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PHOTOS: रतलाम के कवलका जी मंदिर में देर तक गूंजते रहे माता के भजन, भक्तों ने जमकर किया गरबा

मान्यता है कि नवरात्रि में अष्टमी तिथि पर मां कालिका का विशेष आशीर्वाद भक्तों को मिलता है, जिसके चलते अष्टमी के दिन सुबह 4 बजे से ही मंदिर में भक्ति का हुजूम उमड़ पड़ता है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Oct 06, 2019, 10:18 AM IST

रतलामः मध्यप्रदेश के रतलाम में स्थित प्राचीन मां सातरुंडा मंदिर पर नवरात्रि में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है. सातरुंडा माता का मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, लेकिन चारों तरफ दूर तक समतल जमीन के बीच यह पहाड़ी कुदरत के अनोखे रूप को दर्शाती है और इस तरह दूर-दूर तक समतल धरातल पर सिर्फ एक पहाड़ी को लेकर चर्चित कहानी भी सच साबित होती है. कहा जाता है कि पांडवकाल में भीम अज्ञात वास कें समय यहां आए थे और अपनी गाय गुम होने पर उसकी तलाश करने के लिए यह ऊंची पहाड़ी बनाई थी.

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मां कालिका का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं भक्त

Devotees reach to take blessings of mother Kalika

मान्यता है कि नवरात्रि में अष्टमी तिथि पर मां कालिका का विशेष आशीर्वाद भक्तों को मिलता है, जिसके चलते अष्टमी के दिन सुबह 4 बजे से ही मंदिर में भक्ति का हुजूम उमड़ पड़ता है. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी को हजारों की संख्या में भक्त मंदिर में मां कालिका का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.

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नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़

Crowds of devotees thrive in Navratri

जो भी भक्त मनोकामना लेकर यहां आते हैं, मां कालिका उनकी प्रार्थना को जरूर स्वीकार करती हैं. वैसे तो 12 महीनो ही यहां भक्तो का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि में तो यहां भक्तों का सेलाब उमड़ता है.

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गरबा खेलने बाहर से भी आते हैं लोग

People also come from outside to play garba

नवरात्रि मे सुबह 4 बजे से ही यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है और दर्शनार्थियों की लंबी कतार देर रात तक रहती है. वहीं सबसे खास और आकर्षण इस मंदिर पर सुबह 4 बजे का गरबा होता है. बता दें इस मंदिर में गरबा खेलने बाहर से भी भक्त आते हैं.

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पारंपरिक वेशभूषा में होता है गरबा

Garba takes place in traditional costumes

आज के समय में जहां आकर्षक साज-सज्जा, डीजे की धुन और फैशन की नई ड्रेस में गरबा पांडाल में गरबे होते हैं, वहीं आज भी प्राचीन कालिका माता के मंदिर पर पारंपरिक वेशभूषा के साथ महिलाएं और बेटियां यहां गरबा करती हैं. खास बात यह है कि यहां डीजे की धुन पर नहीं बल्कि माता के भजनों पर गरबा होता है. 

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मां को लगता है मदिरा का भोग

Mother feels the enjoyment of alcohol

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि नवरात्र में भी बड़ी दूर-दूर से भक्त यहां माता के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं. मां की प्रतिमा को मदिरा का भोग लगाया जाता है