बीमा कंपनियों के पास लावारिस पड़े हैं 15,000 करोड़, किसी ने नहीं किया Claim

यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे.

Jul 29, 2018, 08:53 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. रविवार के अखबारों की बात करें तो सभी अखबारों ने पीएम मोदी के कार्यक्रम की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है.

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नवभारत टाइम्स: नवभारत टाइम्स के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि संसद में हाल में पेश रिपोर्ट बताती है कि 23 बीमा कंपनियों के पास 15 हजार करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं, जिन पर कोई दावा नहीं कर रहा है. खबर के मुताबिक इसमें LIC के पास 10,509 करोड़ तो प्राइवेट जीवन बीमा कंपनियों के पास 4,675 करोड़ हैं. खबर में आगे जानकारी दी गई है कि अब सरकार ने इस अनक्लेम्ड रकम को उसके वारिसों तक पहुंचाने की पहल शुरू की है. खबर में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने सभी बीमा कंपनियों से कहा है कि वे अपनी वेबसाइटों पर अलग से सेक्शन बनाकर अनक्लेमड राशि की जानकारी दें. ऐसा इंतजाम करें कि यहां लोग अपनी या परिजनों की संभावित बीमा पॉलिसी उसके नंबर, आधार नंबर, पैन, मोबाइल नंबर और जन्म तिथि आदि देकर सर्च कर सकें. इसके अलावा एक कमिटी बनाएं, जो ऐसी रकम को असली वारिसों तक पहुंचाने में मदद करे.

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हिन्दुस्तान: हिन्दुस्तान अखबार के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गई एक खबर में बताया गया है कि जीएसटी कम होने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है. खबर के मुताबिक उपभोक्ता मंत्रालय ने सामान बनाने वाली कंपनियों से 27 जुलाई से पहले बने सामान पर नई जीएसटी दर के हिसाब से एमआरपी का नया स्टीकर लगाने के निर्देश दिए हैं. खबर में दावा किया गया है कि इससे कंपनियां सामान की पुरानी और अधिक कीमत नहीं वसूल पाएंगी और उपभोक्ता भी ऐसे सामान नया स्टीकर देखकर ही भुगतान कर सकेंगे. खबर में यह भी बताया गया है कि उपभोक्ता मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश भी दिए है कि वो जिला स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि उपभोक्ताओं को जीएसटी कम होने का लाभ मिल रहा है या नहीं.

 

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि लोगों के निजी डाटा की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित डाटा प्रोटेक्शन कानून के निर्बाध अमल के लिए सरकार को आधार समेत कई अन्य कानून व नियमों में बदलाव करना होगा. खबर के मुताबिक डाटा प्रोटेक्शन कानून का खाका देने वाली जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा समिति ने ऐसे करीब 50 नियमों की पहचान की है. इनका दोहराव प्रस्तावित नए कानून की विभिन्न धाराओं से होगा. खबर में बताया गया है कि समिति का मानना है कि इन बदलावों के बाद ही डाटा प्रोटेक्शन कानून पर पूर्ण अमल संभव हो सकेगा. खबर में आगे यह भी बताया गया है कि समिति ने डाटा प्रोटेक्शन पर सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में आधार कानून में दो संशोधन सुझाए हैं.

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अमर उजाला: अमर उजाला के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर अलगाववादी राग अलापा है. खबर के मुताबिक महबूबा ने कहा कि अनुच्छेद 35-ए राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती है. इसे बचाने के लिए मुख्यधारा के सभी दल तथा अलगाववादी मतभेद भुलाकर साथ आएं. खबर में जानकारी दी गई है कि मुफ्ती पीडीपी के 19वें स्थापना दिवस पर शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थीं. खबर में आगे जानकारी दी गई है कि उन्होंने कहा, अनुच्छेद 35-ए बचाने की खातिर उनकी सरकार ने काफी प्रयास किए. इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल ने केस की सुनवाई स्थगित करने की अपील की.

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दैनिक भास्कर: दैनिक भास्कर के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में दावा किया गया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेंस कॉलेज ने विद्यार्थियों के साथ चर्चा से जुड़े एक कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिया गया न्योता वापस ले लिया है. खबर के मुताबिक कॉलेज के प्रिंसिपल ने ममता बनर्जी को बुलाने की अनुमति नहीं दी. खबर में जानकारी दी गई है कि कॉलेज ने शुक्रवार को ममता को न्योता दिया था लेकिन अब इसे वापस ले लिया गया है. खबर में आगे बताया गया है कि कार्यक्रम 1 अगस्त को होना था. खबर के मुताबिक टीएमसी ने इसके लिए भाजपा और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया.