PHOTOS: सांगली में बाढ़ में 150 साल पुरानी लाइब्रेरी भी हुई तबाह, करोड़ों की किताबें हुईं बर्बाद

सांगली शहर में 150 साल पूरानी लाइब्रेरी की 90 हजार से ज्यादा किताबे पानी में डूब गईं जिनकी कीमत एक करोड़ रूपए से भी ज्यादा है, लेकिन इन किताबों मे जो ज्ञान था उसका मूल्य लगाना मुश्किल है.

रविंद्र कांबले | Aug 21, 2019, 15:41 PM IST

सांगलीः महाराष्ट्र के सांगली में आई बाढ़ ने यहां के लोगों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. हजारों लोगों के घर, खेत, खलिहान सबकुछ पानी में डूब गए. हो सकता है कि कुछ सालों में इस नुकसान की भरपाई सरकार और खुद से पूरी हो जाए, लेकिन कुछ नुकसान कभी पूरे नहीं हो पाते हैं. सांगली शहर में 150 साल पूरानी लाइब्रेरी की 90 हजार से ज्यादा किताबे पानी में डूब गईं जिनकी कीमत एक करोड़ रूपए से भी ज्यादा है, लेकिन इन किताबों मे जो ज्ञान था उसका मूल्य लगाना मुश्किल है.

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अब पढ़ने के काम नहीं आ सकतीं ये किताबें

 Now these books cannot be used to read

किताबों की हालत खराब होने के कारण इन किताबों को पढ़कर आने वाली पीढ़ियां जो इन्हें पढ़कर मूल्यवान ज्ञान प्राप्त करतीं, वह इससे महरूम हो गई हैं. बाढ़ का पानी उतरने के बाद लाइब्रेरी में काम करने वाले कर्मचारी किताबों को फिर से ठीक करने में लगे हैं, लेकिन हजारों किताबो की हालत लुगदी जैसी हो गई और इन्हें फिर से इन्हें पढ़ने में ले आना मुश्किल ही लगता हैं. 

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कंप्यूटर सिस्टम भी पानी के कारण खराब हो गए

 Computer systems also broke down due to water

लाइब्रेरी मे काम करने वाले लोगों का कहना है कि पानी के कारण उनका कंप्यूटर सिस्टम भी खराब हो गया है. लायब्रेरी में किताबों का संभालने का काम करने वाली धनश्री मोरे का कहना है कि काफी ज्यादा नुकसान हुआ है, सभी भाषाओ की पुस्तके खराब हुईं हैं.

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लाइब्रेरी में सभी भाषाओं की किताबें थीं

 The library had books in all languages

हम इन्हें छत पर सुखाकर फिर से ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किताबों की हालत काफी खराब है. दो मंजिला मंजिला इमारत बनी इस लाइब्रेरी में सभी भाषाओं मराठी, हिंदी कन्नड़, तमिल और तेलुगू की सैकड़ो साल पूरानी किताबें थीं.

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यहां हस्तलिखित पांडुलिपी भी थी

 There was also a handwritten manuscript here

इन किताबों में हस्तलिखित पाडुंलिपि भी थी. उन्हीं पाडुंलियो में से एक हाथ से लिखी मनुस्मृति भी थी जो पानी में डूबकर लुगदी जैसे हो गई. सांगली की ये लाइब्रेरी सांगली की रॉयल फैमली चिंतामणी पटवर्धन परिवार का खुद का कलेक्शन था. जिसे बाद में आम लोगों के लिए खोल दिया गया.

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लाइब्रेरी में 50 रुपये देकर कोई भी बन सकता है सदस्य

 Anyone can become a member by paying 50 rupees in the library

इस लाइब्रेरी में कोई भी 50 रुपए महीने देकर सदस्य बन सकता था और दुनिया भर का ज्ञान प्राप्त कर सकता था. किताबों के पानी में डूब जाने पर महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष शितला दूबे का कहना है कि किताबें ही नए मार्ग दिखाती हैं और नए जीवन की तरफ ले जाती हैं.

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किताबों की डिजीटल कॉपी होना जरूरी

Must have a digital copy of books

शितला दूबे का कहना है कि ऐसे किसी भी घटना से बचने के लिए किताबों की डिजीटल कॉपी बनाई जानी चाहिए और उन्हें क्लाउड पर सेव किया जाना चाहिए जिससे जब भी उनकी जरूरत तो उन्हें अपने इस्तेमाल मे लाया जा सके.