पाकिस्तानी अखबार ने भारत के इस बिजली परियोजना को बताया 'विवादास्पद', PM मोदी ने किया था उद्घाटन

अब आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं है सिर्फ एक क्लिक में आप पढ़ सकेंगे पड़ोसी देशों की बड़ी खबरें.

May 20, 2018, 13:10 PM IST

नई दिल्ली. हम आपके लिए लाए हैं पड़ोसी मुल्कों (पाकिस्तान, नेपाल, चीन और बांग्लादेश) के प्रमुख अखबारों की अहम खबरें. अब आपको कहीं और जाने की जरूरत नहीं है सिर्फ एक क्लिक में आप पढ़ सकेंगे पड़ोसी देशों की बड़ी खबरें.

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पाकिस्तान: पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी अखबार डॉन ने अपने रविवार के अंक में शनिवार को हुए पीएम मोदी के कश्मीर दौरे से संबंधित एक खबर अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित की है जिसका शीर्षक है, 'मोदी ने कश्मीर में विवादास्पद पावर स्टेशन का उद्धाटन किया'. खबर में बताया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के जम्मू-कश्मीर में एक जलविद्युत बिजली संयंत्र का उद्घाटन किया, जिसके विरोध में पाकिस्तान में प्रदर्शन हुए. खबर में बताया गया है कि 330 मेगावाट की क्षमता का किशनगंगा जलविद्युत स्टेशन उन परियोजनाओं में से एक है जिसे भारत ने विवादित हिमालयी क्षेत्र में तेजी से विकसित किया. खबर में यह भी बताया गया है कि मोदी ने श्रीनगर में कहा, 'यह क्षेत्र न केवल सत्ता में आत्मनिर्भर हो सकता है बल्कि देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी उत्पादन कर सकता है.'

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नेपाल: नेपाल के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द हिमालयन टाइम्स के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर में बताया गया है नेपाल के मौजूदा प्रधानमंत्री अगले महीने अपने पड़ोसी देश चीन की यात्रा पर जा सकते हैं. खबर के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने एनसीपी के संसद सदस्यों को बताया है कि वे अगले महीने चीन की यात्रा पर जा सकते हैं. खबर में दावा किया गया है ओली मई 29 में पेश होने वाले बजट के बाद जून में चीन की यात्रा का प्लान बना रहे हैं. खबर में बताया गया है कि ओली ने कहा, "हमें अपने पड़ोसियों के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते संतुलित रखने चाहिए." ओली का यह बयान चीन यात्रा का प्लान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी हाल ही में पीएम मोदी दो दिवसीय नेपाल यात्रा से लौटे हैं और उससे पहले ओली खुद भारत आ चुके हैं.

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बांग्लादेश: बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द इंडिपेंडेंट के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गई एक खबर दावा करती है कि नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एनबीआर) कानूनी जटिलताओं के कारण 9,962 करोड़ रुपये (टका) से अधिक अवैतनिक राजस्व एकत्र करने में सक्षम नहीं हो पाया. खबर में एनबीआर की इस विवशता का कारण बताते हुए लिखा गया है कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के उच्च न्यायालय (एचसी) डिवीजन और अपीलीय डिवीजन के समक्ष 4,378 मामले लंबित हैं. खबर में सुप्रीम कोर्ट (एससी) के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि देश की चार बड़ी कंपनियों - ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको बांग्लादेश, ग्रामीणफोन, रोबी और बांग्लालिंक के बकाया कर और वैट भुगतान की भारी राशि बकाया है जो उपरोक्त आंकड़े का करीब 70 फीसदी होती है. खबर के मुताबिक चारों कंपनियों पर कानूनी जटिलताओं के चलते 7,170 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है.