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PHOTOS: पशुपतिनाथ मंदिर के आठों मुख हुए जलमग्न, शिवना नदी ने किया जलाभिषेक

पिछले लगभग 60 घंटों से उफान पर चल रही शिवना नदी का पानी रात में पशुपति नाथ मंदिर में प्रवेश किया और पहले 4 और फिर आठो मुख जलमग्न हो गए.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Aug 16, 2019, 11:31 AM IST

नई दिल्लीः मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है, जिससे शहर के अधिकतर इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. पिछले लगभग 60 घंटों से उफान पर चल रही शिवना नदी का पानी रात में पशुपति नाथ मंदिर में प्रवेश किया और पहले 4 और फिर आठो मुख जलमग्न हो गए. गुरुवार की रात शिवना नदी ने भगवान पशुपतिनाथ का जलाभिषेक किया, जिसके बाद अब नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है.

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शिवना नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है

Water level of Shivna river has increased considerably

लगातार हो रही बारिश के चलते शिवना नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था, वहीं कालाभाटा बांध का तीसरा गेट खोलने पर यह पानी पशुपतिनाथ मंदिर तक पहुंच गया और पूरा मंदिर जलमग्न हो गया. मंदिर में पानी भरने के बाद भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी मूर्ती भी पूरी तरह से पानी में डूब गई.

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पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास

History of Pashupatinath Temple

मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ की अष्टमुखी प्रतिमा विराजित है, जबकि नेपाल में चार मुखी पशुपतिनाथ विराजित हैं. इस प्रतिमा की तुलना नेपाल के पशुपतिनाथ से की जाती है. मंदसौर में इस प्रतिमा की स्थापना 23 नवंबर 1961 को स्वामी प्रत्यक्षानंद महाराज ने की थी, जिसके बाद 27 नवंबर को इस प्रतिमा को पशुपतिनाथ के रूप में नामकरण किया गया. 

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पहली बार 1940 में दिखाई दी थी प्रतिमा

 The statue first appeared in 1940

पहली बार यह प्रतिमा 1940 में देखी गई थी, जो कि शिवना नदी से बाहर आई थी. 21 सालों तक नदी के तट पर ही रखी रही इस प्रतिमा की इस दौरान नदी तट पर ही पूजा होती रही, लेकिन बाद में इसे मंदिर में विराजित किया गया.

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भारी बारिश से शहर की निचली बस्तियों में पानी भर गया है

Heavy rains have flooded the city's lower settlements

बता दें मंदसौर में जारी भारी बारिश से शहर की निचली बस्तियों में पानी भर गया है. शहर को शिवना के उफान ने दो हिस्सो में बाट दिया है. अभिनन्दन समेत कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति है. ग्रामीण अंचल में कई गावों में निचली बस्तियों में पानी भर चुका है. तालाबों के किनारे पर रहने वाले लोगों ने लबालब भरे तालाबों के पास डर के साए में जागकर रात गुजारी.

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अभी जिले में 3000 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं

More than 3000 people are living in relief camps in Mandsaur

पुलिस प्रशासन और समाजसेवियों की टीम मुस्तैदी से अपना काम कर रही है और राहत शिविरों में रह रहे लोगों को खाना और शुद्ध जल की व्यवस्था की जा रही है. अभी जिले में 3000 से ज्यादा लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. बारिश से ग्रामीण इलाकों में कई कच्चे मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.

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2 दिनों से ग्रामीणों को राहत शिविर में रखा गया है

Villagers have been kept in relief camps since 2 days

जिले के गांव हैदरवास में जलभराव की स्थिति होने की वजह से पिछले 2 दिनों से ग्रामीणों को राहत शिविर में रखा गया है. गंगा गार्डन के राहत शिविर में रह रहे लोग बारिश के थमने का इंतजार कर रहे हैं. (सभी फोटो ANI से)