दिल्ली के बच्चों को सता रहा है अंग्रेजी का 'डर', छोड़ रहे हैं स्कूल: रिसर्च

सोमवार के अखबारों की बात करें तो लगभग सभी अखबारों ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अबूधाबी में मंदिर की नींव रखने और जम्मू में सेना की ब्रिगेड पर हुए फिदायीन हमले की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

Feb 12, 2018, 08:48 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. सोमवार के अखबारों की बात करें तो लगभग सभी अखबारों ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अबूधाबी में मंदिर की नींव रखने और जम्मू में सेना की ब्रिगेड पर हुए फिदायीन हमले की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

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हिन्दुस्तान: दिल्ली के बच्चों को अंग्रेजी का डर सता रहा है इसलिए वह स्कूल जाने से कतराने लगे हैं. हिन्दुस्तान ने अपने सोमवार के अंक में इस बात का खुलासा किया है. अखबार के पहले पन्ने पर छपी इस खबर में बताया गया है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, अंग्रेजी भाषा में संवाद की वजह से बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं. खबर में बताया गया है कि एनसीपीसीआर ने इस बारे में सुझाव दिया है कि जहां तक संभव हो बच्चों को पढ़ाने का माध्यम उनकी मातृभाषा होनी चाहिए. यह अध्ययन समूची दिल्ली के 650 स्कूलों द्वारा स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों के विषय में दिए गए वर्षवार आंकड़े पर आधारित था. अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2011 में स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्र करीब 26 प्रतिशत थे. वर्ष 2014 में गिरकर इनकी तादाद 10 प्रतिशत रह गई.

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण के सोमवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी खबर के मुताबिक अब विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना आसानी से पूरा होने वाला नहीं है. इसके लिए अब अभ्यर्थी को नीट परीक्षा पास करनी होगी. खबर के मुताबिक केंद्र सरकार विदेश जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भी राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा (नीट) को अनिवार्य करने की योजना बना रही है. इसलिए विदेशी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस करने के इच्छुक छात्रों को पहले नीट को पास करना होगा. इसके पीछे सरकार की मंशा है कि अब सिर्फ प्रतिभाशाली छात्रों का ही चयन हो. खबर में स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि यह प्रस्ताव अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है.

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नवभारत टाइम्स: इंदिरा गांधी इंटरनैशनल (IGI) एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले हवाईजहाजों को अब हवा में ज्यादा चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. नवभारत टाइम्स ने इस खबर को अपने पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है. खबर के मुताबिक कोई इमरजेंसी हालात नहीं हुए तो टेकऑफ से पहले विमानों की लैंडिंग को प्राथमिकता दी जाएगी. दरअसल, अभी लैंडिंग से पहले फ्लाइट्स को कई बार आधे घंटे तक हवा में चक्कर लगाना पड़ता है. खबर में दावा किया गया है कि नई स्कीम के तहत यह समस्या काफी कम हो जाएगी. इससे विमान में पहली बार बैठने वालों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि हवा में चक्कर काटने से उनमें डर बैठ जाता है.

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दैनिक भास्कर: देश में अब तक कैंसर की पहचान के लिए शरीर में मौजूद जीन्स की ही जांच की जाती है. लेकिन, जल्द ही खून की सिर्फ एक जांच पांच साल पहले स्वस्थ व्यक्ति को यह बता देगी कि उसे किस तरह का कैंसर होने का खतरा है. मसलन उसे आंखों का कैंसर हो सकता है या ब्रेस्ट कैंसर. दैनिक भास्कर ने इस खबर को अपने सोमवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है. खबर के मुताबिक इस जांच का नाम 'साइटो जेनेटिक एनालिसिस' है. इसका फायदा यह होगा कि मरीज को जिस कैंसर के होने का खतरा होगा, वह उसके प्रति पहले से सावधान हो जाएगा. खबर में आगे दावा किया गया है कि विशेषज्ञों का मानना है कि खून की जांच की यह तकनीक देश में कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने में मदद करेगी.

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टाइम्स ऑफ इंडिया: टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पर भोपाल की एक खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है. खबर के मुताबिक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक 27 वर्षीय नैनोटेक्नॉलजी रिसर्चर ने झील में कूद कर जान दे दी. देवी काली के भक्त नीलोत्पल सरकार को लगता था कि ऐसा करने से उसके गे साथी की जान बच जाएगी. खबर के मुताबिक रविवार सुबह नीलोत्पल का शव अपर लेक में तैरता हुआ मिला. युवक ने अपनी कलाई पर एक टैग बांधा हुआ था जिसमें उसका नाम और मोबाइल नंबर लिखा था. खबर में सब-इंस्पेक्टर राजकुमार गुप्ता के हवाले से बताया गया है कि ऐसा लगता था कि वह चाहता था कि शव की पहचान कर उसे जल्द से जल्द उसके परिवार तक पहुंचा दिया जाए.