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आईआईटी और एम्स जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थानों में भी नहीं मिलता है 'साफ-सुथरा' खाना

शनिवार के अखबारों की बात करें तो लगभग सभी अखबारों ने पीएनबी घोटाले के साथ-साथ पीएम मोदी के 'परीक्षा पर चर्चा' को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

Feb 17, 2018, 08:57 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. शनिवार के अखबारों की बात करें तो लगभग सभी अखबारों ने पीएनबी घोटाले के साथ-साथ पीएम मोदी के 'परीक्षा पर चर्चा' को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया: टाइम्स ऑफ इंडिया के शनिवार अंक के पहले पन्ने पर देश के कुछ शीर्ष शिक्षण संस्थानों में हुए खाद्य सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट छापी गई है. खबर के मुताबिक आईआईटी, आईआईएससी और एम्स दिल्ली सहित उच्च शिक्षा के कुल 12 केन्द्रीय सस्थानों में एफएसएसएआई ने यह ऑडिट करवाया था जिसमें पाया गया है कि देश के सबसे अच्छे दिमागों को भी साफ-सुथरा भोजन मुहैया नहीं करवाया जा रहा है. जय श्री नंदी के हवाले से खबर में बताया गया है कि अधिकतर संस्थान ऑडिट में फेल साबित हुए हैं. खबर में आगे बताया गया है कि केवल आईआईएम अहमदाबाद और आईआईटी रुड़की के कैंपस किचेन ही ऐसे थे जो यह ऑडिट पास कर सके.

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के शनिवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर के मुताबिक धर्म के नाम पर छोटी-छोटी बातों को बड़ा बवाल बना दिया जाना एक सामान्य बात है, लेकिन मुजफ्फरनगर में गुरुवार को जो हुआ वह एक मिसाल भी है और उन लोगों के लिए सबक भी जो विकास और जनहित के कामों को भी मजहबी सवाल से थाम देते हैं. खबर में दावा किया गया है कि एक पुल बनना जरूरी था, लेकिन एक मस्जिद और मदरसे के कारण अड़चन आ रही थी. सहमति से उस मस्जिद और मदरसे को हटाने का फैसला हुआ तो पिछले दस साल में 70 से अधिक घरों के चिराग बुझाने वाले खूनी संधावली पुल पर जल्द काम शुरू होने की राह साफ हो गई. खबर के मुताबिक गुरुवार को मस्जिद व मदरसे को पुलिस-प्रशासन और सांसद समेत मुस्लिम समुदाय के प्रमुख लोगों की मौजूदगी में सहमति से हटा दिया गया. इसके लिए प्रशासन की ओर से मदरसे के खाते में 49 लाख रुपये की रकम डाल दी गई है, जिससे मस्जिद और मदरसा दूसरे स्थान पर बनाए जा सकें.

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नवभारत टाइम्स: नवभारत टाइम्स में पहले पन्ने पर छपी एक खबर बताती है कि देश के सबसे व्यस्त आईजीआई एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य वीवीआईपी के आने-जाने के कारण आम यात्रियों को होने वाली परेशानी कम करने का रास्ता निकाल लिया गया है. खबर के मुताबिक वीआईपी मूवमेंट के लिए अब रनवे नंबर-27 का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाने लगा है. यह रनवे टेक्निकल एरिया के सबसे नजदीक है. इसका फायदा यह होने लगा है कि अब बाकी दो रनवे-28 और 29 पर फ्लाइट्स को नहीं रोका जाता. खबर में दावा किया गया है कि अब टेक ऑफ के इंतजार में यात्रियों को ज्यादा वक्त नहीं गंवाना पड़ता, ना ही लैंडिंग करने वाले विमानों को हवा में ज्यादा चक्कर काटने पड़ते हैं. खबर में बताया गया है कि पहले तीनों रनवे से वीआईपी फ्लाइट्स उड़ती या उतरती थीं.

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हिन्दुस्तान: हिन्दुस्तान अखबार ने अपने पहले पन्ने पर दिल्ली में हुई एक सड़क दुर्घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. खबर के मुताबिक उत्तरी दिल्ली के मौरिस नगर इलाके में शुक्रवार दोपहर बेकाबू कार ने तीन लोगों को रौंद दिया. जिसके चलते हादसे में घायल 19 वर्षीय डीयू छात्र कपिल की मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी अपनी कार छोड़कर भाग गया. पुलिस ने लापरवाही से मौत की धाराओं में मामला दर्ज किया है. खबर में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि दोपहर करीब साढ़े 11 बजे तेज रफ्तार कार रिंग रोड की तरफ से आ रही थी. चालक ने रामजस चौक से वाहन को दाईं तरफ विजय नगर की ओर मोड़ दिया. मगर रफ्तार अधिक होने के कारण चालक कार से नियंत्रण खो बैठा और कार ने बाइक पर आ रहे मौरिस नगर थाने के कांस्टेबल मुकेश को टक्कर मार दी. उसके बाद कुछ दूर पर जा रही 21 साल की डीयू छात्र जागृति को टक्कर मारकर घायल कर दिया. इसी दौरान रामजस कॉलेज का छात्र कपिल अपने घर जा रहा था. कार चालक ने उसे भी अपना शिकार बना दिया. इसके बाद वह कार छोड़कर भाग गया.

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दैनिक भास्कर: दैनिक भास्कर के शनिवार अंक में गुजरात के पाटण जिले के कलेक्टर ऑफिस में एक वृद्ध व्यक्ति द्वारा किए गए आत्मदाह को तस्वीर के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है. खबर के मुताबिक पाटण के भानुभाई वणकर ने कलेक्टर ऑफिस में खुद को आग लगा ली थी जिस वजह से वे 95 फीसदी तक झुलस गए. खबर में दावा किया गया है कि वे पिछले तीन सालों से समी तहसील के दुदखा गांव में एक सरकारी जमीन पर दलित परिवार को कब्जा दिलवाने के लिए लड़ाई लड़ रहे थे. खबर में यह भी बताया गया है कि उन्होंने हफ्ते भर पहले चिट्ठी लिखकर प्रशासन को आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी थी. जिसके बाद कलेक्टर ऑफिस में भारी बंदोबस्त किया गया था और फायर ब्रिगेड को भी तैनत कर रखा गया था. इसके बावजूद भानुभाई ने खुद को आग लगा ली.