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PHOTOS: ग्लोबल वार्मिंग के दौर में केदारनाथ में रिकॉर्ड बर्फबारी, वैज्ञानिक हैरान

डॉ डोभाल आगे कहते हैं कि " पूरी दुनिया भर में ग्लेशियर के पिघलने पर बहस हो रही है. हमें इस बार अच्छी बर्फ मिली है. अगर ऐसी बर्फ मिलती रही तो हमारे ग्लेशियर की हालत अच्छी हो जाएगी."  

मनमोहन भट्ट | Jul 21, 2019, 18:37 PM IST

2019 में जनवरी से लेकर अप्रैल तक के आंकड़ों को इकट्ठा कर वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है. 

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उत्तराखंड में अभी 968 ग्लेशियर हैं.

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देहरादून: एक तरफ दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग को लेकर बहस हो रही है तो दूसरी ओर केदारनाथ धाम में बर्फबारी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आम तौर पर केदारनाथ में साल भर में 20 फीट बर्फ गिरती है. लेकिन सर्दी में 50 फ़ीट से ज्यादा बर्फ गिरी. केदारनाथ धाम से थोड़ा ऊपर ये बर्फ 50 फ़ीट तक गिरी है. 2019 में जनवरी से लेकर अप्रैल तक के आंकड़ों को इकट्ठा कर वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे न सिर्फ ग्लेशियर की सेहत मजबूत हुई है. बल्कि हिमालय के ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार भी कम होगी. उत्तराखंड में अभी 968 ग्लेशियर हैं. इनमे गंगोत्री ग्लेशियर्स के पिघलकर पीछे हटने की रफ्तार १ २-१३ मीटर प्रति वर्ष है. जबकि चोरबाड़ी ग्लेशियर के पीछे हटने की रफ्तार ८-९ मीटर प्रति वर्ष है. 

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केदारनाथ मंदिर 3583 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है.

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केदारनाथ मंदिर 3583 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है. यहां सर्दियों के मौसम में हमेशा ही बर्फ पड़ती है. लेकिन इस साल यहाँ दोगुनी बर्फ गिरी है. केदारनाथ धाम के ऊपर 4270 मीटर की ऊंचाई पर चोराबाड़ी ग्लेशियर है. यहां 50 फ़ीट तक बर्फ गिरी. इस अच्छी बर्फबारी का फायदा ये हुआ कि गर्मियों में स्नो लाइन ४००० मीटर तक तिकी रही. जिस ऊंचाई तक बर्फ टिकी रहती है उसे स्नो लाइन कहा जाता है. पिछले कुछ वर्षों में स्नो लाइन ४५०० से ४७०० मीटर ऊंचाई तक पहुँच जाती है. कभी कभी ये 5000 मीटर तक पहुंच जाती है. 

 

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ग्लेशियर पर इस साल 50 फीट तक बर्फ गिरी है.

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वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ डी पी डोभाल का कहना है "केदारनाथ धाम के ऊपर साढ़े छह किलोमीटर लम्बा चोराबाड़ी ग्लेशियर है. इस ग्लेशियर पर इस साल 50 फीट तक बर्फ गिरी है.गर्मियां खत्म होने और बरसात शुरू होने के बाद भी अभी तक ग्लेशियर पर अच्छी बर्फ दिखाई दे रही है. डॉ डोभाल आगे कहते हैं कि " पूरी दुनिया भर में ग्लेशियर के पिघलने पर बहस हो रही है. हमें इस बार अच्छी बर्फ मिली है. अगर ऐसी बर्फ मिलती रही तो हमारे ग्लेशियर की हालत अच्छी हो जाएगी."

 

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वैज्ञानिक इस बर्फबारी से खासे उत्साहित हैं

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फिलहालवैज्ञानिक इस बर्फबारी से खासे उत्साहित हैं. लेकिन अगले साल कितनी बर्फ केदारनाथ या हिमालयन क्षेत्र में मिलेगी ये कह पाना मुश्किल है. अगर ऐसी बर्फ ही हिमालयी क्षेत्रों को मिलती रहेगी तो ग्लेशियर्स की सेहत तो बेहतर होगी ही. इसके कारण प्राकृतिक स्रोतों और नदियों में पानी की आपूर्ति भी बेहतर होती रहेगी.