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एस्प्रिन से नहीं कम होता हार्ट अटैक का खतरा, जानिए क्या कहती है रिसर्च

आधुनिक भारत में लोगों के प्रति सेहत को लेकर काफी जागरुकता आई है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Sep 19, 2018, 13:18 PM IST

सेहत के प्रति जागरुकता के कारण ही देश के लोगों में बीमारियों का खतरा कम हुआ है. मौसमी बीमारियों में कौन सी दवाई लेनी चाहिए इसके प्रति तो लोग सचेत हैं, लेकिन कुछ बीमारियों की दवाईयों से आज भी अनजान हैं. 

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एस्प्रिन पर क्या करती है शोध

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रोजाना दर्द निवारक गोलियों के बारे में नई शोध सामने आ रही है. ऐसे में नई शोध एस्प्रिन को लेकर आई है. एक नए शोध में पता चला है कि रोजाना एस्प्रिन की खुराक लेने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम नहीं होता. 

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दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है कम!

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एस्प्रिन का इस्तेमाल दर्द निवारक के रूप में 16वीं शताब्दी से किया जा रहा है. वर्ष 1960 से इसकी पहचान एक ऐसी औषधि के रूप में होती रही है, जो उन लोगों में दिल का दौरा पड़ने के खतरे को कम देता है जो पहले भी इसका सामना कर चुके हैं. 

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न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ शोध

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न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित तीन अध्ययनों के मुताबिक 70 साल के अपेक्षाकृत स्वस्थ्य बुजुर्गों को प्रतिदिन एस्प्रिन की हल्की डोज (100 मिलीग्राम) देने के बावजूद उनमें दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम नहीं हुआ और न ही वृद्धावस्था से जुड़ी अन्य प्रकार की बीमारियों का खतरा कम हुआ. (फोटो साभार : Inflazome)

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19000 लोगों पर किया गया अध्ययन

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‘एएसपीआरईई’ नाम के इस अध्ययन में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के 19,000 से अधिक लोगों पर सात से ज्यादा अध्ययन किया गया. ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्विद्यालय में प्रोफेसर जॉन मैकनील ने कहा, ‘‘इस लंबे और जटिल अध्ययन से यह संदेश मिलता है कि स्वस्थ बुजुर्ग लोगों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए एस्प्रिन से कोई मदद नहीं मिलती.’’