छठ महापर्व: देशभर में दिया जा रहा डूबते सूर्य को अर्घ्य, देखें तस्वीरें

लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन यानी मंगलवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने घाट पर जुट गए हैं. 

लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन यानी मंगलवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने घाट पर जुट गए हैं. 

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गोरखपुर में सूरजकुंड धाम में धूमधाम से मनाया जा रहा छठ पर्व.

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देश भर में छठ महापर्व की रौनक देखते ही बन रही है. लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन यानी मंगलवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने घाट पर जुट गए हैं. डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए देशभर के घाटों पर छठ व्रतियों की भीड़ उमड़ पड़ी है. पटना से लेकर असम और गोरखपुर तक श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा पाठ में जुटे हैं. गोरखपुर में सूरजकुंड धाम में धूमधाम से मनाया जा रहा छठ पर्व.(फोटो- ANI)

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असम में गुवाहाटी के ब्रह्मपुत्र घाट पर मनाया जा रहा छठ पर्व

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कल चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती उपवास खोलेंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे. इससे पहले व्रतियों ने सोमवार को सूर्य के ढलने के बाद प्रसाद के लिए मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ियां से गुड़ व चावल की खीर (रसियाव) व रोटियां बनाई थी. असम में गुवाहाटी के ब्रह्मपुत्र घाट पर मनाया जा रहा छठ पर्व.(फोटो- ANI)

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बिहार में पटना के गंगा घाट पर मनाया जा रहा छठ पर्व.

Ganga Ghat

बताया जाता है कि जितने सूप से अर्घ्य दिया जाता है उतनी जगह रसियाव व रोटी केले के पत्ते पर स्वच्छ स्थान पर रखकर विधिवत पूजा अर्चना की जाती है. छठ पर्व रविवार (11 नवंबर) से शुरू हो गया है. चार दिन तक मनाया जाने वाले इस त्योहार को बिहार में महापर्व के नाम से भी जाना जाता है. बिहार में पटना के गंगा घाट पर मनाया जा रहा छठ पर्व.(फोटो- ANI) 

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बिहार में पटना के गंगा घाट पर मनाया जा रहा छठ पर्व

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ये बिहार राज्य के प्रमुख त्योहारों में से एक है. छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान में पहले दिन नहाय-खाए दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य की पूजा और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं. चार दिन तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू हुआ.बिहार में पटना के गंगा घाट पर मनाया जा रहा छठ पर्व.(फोटो- ANI)

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अथर्ववेद के अनुसार षष्ठी देवी भगवान भास्कर की मानस बहन हैं

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इसके बाद खरना हुआ, जिसे पूजा का दूसरा व कठिन चरण माना जाता है. इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखेंगे और शाम को पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं. अथर्ववेद के अनुसार षष्ठी देवी भगवान भास्कर की मानस बहन हैं. प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं. उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है.

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कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है

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पूजा का महत्व : कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ पूजा  (Chhath Puja 2018) का विशेष विधान है. इस पूजा की शुरुआत मुख्य रूप से बिहार और झारखंड से हुई है, जो अब देश-विदेश तक फैल चुकी है. अंग देश के महाराज कर्ण सूर्य देव के उपासक थे.

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कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है

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अतः परम्परा के रूप में सूर्य पूजा का विशेष प्रभाव इन इलाकों पर दिखता है. कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है. अतः सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है, ताकि स्वास्थ्य की समस्याएं परेशान न करें. षष्ठी तिथि का सम्बन्ध संतान की आयु से होता है. अतः सूर्य देव और षष्ठी की पूजा से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा दोनों हो जाती हैं. इस माह में सूर्य उपासना से वैज्ञानिक रूप से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाए रख सकते हैं. इस बार छठ पूजा 13 नवंबर को की जाएगी.