदा हो गए. लेकिन एक बदनसीब परिवार ऐसा भी है जो विभाजन के बाद अपने परिवार के साथ भारत आ गया लेकिन सरकार द्वारा दी गई जमीन पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है. अफसरों की फटकार सुनकर रजिंदरपाल सिंह इतना हतास हो चुका है कि वह गोली खाने और पाकिस्तान जाने तक को तैयार है. मोहाली के रजिंदरपाल सिंह की पूरी कहानी यहां पढ़ें.

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जदों वी मैं अपनी जमीन लई डीआरओ ऑफिस जांदा हां, तां ओथे दे अफसर कैहंदे ने, मुंह चक्क के किथ्थे आ गया, कोई जमीन-वमीन नहीं हैगी तेरी, भज्ज जा ऐथों. यह कहना है इंसाफ के लिए पिछले लंबे समय से अफसरों के दफ्तरों के चक्कर लगाने वाले रजिंदरपाल सिंह का. वे हारकर मंगलवार को मोहाली डीसी कार्यालय के बाहर एक बैनर लगाकर अपने बेटे के साथ बैठ गए, जिस पर लिखा है, इंसाफ दो, पाकिस्तान भेजो या फिर गोली मार दो. दविंदरपाल सिंह पुराने कागजात दिखाते हुए बताते हैं कि भारत-पाक विभाजन के बाद उनके घरवाले 1952 को भारत आ गए थे तो उन्हें डेराबस्सी के सैदपुर इलाके में 12 एकड़ जमीन सरकार की ओर से दी गई थी. उनका परिवार उस जमीन पर 3 सालों से अधिक समय तक वहीं पर रहा और उसके बाद उनका परिवार रोपड़ के फूलचक्कर मोहल्ले में रहने लगा. वे बताते हैं कि पुराने जमाने में उनके घरवालों की ओर से जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवाई गई थी और कच्चे कागजों पर ही जमीन चली आ रही थी. वर्ष 2006 में जब उनके पिता दीदार सिंह की मृत्यु हुई तो उनके बक्से से कुछ कागजात निकले, जो उर्दू में लिखे हुए थे. जब इन कागजातों को कुछ लोगों को दिखाया गया तो पता चला कि यह कागजात जमीन से संबंधत हैं. उसके बाद से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई भी सहायता नहीं कर रहा है.

 

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संविधान भले ही देश के नागरिकों में कोई भेदभाव नहीं करता हो, लेकिन बीएमसी अस्पतालों में अब इलाज की अलग दरें देनी होंगी. बीएमसी अस्पतालों में इलाज कराने पर सभी पर अतिरिक्त बोझ भी आएगा. नवभारत टाइम्स के मुताबिक बीएमसी के अस्पतालों में मुंबईकरों के लिए 20-25 प्रतिशत महंगा इलाज हो जाएगा. जबकि मुंबई के बाहर से आने वाले मरीजों को 30-35 प्रतिशत ज्यादा फीस देनी होगी. बीएमसी के अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने की कागजी प्रक्रिया वैसे ही जटिल है. अब इसमें यह दस्तावेज भी जमा करवाना पड़ेगा कि मरीज मुंबई का है, या बाहर का. मुंबई के बाहर से आनेवाले मरीजों से ज्यादा रकम वसूलने के फैसला अमानवीय तो है ही, तर्क की कसौटी पर भी खरा नहीं उतरता. हालांकि शिवसेना का कहना है कि इसे पूरी तरह से पारित नहीं किया गया है. अब इसकी मंजूरी की औपचारिकता ही शेष है. अनुमान के अनुसार 1 अप्रैल से इलाज के लिए नई दरें लागू कर दी जाएंगी. 

 

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स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछले साल के चार नंबर से इस बार एक नंबर पर आने की कोशिश कर रहा सूरत वर्तमान में 9 नंबर पर चल रहा है. स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के सूरत आने में अभी समय है, उसके पहले यह स्थिति है. मार्च तक टीम सूरत आ सकती है. उससे पहले सूरत को अपनी डायनैमिक रैंकिंग सुधारनी पड़ेगी. इसके लिए कचरा व्यवस्थापन, सिटीजन फीडबैक जैसे मुद्दों पर ज्यादा काम करना पड़ेगा. भारत सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ताजा सूची में स्वच्छता सर्वेक्षण द्वारा तय की गई डायनैमिक रैंकिंग में सूरत गुजरात के ही दो शहरों अहमदाबाद और राजकोट से पीछे हैं. इस सूची में पहले नंबर पर ग्वालियर, दूसरे पर ग्रेटर मुंबई, तीसरे पर अहमदाबाद, चौथे पर विजयवाड़ा, पांचवे पर धनबाद, छठे पर साउथ दिल्ली, सातवें पर हैदराबाद और आठवें स्थान पर राजकोट है. वर्ष 2014 के स्वच्छता सर्वे में सूरत पहले स्थान पर था, जबकि 2016 में छठे नंबर पर. वहीं 2017 में सूरत को चौथा स्थान प्राप्त हुआ था.

 

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देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालु पूरे जोश के साथ मां वैष्णो देवी की प्राचीन गुफा से मां के दर्शन का आनंद उठा रहे हैं. वहीं, श्रद्धालु आद्कुंवारी में गर्भ जून की गुफा के भी दर्शन कर रहे हैं. सोमवार रात 12 बजे से मंगलवार तड़के चार बजे तक प्राचीन गुफा भक्तों के लिए खुली रही. इसके बाद दिव्य आरती के चलते गुफा को बंद कर दिया गया. आरती संपन्न होने के बाद मंगलवार सुबह नौ बजे प्राचीन गुफा को फिर से खोल दिया गया और इसके बाद दोपहर बाद तीन बजे तक यह दर्शनों के लिए खुली रही. एसडीएम भवन जगदीश सिंह ने कहा कि बोर्ड प्रशासन का यह प्रयास रहेगा कि फरवरी के अंत तक उक्त निर्धारित समय में रोज प्राचीन गुफा भक्तों के लिए खोली जा सके. इससे भक्तों को 24 घंटे में करीब 10 घंटे दर्शन का लाभ मिल सकेगा. वहीं, आद्कुंवारी में गर्भजून के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं. मां वैष्णो के दर्शनों की तरह गर्भ जून भी भक्तों के दर्शन के लिए दिन-रात खुला रहता है. सुबह और शाम को आरती के समय गर्भ जून गुफा को दो-दो घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद किया जाता है.

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जम्मू में मरीजों की जिंदगी की किसी को परवाह नहीं है. न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन कोई सुध ले रहा है. एक साल से जम्मू संभाग में हीमोफीलिया के मरीजों की जिंदगी पूरी तरह दान पर मिलने वाली दवाई पर निर्भर है. वहीं, वान विल्लीब्रांड की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए आज तक दवाई नहीं खरीदी गई है. स्वास्थ्य विभाग ने सदन में दावा किया है कि फैक्टर आठ को छोड़ कर राज्य में हीमोफीलिया के मरीजों के लिए हर प्रकार की दवाई उपलब्ध है. इनमें फैक्टर सात और नौ भी शामिल हैं. जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने जुलाई 2016 के बाद फैक्टर आठ नहीं खरीदा. फैक्टर सात और नौ की जरूर खरीदा है, लेकिन सात की भी कमी बनी हुई है. वहीं, वान विल्लीब्रांड की कमी वाले मरीजों के लिए आज तक दवाई नहीं खरीदी गई है.

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एक बार फिर खबर भ्रष्टाचार से जुड़ी है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार भ्रष्ट अधिकारी को और ज्यादा प्रभावशाली बना दिया गया है. पत्रिका की खबर के मुताबिक सरकार की कृपा ऐसे अफसर पर बरसी है जो करीब 71 करोड़ की परियोजना में हुए घोटाले के आरोप में निलंबित किया गया था. अब इस हितबल्लभ नाम के अधिकारी को सचिवालय के ग्रामीण विकास मुख्यालय में प्रभावशाली पद पर बिठा दिया गया है. 

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