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बिना इंजन वाली 'ट्रेन-18' ने फिर बनाया रिकॉर्ड, इस बार ड्राइवरों को भी सम्मानित किया

देश की पहली इंजनलैस हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस (Train-18) ने कम समय में ही अपने नाम कई रिकॉर्ड कर लिए हैं. पिछले दिनों ट्रेन ने समय से चलने का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब एक और रिकॉर्ड बनाया है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 25, 2019, 15:38 PM IST

देश की पहली इंजनलैस हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस (Train-18) ने कम समय में ही अपने नाम कई रिकॉर्ड कर लिए हैं. पिछले दिनों ट्रेन ने समय से चलने का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब एक और रिकॉर्ड बनाया है. यह ट्रेन की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यह ट्रेन गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से इलाहाबाद के बीच औसतन 104 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से चलती है. यह देश में चलने वाली ट्रेनों की सबसे अधिक एवरेज स्पीड है.

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1.35 लाख किमी की यात्रा हुई पूरी

train 18 loco pilot awarded by indian railway

ट्रेन को इस गति पर चलाने के लिए रेलवे ट्रैक में भी काफी सुधार किए गए हैं. रेलवे की ओर से देश की इस सबसे आधुनिक ट्रेन को इस गति पर चलाने के लिए ट्रेन के लोको पायलट को सम्मानित भी किया गया. यह ट्रेन अब तक कुल 1.35 लाख किलोमीटर तक की यात्रा पूरी कर चुकी है.

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15 फरवरी को शुरू हुआ ट्रेन का परिचालन

train 18 loco pilot awarded by indian railway

वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन 15 फरवरी 2019 को शुरू हुआ था. यह रेलगाड़ी रेलवे के तीन जोन उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे व पूर्वोत्तर रेलवे से हो कर गुजरती है. NCR जोन में यह ट्रेन इलाहाबाद मंडल में छिपियाना बुजुर्ग से इलाहाबाद जंक्शन के बीच 600 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करती है.

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यह है ट्रेन का शेड्यूल

train 18 loco pilot awarded by indian railway

वंदे भारत एक्सप्रेस सप्ताह में पांच दिन चलाई जाती है. यह रेलगाड़ी सुबह 6 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलती है. लगभग 2 बजे वंदे भारत एक्सप्रेस वाराणसी पहुंचती है. 17 फरवरी से इस रेलगाड़ी की व्यावसायिक यात्रा शुरू की गई थी. तब से ही इसे यात्रियों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है. रेल मंत्रालय भी लगातार इस रेलगाड़ी पर नजर रख रहा है.

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ट्रेन में किए गए कई बदलाव

train 18 loco pilot awarded by indian railway

रेल यात्रियों के अनुभव के आधार पर इस रेलगाड़ी में कई बदलाव किए जा रहे हैं. ट्रेन के शौचालयों को और बेहतर बनाया गया है. ट्रेन में बेहतर कैटरिंग सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के लिए इस ट्रेन में कैटरिंग की जगह को बढ़ाया जा रहा है. वहीं आए दिन होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेने में ऐसे शीशे लगाए जा रहे हैं जिन पर पत्थर लगने पर वो टूटें नहीं.