राफेल डील: मोदी सरकार पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, जानें इस सौदे का सच...

मोदी सरकार ने सितंबर 2016 में फ्रांस से 36 नए राफेल फाइटर जेट खरीदने की डील की थी. ये सौदा लगभग 60,145 करोड़ (7.87 बिलियन यूरो) का हुआ था. 

वंदना यादव | Aug 28, 2018, 10:04 AM IST

मोदी सरकार ने सितंबर 2016 में फ्रांस से 36 नए राफेल फाइटर जेट खरीदने की डील की थी. ये सौदा लगभग 60,145 करोड़ (7.87 बिलियन यूरो) का हुआ था. इस सौदे के बाद से ही कांग्रेस मौजूदा सरकार पर घोटाले का आरोप लगा रही है. कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री पर राफेल डील को लेकर आरोप लगाए थे. वहीं मोदी सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया था. आइए जानें क्या है राफेल डील और कांग्रेस क्यों इसे घोटाला बताने में लगी हुई है. राफेल डील को बोफोर्स से भी बड़ा घोटाला बताया जा रहा है. पीएम मोदी ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया है. 

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राफेल लड़ाकू विमान समझौता

Rafale fighter jets September 2016

साल 2016 के सितंबर महीने में भारत और फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए करीब 7.87 अरब यूरो के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. नवीनतम मिसाइलों और शस्त्र प्रणालियों से लैस एवं भारत के अनुकूल कई रूपान्तरण वाले इन लड़ाकू विमानों से भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए इस सौदे पर हस्ताक्षर रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर और उनके फ्रांसीसी समकक्ष ने किये थे. एक राफेल लड़ाकू विमान की कीमत लगभग 1600 करोड़ रुपये होती है.

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राफेल फाइटर जेट डील

Rafale deal was worth 7.87 billion euro

बता दें कि पहले भारत को फ्रांस से 126 राफेल विमानों का समझौता हुआ था. यूपीए के शासन के समय में समझौते में तय हुआ था कि भारत राफेल के 18 विमान खरीदेगा और 108 विमान बेंगलुरु हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में एसेम्बल किये जाएंगे. लेकिन यह समझौता पूरा नहीं हो पाया.

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कांग्रेस ने लगाए घोटाले के आरोप

Rafale combat jet is a multi-role fighter

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में यह भी समझौता हुआ किया गया है कि सभी राफेल सीधे फ्रांस से लिये जाएंगे. इन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से नहीं बनवाया जाएगा

 

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सितंबर 2016 में हुई थी डील

UPA had negotiated with France in 2012

कांग्रेस ने मोदी सरकार के अलावा रिलायंस प्रमुख अनिल अंबानी को भी घेरे में लेते हुए आरोप लगाए हैं. बता दें कि साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ रिलायंस प्रमुख अनुल अंबानी अपने कुछ अधिकारियों के साथ फ्रांस गये थे. उन्होंने राफेल बनानी वाली कंपनी के अधिकारियों के साथ मीटिंग भी की थी.

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60,145 करोड़ रुपये में हुआ था सौदा

India's military aeronautics-related research programmes

इसके बाद बीबीसी की एक खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि मार्च 2015 में अंबानी ने रिलायंस डिफेंस का रजिस्ट्रेशन करवाया. इसके मात्र दो हफ्ते बाद ही यूपीए सरकार की 600 करोड़ की राफेल डील को 1500 करोड़ की डील में बदल दिया गया.

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फ्रांस सरकार से 36 नए राफेल फाइटर जेट खरीदे गए

Rafale Jets have on-board Electronic Warfare systems

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी सरकार के कारण फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में देश को 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. राहुल ने कहा था कि संप्रग ने राफेल के साथ प्रति विमान 526 करोड़ रुपये में तय किए थे, लेकिन मोदीजी ने प्रति विमान 1,670 करोड़ रुपये का भुगतान किया. इससे 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ.

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कांग्रेस ने लड़ाकू विमान सौदे पर सरकार को निशाना बनाया

Modi govt rejects claims

राफेल सौदे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा रिलायंस ग्रुप को निशाना बनाए जाने पर रिलायंस समूह के चेयरमेन अनिल अंबानी ने राहुल गांधी को एक और पत्र लिख कर कहा है कि उनके प्रति दुर्भावना रखने वाले कुछ निहित स्वार्थी तत्वों और कार्पोरेट प्रतिद्वंद्वियों ने इस सौदे पर कांग्रेस पार्टी को गलत, भ्रामक और भटकाने वाली जानकारी दे रहे हैं. अंबानी ने ताजा पत्र में कहा है कि भारत जो 36 राफेल जेट विमान फ्रांस से खरीद रहा है उन विमानों के एक रुपये मूल्य के एक भी कलपुर्जे का विनिर्माण उनके समूह द्वारा नहीं किया जाएगा. 

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2012 में राफेल को 'एल1बिडर' घोषित किया गया

Reliance Group reacted over Rafael

डिफेंस वेबसाइट जेन्स के अनुसार साल 2015 में भारत के साथ कतर ने भी फ्रांस से राफेल विमान खरीदने के लिए समझौता किया था. 24 राफेल विमानों के लिए कतर ने समझौता 7.02 बिलियन डॉलर में किया गया. स्ट्रेटजी पेज की एक रिपोर्ट के अनुसार कतर को एक राफेल लगभग 108 मिलियन डॉलर यानी करीब 693 करोड़ रुपये का मिला. वहीं भारत को इन विमानों के लिए कहीं ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. 

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साल 2010 में फ्रांस से राफेल समझौते की शुरुआत हुई

Nirmala Sitharaman hits back again

वहीं कांग्रेस लगातार मोदी सरकार से सवाल कर रही है कि साल 2016 में फ्रांस में हुए समझौते में सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमेटी की मंजूरी नहीं ली गई. इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. नवंबर साल 2017 में रक्षा मंत्री ने कहा था कि 36 राफेल विमान इमरजेंसी के लिए तत्काल रूप से लिए गये. अगर ऐसा था तो समझौते के इतने समय बाद भी एक भी राफेल विमान क्यों नहीं मिला है? 

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एक राफेल लड़ाकू विमान की कीमत लगभग 1600 करोड़ रुपये

France rebuts Rahul Gandhi

बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान की रफ्तार 1.8 मैक है जो कि लगभग 2020 किलोमीटर प्रतिघंटा के हिसाब से है. इतनी रफ्तार से राफेल भारत की राजधानी दिल्ली से पाकिस्तान के क्वेटा जाकर वापस सिर्फ 1 घंटे में आ सकता है. इसकी ऊंचाई 5.30 मीटर, लंबाई 15.30 मीटर है. राफेल विमान में परमाणु मिसाइल की डिलीवरी करने की क्षमता भी होती है. इस लड़ाकू विमान में दुनिया के सबसे अधिक शक्तिशाली एवं सुविधाजनक हथियारों को प्रयोग करने की क्षमता है. भारतीय वायुसेना के पास अभी तक कुल 51 मिराज 2000 लड़ाकू विमान उपलब्ध हैं.