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धूल भरी हवाओं से रूठा दिल्ली का मानसून, आने में करेगा 5-6 दिन की देरी

यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे.

Jun 17, 2018, 09:36 AM IST

नई दिल्ली: यहां हम आपको एक-एक कर देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों की बड़ी खबर से रू-ब-रू करवाएंगे. रविवार के अखबारों की बात करें तो सभी अखबारों ने केजरीवाल के समर्थन में आए चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया है.

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Top news of hindi and english newspaper

दैनिक भास्कर: दैनिक भास्कर के रविवार के अंक में दिल्ली में आने वाले मानसून की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है. खबर में मौसम विभाग के हवाले से बताया गया है कि अगले दो दिनों तक दिल्ली में बारिश की उम्मीद है. खबर के मुताबिक इसके साथ ही अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस तक कम रहेगा. खबर में आगे मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश के हवाले से बताया गया है कि मानसून फिर रफ्तार पकड़ सके इसके लिए राजस्थान की धूल भरी हवाओं के पैटर्न का कमजोर होना बेहद जरूरी था. खबर में दावा किया गया है कि इस वजह से मानसून पांच से छह दिनों के लिए पीछे खिसक गया है. खबर के मुताबिक उम्मीद की जा रही थी कि दिल्ली में मानसून 24 से 26 जून के दौरान पहुंचेगा लेकिन अब 30 जून या इसके बाद दिल्ली में मानसून पहुंचने की आशंका है.

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दैनिक जागरण: दैनिक जागरण के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर में बताया गया है कि आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) के तहत दावों के निपटारे में अस्पतालों को भुगतान में देरी पर सरकार ने बीमा कंपनियों पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया है. खबर में स्वास्थ्य मंत्रलय के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट के मुताबिक अगर बीमा कंपनी दावे के भुगतान में 15 दिन से ज्यादा की देरी करती है तो उसे दावे के अंतिम भुगतान की तिथि तक दावे की रकम पर प्रति सप्ताह एक प्रतिशत की दर से जुर्माना अदा करना होगा. खबर के मुताबिक बीमा कंपनी जुर्माने की इस रकम का भुगतान सीधे अस्पताल को करेगी. खबर में आगे यह भी बताया गया है कि एनएचपीएस को लागू करने के लिए अब तक 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय के साथ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं. दिल्ली, ओडिशा, पंजाब व प. बंगाल ने अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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हिन्दुस्तान: हिन्दुस्तान अखबार के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की गई एक खबर में बताया गया है कि रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि अगस्त से 90% ट्रेनें समय पर पहुंचेंगी. खबर के मुताबिक रेलमंत्री ने दो माह के भीतर देशभर में ट्रेनों के समयपालन में सुधार लाने का लक्ष्य तय किया है. खबर में दावा किया गया है कि वर्तमान में ट्रेनों का समयपालन 65% पहुंच गया है जबकि कई जोन में यह 45 फीसदी तक है. खबर में आगे यह भी बताया गया है कि गोयल ने ट्रेनों के समयपालन में सुधार के लिए कई नियमों में बदलाव किए हैं. वहीं, खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को घर जाने की सलाह दी है. खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि समीक्षा बैठक में रेलमंत्री के तेवर काफी सख्त थे. उन्होंने बैठक में शामिल जोनल महाप्रबंधकों व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सभी डीआरएम को ट्रेन समयपालन सही करने को कहा. गोयल ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जिन जोनल रेलवे से चलने वाली ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चलेंगी उन पर जुर्माना लगाया जाएगा.

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अमर उजाला: अमर उजाला के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर चंडीगढ़ की एक अहम खबर प्रकाशित की गई है. खबर में बताया गया है कि पंजाब-हरियाणा कोर्ट ने कहा है कि यदि मांगे गए वाहन से कोई दुर्घटना होती है तो बीमा कंपनी उस क्लेम के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं है. खबर के मुताबिक अदालत ने यह बात मोटर दुर्घटना संबंधी एक याचिका का निपटारा करते हुए कही है. खबर में आगे बताया गया है कि हाईकोर्ट ने कहा कि वाहन का पर्सनल एक्सीडेंट कवर बीमा था. इस हालत में कंपनी केवल वाहन मालिक के साथ कोई दुर्घटना होने की स्थिति में मुआवजा देने को बाध्य है. भले ही कोई व्यक्ति किसी वाहन को लेकर जाता है और उसके पास वैध लाइसेंस होता है तो भी वह ऑनर ड्राइवर की परिभाषा में नहीं आता है.

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नवभारत टाइम्स: नवभारत टाइम्स के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर बताती है कि चोरी, लूट या स्नैचिंग जैसी वारदात का शिकार बनने के बाद लोगों के सामने अक्सर यह समस्या आती है कि वे इसकी रिपोर्ट कौन से थाने में करें. खबर के मुताबिक अब दिल्ली पुलिस इस तरह की समस्या को खत्म करने के लिए एक ऐप लाने जा रही है. खबर में बताया गया है कि एप में ना सिर्फ क्राइम की जगह का थाना बता दिया जाएगा, बल्कि उस इलाके के बीट ऑफिसर से लेकर एसएचओ, एसीपी और डीसीपी तक के मोबाइल नंबर भी मिल सकेंगे. खबर में दावा किया गया है कि इस ऐप के बाद थाने में जाने पर कोई पीड़ित को यह कहकर गुमराह नहीं कर पाएगा कि जहां वारदात हुई है, वह उनके थाने के एरिया में नहीं आता.