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‘स्माइलिंग बुद्धा’ से भारत ने आज दिखाई थी ऐसी ताकत, दुनिया भी देखकर हो गई थी दंग

साल 1974 में 18 मई का दिन एक ऐसी अहम घटना के साथ इतिहास में दर्ज है, जिसने भारत को दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा कर दिया.  

ज़ी न्यूज़ डेस्क | May 18, 2019, 15:07 PM IST

नई दिल्ली: इस विशाल जगत में हर दिन कुछ न कुछ अच्छा बुरा घटित होता रहता है. कभी धरती पर तो कभी सुदूर अंतरिक्ष में. इनमें से कुछ घटनाएं वक्त के साथ भुला दी जाती हैं और कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं इतिहास में अपना नाम दर्ज कराती हैं. साल 1974 में 18 मई का दिन एक ऐसी अहम घटना के साथ इतिहास में दर्ज है, जिसने भारत को दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा कर दिया.  

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जब भारत ने पहली बार किया था परमाणु परीक्षण

when first time India did the nuclear test

भारत ने आज ही के दिन राजस्थान के पोकरण में अपना पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था. इस परीक्षण को ‘स्माइलिंग बुद्धा’ का नाम दिया गया था. यह पहला मौका था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों के अलावा किसी और देश ने परमाणु परीक्षण करने का साहस किया. (फोटो साभार- nuclearweaponarchive.org)

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बातों ही बातों में ऐसे मिली इजाजत

Indira Gandhi Approved permission

इस परीक्षण की प्रस्तावना वर्ष 1972 में लिखी गई, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री और भारत की लौह महिला इंदिरा गांधी ने भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (बीएआरसी) का दौरा किया और वहां के वैज्ञानिकों से बातों ही बातों में उन्हें परमाणु परीक्षण के लिए संयंत्र बनाने की इजाजत दे डाली. (फोटो साभार- nuclearweaponarchive.org)

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भारत को परमाणु शक्ति संपन्‍न बनाने के लिए पहला कदम

First step to make India a nuclear power

यह परीक्षण भारत को परमाणु शक्ति संपन्‍न राष्‍ट्र बनाने की तरफ पहला कदम था. भारत ने जिस वक्‍त यह परीक्षण किया था, उस वक्‍त अमेरिका, वियतनाम युद्ध में उलझा हुआ था. (फोटो साभार- nuclearweaponarchive.org)

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अमेरिका ने लगा दिए थे कई प्रतिबंध

America had put many restrictions

भारत के परमाणु परीक्षण की तरफ उसका ध्‍यान उस वक्‍त गया, जब भारत ने खुद को परमाणु शक्ति संपन्‍न देश घोषित किया. अमेरिका के लिए इससे भी बड़ी चिंता की बात यह थी कि आखिर उसकी खुफिया एजेंसियों और सैटेलाइट को इसकी भनक कैसे नहीं लगी? इस परीक्षण का नतीजा था कि अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे. लेकिन तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन सभी को एक चुनौती के तौर पर स्‍वीकार किया था. (फोटो साभार- nuclearweaponarchive.org)

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एपीजे अब्‍दुल कलाम भी थे मिशन में शामिल

APJ Abdul Kalam was also included in the mission

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष राजा रमन्‍ना ने इस पूरे टेस्‍ट की कमान संभाली थी. उस वक्‍त उनके साथ भारत के मिसाइल प्रोग्राम के जनक डॉक्‍टर एपीजे अब्‍दुल कलाम भी थे. (फोटो साभार- @INCIndia)

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इसलिए मिला स्माइलिंग बुद्धा नाम

Hence got smiling Buddha name

गोपनीय तरीके से पोखरण में किए गए पहले परमाणु परीक्षण के लिए रखे गए इस नाम की अलग वजह है. पहला कारण तो यह कि जिस दिन यह परीक्षण किया गया उस दिन बुद्ध पूर्णिमा थी और दूसरी वजह ये कि भारत इस परीक्षण के जरिए दुनिया में शांति का संदेश देना चाहता था. इसलिए इसका नाम स्माइलिंग बुद्धा रखा गया. (फोटो साभार- nuclearweaponarchive.org)