सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, कहा- सेक्स वर्कर को भी है 'न' कहने का अधिकार

यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Nov 03, 2018, 11:22 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. शनिवार के अखबारों की बात करें तो सभी अखबारों ने एम जे अकबर पर लगे रेप के आरोप की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है.

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सेक्स वर्कर की भी ना का मतलब ना

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नवभारत टाइम्स: नवभारत टाइम्स के शनिवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि अगर कोई सेक्स वर्कर भी है, तो भी उसे 'न' कहने का अधिकार है. खबर के मुताबिक राजधानी में 1997 में हुए गैंगरेप के मामले में चार आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है. खबर में जानकारी दी गई है कि 28 जुलाई 1997 को कटवारिया सराय इलाके में हुए इस केस में निचली अदालत ने आरोपियों को 10 साल कैद की सजा सुनाई थी. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला के खिलाफ इस शिकायत को तरजीह दी कि वह सेक्स वर्कर थी और उसका कैरेक्टर ठीक नहीं था. इस तरह हाई कोर्ट ने मई 2009 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और आरोपियों को सजा पूरी करने के लिए चार हफ्ते में सरेंडर करने को कहा है.

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नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाना चाहती है देश की जनता

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के शनिवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गई एक खबर में दावा किया गया है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा सरकार बनाने की राह आसान होती लग रही है. खबर के मुताबिक एक ताजा ऑनलाइन सर्वे में 63 फीसद से अधिक प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में अपना पूरा विश्वास जताया है. जबकि 50 फीसद मतदाताओं का कहना है कि मोदी के लिए बतौर प्रधानमंत्री दूसरा कार्यकाल जनता के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक है. खबर में जानकारी दी गई है कि एक नए पोर्टल 'डेली हंट' और डाटा एनालिटिक कंपनी नेलसन इंडिया के ताजा सर्वे में देश-विदेश के 54 लाख भारतीय प्रतिभागियों का ऑनलाइन सर्वे किया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने छीन ली सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी

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राजस्थान पत्रिका: राजस्थान पत्रिका के शनिवार के अंक में प्रमुखता के साथ प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि यूपी के बागपत जिले का दत्तनगर गांव पटाखों के निर्माण के लिए जाना जाता है. खबर के मुताबिक आजादी से पहले यहां के लोग पटाखे बनाने में निपुण थे. लगभग 100 साल से यहां पर पटाखे बनाने का कारोबार चल रहा है, जिसमें गांव के कई परिवार वर्षों से पटाखे बनाते आ रहे हैं. खबर में आगे जानकारी दी गई है कि इनके पटाखों से आसपास के क्षेत्र ही नहीं बल्कि दिल्ली से हरियाणा तक के लोग दिवाली का त्यौहार मनाते हैं, लेकिन कोर्ट के एक आदेश ने इन लोगों का रोजगार छीन लिया है. पुलिस की कार्रवाई से इन लोगों के रोजगार पर संकट के बादल छा गए हैं.

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दस साल पुराने वाहनों का दिल्ली सरकार क्या करे

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हिन्दुस्तान: हिन्दुस्तान अखबार के शनिवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि दिल्ली परिवहन विभाग ने 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया है. इसमें शामिल 15 साल पुराने वाहनों को उसे स्क्रैप करने का अधिकार है. मगर, 10 साल पुराने वाहनों का क्या किया जाए, इस पर सरकार असमंजस में है. खबर के मुताबिक अब परिवहन विभाग सोमवार को एनजीटी जाने की तैयारी में है. खबर में बताया गया है कि दिल्ली में 3.3 लाख डीजल वाहन दस साल पुराने हैं. वहीं, 36.7 लाख वाहन 15 साल पुराने हैं जोकि पेट्रोल चालित हैं. परिवहन विभाग के पास 15 साल पुराने वाहनों के जब्त कर उसे स्क्रैप करने का अधिकार है, लेकिन 10 साल पुराने वाहनों को एनजीटी ने सिर्फ जब्त करने के निर्देश दिए हैं.

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ग्रीन पटाखों से अनजान हैं व्यापारी

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अमर उजाला: अमर उजाला के शनिवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि दिल्ली के व्यापारी ग्रीन पटाखों से अनजान हैं. खबर के मुताबिक दुकानदारों से लेकर खरीदारों तक किसी को भी इन पटाखों के बारे में जानकारी नहीं है. खबर में सदर बाजार पटाखा विक्रेता संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता के हवाले से बताया गया है कि ग्रीन पटाखा बनाने वालों को ही नहीं पता है कि यह होता क्या है. यह पहली बार सुनने में आया है कि इस तरह के भी पटाखे होते हैं. जिनसे प्रदूषण या आवाज नहीं होती. खबर में जानकारी दी गई है कि दिल्ली के पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि पिछले साल पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगने के कारण करोड़ों रुपये के पटाखों को गोदाम में रखना पड़ा था.