सन 1991 में नरसिम्हा राव नहीं बल्कि यह नेता थे प्रधानमंत्री पद के लिए सोनिया गांधी की पहली पसंद

साल 1991 के आम चुनाव में श्रीपेरुं बुदूर में प्रचार अभियान के दौरान राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस 244 सीटों के साथ सत्ता में आई थी.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | May 21, 2019, 09:29 AM IST

यह अपनी तरह का एक अनोखा चुनाव था जोकि दो हिस्सों में हुआ था. एक राजीव की हत्या से पहले और एक हत्या के बाद. 20 मई को राजीव की हत्या से पहले 534 संसदीय क्षेत्रों में से 211 में मतदान हो चुका था. बाकी पर चुनाव बाद में, 12 व 15 जून को हुआ.

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दोबारा हुई हक्सर और सोनिया की मुलाकात

Repeated Haksar and Sonia meet

सिंह ने कहा कि इसके बाद उनकी, हक्सर और सोनिया गांधी की फिर मुलाकात हुई और मुद्दे पर विचार किया गया. सिंह ने कहा, "तब, हक्सर ने कहा कि पी.वी (नरसिम्हा राव) दूसरी पसंद होने चाहिए और श्रीमती गांधी ने इस पर सहमति जताई. मैं साफ कर दूं कि इस मामले पर राव के साथ विचार विमर्श करने वालों में मैं शामिल नहीं था. जब राव तैयार हो गए और शरद पवार नेतृत्व की दौड़ से बाहर हो गए तब सीडब्ल्यूसी और कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें (राव को) नया कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री चुना."

 

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मुलाकात का सिलसिला

Meeting

नटवर सिंह ने कहा, "एक दिन बाद श्रीमती गांधी ने मुझसे कहा कि हक्सर से मैं कहूं कि वह उनसे आकर मिलें. इसके बाद मैंने और हक्सर ने उनसे मुलाकात की और नेतृत्व के मुद्दे पर बात की. हक्सर ने उनसे कहा कि उप राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा देश और पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही रहेंगे. उन्होंने थोड़ी देर सोचा और फिर इस पर रजामंदी जताई. जल्द ही मैं और (दिवंगत) अरुणा आसफ अली ने शंकर दयाल शर्मा से मुलाकात की और उनके सामने पेशकश रखी. हमें बहुत बड़ा ताज्जुब हुआ."

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क्यों मांगा था 24 घंटे का वक्त

Why was the 24 hour time sought

नटवर सिंह ने कहा, "तो, अंतिम संस्कार के बाद मैंने श्रीमती गांधी से इस पर बात की. मैंने उनसे कहा कि आपने सीडब्ल्यूसी की अपील को नहीं मानकर ठीक काम किया लेकिन हमें किसी को तो पार्टी और नई सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुनना होगा. वह चुप रहीं. फिर मैंने उनसे कहा कि वह इस मुद्दे पर (इंदिरा गांधी के प्रमुख सलाहकार रह चुके) पी. एन. हक्सर से भी बात करें. उन्होंने इस पर विचार के लिए 24 घंटे मांगे."

 

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पार्टी का अध्य़क्ष बनने को तैयार नहीं थी सोनिया

Sonia was not ready to be president of the party

उस वक्त उप राष्ट्रपति शर्मा (जो बाद में राष्ट्रपति बने) को नटवर सिंह और अरुणा आसफ अली प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए राजी नहीं कर सके. उन्होंने अपनी उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया. सीडब्ल्यूसी की अपील के बावजूद सोनिया गांधी ने पार्टी का अध्यक्ष बनने से मना कर दिया. इसके बाद हक्सर ने दोबारा पूछे जाने पर नरसिम्हा राव का नाम लिया.

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पी.एन.हक्सर से सोनिया गांधी ने ली थी सलाह

Sonia Gandhi had taken advice from P.N. Haksar

कांग्रेस अचानक नेतृत्वहीन हो गई और राजीव गांधी की शोकसंतप्त पत्नी सोनिया गांधी केंद्र में आ गईं. उस समय उनके सबसे करीबी सलाहकारों में से एक के. नटवर सिंह ने उनसे पूछा कि संसदीय दल का नेता किसे बनाना चाहिए. पी.एन.हक्सर की सलाह पर सोनिया ने नटवर सिंह और अरुणा आसफ अली को शंकर दयाल शर्मा के पास भेजा और उन्हें प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए राजी करने का दायित्व सौंपा.

 

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राजीव की हत्या के बाद मिली कांग्रेस को बड़ी जीत

Congress win big after Rajiv's assassination

इस चुनाव के नतीजे भी अलग तरह के रहे. राजीव की हत्या से पहले की सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा और राजीव की हत्या के बाद कांग्रेस को जबरदस्त जीत मिली.