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कोटा: एक गांव ऐसा जहां नहीं होता विजयदशमी पर दहन, बनाते हैं मिट्टी का रावण

वैसे कोटा का रावण दहन भी बेहद खास है. पूरे देश में से कोटा में दशहरे का अलग ही नजारा होता है. 

हिमांशु मित्तल | Oct 07, 2019, 13:35 PM IST

दशहरे के दिन देशभर में रावण का दहन किया जाता है लेकिन राजस्थान के कोटा में एक ऐसा गांव है जहां रावण का दहन नहीं किया जाता. यहां पर मिट्टी का रावण बनाया जाता है और फिर उसको पैरों से कुचला जाता है. 

 

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यहां बनाया जाता है मिट्टी का रावण

Rajasthan News, Kota, Vijaydashmi 2019

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है दशहरा. देशभर में शुक्रवार को अलग अलग जगह रावण के पुतलों का दहन होगा. वहीं कोटा के नान्ता में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. यहां रावण को जलाया नहीं कुचला जाता है. 

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जलाया नहीं पैरों से रौंदा जाता है रावण

Rajasthan News, Kota, Vijaydashmi 2019

एक ओर जहां देशभर में रावण का दहन होगा. वहीं ये तस्वीरें ऐसी हैं जो बेहद अनोखी हैं. यहां रावण मिट्टी का होता है और उस रावण को जलाया नहीं बल्कि पैरों से कुचला जाता है. कोटा के नान्ता इलाके में जमीन पर मिट्टी का रावण बनाया जाता है और फिर सभी लोग उस मिट्टी के रावण पर कूदते हैं और उसे ध्वस्त किया जाता है. 

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कई सालों से चली आ रही है परंपरा

Rajasthan News, Kota, Vijaydashmi 2019

ये परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है और इस परंपरा की एक अनोखी झलख यहां देखने को मिलती है. लिम्ब्जा माता के द्वार से इस उत्सव की शुरुआत होती है. नवरात्र के पहले दिन इस रावण को ये रूप दे दिया जाता है और फिर विजयादशमी पर इस रावण के मिट्टी के रूप को पैरो से रोंद दिया जाता है. इसके बाद इस मिट्टी के ऊपर अखाड़ा लगाया जाता है क्योंकि ये लोग मल्ल योद्धा होते हैं इसलिए समाज के सभी पहलवान एक एक कर इसी मिट्टी पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं. 

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कोटा का रावण दहन भी है मशहूर

Rajasthan News, Kota, Vijaydashmi 2019

वैसे कोटा का रावण दहन भी बेहद खास है. पूरे देश में से कोटा में दशहरे का अलग ही नजारा होता है. कोटा के राष्ट्रीय दशहरे में जब बुराई रूपी रावण का अंत होता हे तो हजारों की तादाद में लोग दशहरे मैदान में पहुंचते हैं ओर बुराई रूपी अहंकारी रावण के अंत का गवाह बनते हैं.