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मुंबई में 12 लाख में बनकर तैयार हुई 22.5 फुट ऊंची ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा, देखें PHOTOS

ये जानते हुए भी ये मूर्ति पर्यावरण के लिए अच्छी नहीं होतीं फिर भी पंडालो में यही मूर्तियां स्थापित की जाती हैं. क्योंकि आयोजकों का कहना है कि इकोफ्रेंडली मूर्तियां इतनी ऊंची नही बनाई जा सकती हैं.

अमित त्रिपाठी | Aug 23, 2019, 12:35 PM IST

मुंबईः 2 सितंबर से गणेशोत्सव शुरू होने वाला है. ऐसे में मुंबई में इसकी तैयारियां जोरों पर है. कुछ ही दिनों में सारे पंडालो में गणपति बप्पा की बड़ी-बड़ी मुर्तियां लोगों के दर्शन के लिए रखी जाएंगी. बप्पा की ये ज्यादातर मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनाई जाती हैं, जो कि पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक हैं. ये जानते हुए भी ये मूर्ति पर्यावरण के लिए अच्छी नहीं होतीं फिर भी पंडालो में यही मूर्तियां स्थापित की जाती हैं. क्योंकि आयोजकों का कहना है कि इको फ्रेंडली मूर्तियां इतनी ऊंची नही बनाई जा सकती हैं, लेकिन सभी पंडालो को रास्ता दिखाने का काम कर रही मुंबई लालबाग इलाके में तेजुक्या सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल. 

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मंडल की तरफ से इस बार 22.5 फुट की बप्पा की मुर्ति बनाई जा रही है

 This time a 22.5-foot Bappa idol is being made by Mandal.

इस मंडल की तरफ से इस बार 22.5 फुट की बप्पा की मुर्ति बनाई जा रही है, जो कि पूरी तरह से इको फ्रैडली है. बप्पा की इस मूर्ति को बनाने में पुराने अखबार की लुगदी का इस्तेमाल किया गया है. इस मूर्ति को बनाने में अखबार की लुगदी के साथ ही उसमें गोंद और सफेद रंग के पाउडर और अन्य पदार्थ का इस्तेमाल किया गया है.

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गणेशोत्सव के शुरू होने से पहले मूर्ति पूरी तरह तैयार हो जाएगी

The idol will be fully ready before the commencement of Ganesh utsav

तेजुक्या सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल अध्यक्ष सुशांत शिंदे ने बताया है की न्यूज़ पेपर से मूर्ति बनाने का विचार पिछले साल नवंबर में किया गया था और उनका मंडल भविष्य में भी ऐसी ही इको-फ्रेंडली मूर्तियां बना रखना चाहता है. मंडल ने न्यूज पेपर भी अपने मंडल के सदस्यों से ही जमा किए है. बप्पा की इस मूर्ति को इस साल मई में बनाना शूरु किया और गणेशोत्सव के शुरू होने से पहले मूर्ति पूरी तरह तैयार हो जाएगी.

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पर्यावरण के अनुकूल मूर्ति की लागत 12 लाख रुपये तक आई है

 The cost of the eco-friendly statue has come up to Rs 12 lakh

मंडल हर साल मूर्ति पर लगभग 4 लाख रुपये खर्च करता है, लेकिन इस साल पर्यावरण के अनुकूल मूर्ति की लागत 12 लाख रुपये तक आई है. मंडल के ट्रस्टी नामदेव हूले ने कहा की मूर्ति कितनी भी बड़ी हो, यह किसी कॉम्पीटीशन के लिए नहीं है.

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15 साल पहले भी उन्होंने इसी तरह की मूर्ति बनाई थी

They made a similar idol 15 years ago

मंडल का कहना है कि इतनी बड़ी मूर्ति बनाने के पीछे उनका यह कारण है की 15 साल पहले भी उन्होंने इसी तरह की मूर्ति बनाई थी पर वह प्लास्टर ऑफ पेरिस की थी जिसकी वजह से वह मूर्ति को विसर्जित नहीं कर पाए थे. 

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इस गणेश प्रतिमा का वजन पुरानी मूर्ति से कम होगा

The weight of this Ganesh idol will be less than the old idol

इसलिए उन्होंने 15 साल बाद वापस उसी तरह की मूर्ति न्यूज पेपर से बनाई है, जिसका वजन पुरानी मूर्ति से कम होगा और ईको फ्रेंडली मूर्ति होने के कारण वह इस बार धूम धाम से मूर्ति को विसर्जित करेंगे और अपना पुराना सपना पूरा करेंगे.

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सांगली और कोल्हापुर में बाढ़ से परेशान लोगों की मदद करेंगे

Will help people affected by floods in Sangli and Kolhapur

तेजुक्या सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल इस साल हर साल की तरह इ सबार प्रवेश द्वार नही बनाएंगे बल्कि उन पैसों से वह लोग सांगली और कोल्हापुर में बाढ़ से परेशान लोगों की मदद करेंगे.

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श्रद्धालुओं से की पेंसिल और बुक्स लाने की अपील

Appeal to devotees to bring pencils and books

इसके साथ ही मंडल लोगों से अपील कर रहा है कि जो भी लोग गणपति के दर्शन के लिए वहां प्रसाद और फूलों की मालाएं लाते हैं, उनसे विनती है कि मालाओं और प्रसाद की जगह एक पुस्तक और पेंसिल लाएं जिसे सांगली और कोल्हापुर के बच्चों तक पंहुचा सकें.