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Photos: मसूरी में चूना पत्थर के खंडहर और वीरान खदानों में शुरू होगा घोस्ट टूरिज्म

खदानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए बड़ी संख्या में मकान बनाए गये थे जो अब खंडहर हो चुके हैं. स्थानीय लोग अब इन्ही चुना पत्थर की खदानों और खंडहर भवनों में घोष्ट टूरिज्म शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jan 13, 2019, 16:02 PM IST

(संदीप गुसाईं)/देहरादूनः पहाडों की रानी मसूरी की हसीन वादियों की सैर तो आपने कई बार की होगी. बांज, बुरांस, देवदार, फर के घने जंगलों के बीच मसूरी की पहाड़ियों में घूमने के लिए देश-विदेश के सैलानी पहुचते हैं, लेकिन मसूरी की पहाडियों में इतिहास के कई पन्ने ऐसे हैं जो आपको हॉरर की दुनिया में ले जाएंगे. अगर आप डर से आगे जीना चाहते हैं और ऐसे वीरान जगहों की सैर करना चाहते है जहां भूतों की कहानियां छिपी हो तो मसूरी की पहाडियां आपका इंतजार कर रही है. चूना पत्थरों की खदानों से निकलने वाले धूल, गाडियों की गड़गड़ाहट और पेड़ों के अन्धाधुंध कटान से मसूरी खतरे में आ चुकी  थी. मसूरी की पहाडियों में स्थित हाथीपांव, झड़ीपानी और राजपुर क्षेत्र में कई चूनापत्थर के खदान स्थित हैं जो अब वीरान हो चुके हैं. इन खदानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए बड़ी संख्या में मकान बनाए गये थे जो अब खंडहर हो चुके हैं. स्थानीय लोग अब इन्ही चुना पत्थर की खदानों और खंडहर भवनों में घोस्ट टूरिज्म शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.

 

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हाथीपांव क्षेत्र में भी स्थानीय लोग अब घोष्ट टूरिज्म शुरू करने की योजना

Local people are now planning to launch Ghosh tourism

हाथीपांव और जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र में कई खदाने थीं. इन्हीं खदानों के पास अब ईको और घोष्ट टूरिज्म शुरू करने की योजना है. 1960 के दशक से मसूरी क्षेत्र में चूना पत्थर की खदानों में काम शुरू हुआ जो फिर 1990 में बंद हो गया. उस समय हाथीपांव, झड़ीपानी, राजपुर, लम्बीधार सहित कई इलाकों में चूना पत्थर निकाला जाता था. खनन के इस कारोबार के कारण मसूरी की पहाडियां बदरंग हो गईं और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसमें रोक लगा दी. खदान में लगे मजदूरों के लिए कई भवन बनाए गये थे जो अब खंडहर हो चुके हैं. हाथीपांव क्षेत्र में भी स्थानीय लोग अब घोष्ट टूरिज्म शुरू करने की योजना बना रहे हैं. 

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पैरानार्मल एक्टिविटी का अहसास कराने के लिए घोष्ट वॉक कराया जाएगा

A ghost walk will be made to realize paranormal activity

इस साहसिक और रोमांच से भरे सोच के बारे में अभय शर्मा बताते हैं कि उनके दादा ने 1965 में करीब 200 बीघा जमीन चूना पत्थर खनन के लिए ली थी, लेकिन बाद में इसमें प्रतिबंध लग गया और बाद में 200 बीघा जमीन में से 120 बीघा जमीन उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने ले ली जो अब उत्तराखंड पर्यटन के पास है. उन्होने कहा कि उनकी जमीन में पूराने भवनों के खंडहर हैं और आस पास चूने की खदान स्थित है. अभय ने कहा कि सैलानियों को पैरानार्मल एक्टिविटी का अहसास कराने के लिए घोष्ट वॉक कराया जाएगा. सैलानी अपना टैंट खुद लगाएंगे और पूरे क्षेत्र को प्लास्टिक फ्री किया जाएगा.

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नई मसूरी बनाने के लिए चिन्हित किया गया था हाथी पांव

Hathi Paon was marked to make new Mussoorie

दरअसल, हाथीपांव क्षेत्र को सालों पहले नई मसूरी बसाने के लिए चिन्हित किया गया था. इसके लिए बडी संख्या में जमीन का चिन्हीकरण भी कर लिया गया, लेकिन बाद में ये योजना परवान नही चढ सकी. इसी के पास लम्बीधार खदान मौजूद है, स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां भूतों का वास है.

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रात के समय आती हैं अजीब-अजीब सी आवाजें

weird and strange sounds at night

1980 के दशक में यहां बडी संख्या में मजदूर खदानों से चुना पत्थर निकालते थे जिनमें से कई मजदूरों की मौत हो गई. वर्ल्ड पैरानार्मल सोसाईटी ने भी इस इलाके को हॉन्टेड प्लेस की सूची में रखा हुआ है. स्थानीय लोग बताते हैं कि लम्बीधार खदान के आस पास अचानक अंधेरा छा जाता है और रात के समय अजीब-अजीब सी आवाजें आती है. कई बार तालियों के बजने की आवाज आती है.

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हाथीपांव, झडीपानी, लम्बीधार, राजपुर क्षेत्र में हुआ करती थी

Hathipoan, Jhadipani, Lambidhar, Used to be in Rajpur area

लेखक गोपाल भारद्वाज कहते हैं लम्बीधार खदान के बारे में कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं. कई लोग वहां भूत-प्रेत होने की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कभी नही दिखा. मसूरी के जाने माने इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी कहते है कि लम्बीधार खदान से एशिया का सबसे अच्छा मार्बल निकलता है. आजादी के बाद उत्तर प्रदेश ने यूपी खनिज निमग का गठन किया और मसूरी की पहाड़ियों में चूना पत्थर के पट्टे आबंटित कर दिया गए. सालों तक मसूरी की पहाडियों से चूना पत्थर निकाला जाता रहा. उस दौरान करीब 50 से ज्यादा खदानें हाथीपांव, झडीपानी, लम्बीधार, राजपुर क्षेत्र में हुआ करती थी जिनसे धुएं का गुबार निकलता रहता था.

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चूना पत्थर स्टील फैक्ट्री जबलपुर भेजे जाते थे

Limestone steel factory used to be sent to Jabalpur

इन खदानों को बंद करने के लिए पदश्री अवधेश कौशल और सेव मसूरी सोसाईटी ने काफी प्रयास किए. आखिरकार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ये बंद किए गये. लेखक गोपाल भारद्वाज कहते हैं यहां के चूना पत्थर स्टील फैक्ट्री जबलपुर भेजे जाते थे जिनसे मार्बल केमिकल आदि कई उत्पाद तैयार किए जाते थे.

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इलाके को एडाप्टेट हैरिटेज प्लेस के तौर पर विकसित करने की योजना

Plan to develope the area as Adopted Heritage Place

जॉर्ज एवरेस्ट हाऊस भी इसी इलाके में स्थित है. समुद्र तल से करीब 6 हजार फीट की ऊचाई पर स्थित ये भवन भी खंडहर हो चुका है. पर्यटन विभाग हर साल यहां 3 जुलाई को जॉर्ज एवरेस्ट का जन्मदिन मनाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन करता है. संयुक्त निदेशक पूनम चन्द्र ने बताया कि विभाग इस इलाके को एडाप्टेट हैरिटेज प्लेस के तौर पर विकसित करने की योजना बना रही है.

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हाथीपांव क्षेत्र बनेगा ईको टूरिज्म का हब

Hathipaon area will become the hub of eco-tourism

हाथीपांव क्षेत्र में कुछ सैलानी जार्ज एवरेस्ट और विशिंग वेल में सैलानी पहुचते है. हाथीपांव निवासी भगत सिंह कठैत कहते है इस क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाएं है. उन्होने कहा कि वे भी इस क्षेत्र में पर्यटको के लिए टैंट लगाने जा रहे है इसके साथ ही वे नूरजहां रोज की खेती करना चाहते है और इसके लिए करीब 2 लाख पौध भी मंगवा दी गई है. अभय शर्मा कहते हैं वर्तमान में उनके साथ 10 से 15 स्थानीय युवा जुडे हुए है. राज्य सरकार मदद करें तो वो घोष्ट टूरिज्म के साथ ही ईको टूरिज्म को बढावा देंगे इसके लिए एडवेंचर एकेडमी भी खोलने की तैयारी है.