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World Elder Abuse Awareness Day: आखिर क्यों नई पीढ़ी के लोग नहीं करते बुजुर्गों का सम्मान?

 'रोल ऑफ फैमिली इन केयरिंग चैलेंजेस एंड रिस्पॉन्स" पर इस रिपोर्ट में देखरेख करने में परिवार की भूमिका, चुनौतियां और प्रतिक्रिया' विषय पर यह सर्वे किया. रिपोर्ट में कहा गया है की 35 प्रतिशत देखभाल करने वालों ने बुजुर्गों की देखभाल करने में कभी खुशी महसूस नहीं की और उनको बोझ की तरह लिया है.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jun 15, 2019, 13:07 PM IST

(वरुण भासिन)/नई दिल्लीः 15 जून को बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्‍यवहार रोकने के लिए और लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दुनिया भर में विश्व बुजुर्ग दुर्व्‍यवहार रोकथाम जागरूकता दिवस मनाया जाता है. पिछले कुछ दशकों से दुनिया में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है वैसे-वैसे उनके साथ दुर्व्‍यवहार की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. हेल्प एज  इंडिया की एक रिपोर्ट की माने तो भारत में 84% परिवार अपने घर के बूढ़े व्यक्ति को नौकर के भरोसे छोड़ देते है. 'रोल ऑफ फैमिली इन केयरिंग चैलेंजेस एंड रिस्पॉन्स" पर इस रिपोर्ट में देखरेख करने में परिवार की भूमिका, चुनौतियां और प्रतिक्रिया' विषय पर यह सर्वे किया. रिपोर्ट में कहा गया है की 35 प्रतिशत देखभाल करने वालों ने बुजुर्गों की देखभाल करने में कभी खुशी महसूस नहीं की और उनको बोझ की तरह लिया है.

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हर चौथा बुजुर्ग देश में अकेला रहने को मजबूर है

Every fourth elderly country is forced to live alone

2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 23.44 फीसद यानी देश का का हर चौथा बुजुर्ग देश में अकेला रहने को मजबूर है. ऐसा भी नहीं कि यह बुराई शहरों तक सीमित है. रिपोर्ट कहती है कि 21.38 फीसद बुजुर्ग गांवों में जबकि 25.3 फीसद शहरों में अकेले रह रहे हैं. 20 शहर से बनी इस रिपोर्ट बताती है एक औसतन, एक परिवार बुजुर्गों की देखभाल के लिए एक महीने में 4125 रुपये खर्च करता है ऐसे सिर्फ 42 फीसदी लोग.

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चिक-चिक न हो इसलिए नहीं रहते साथ

Do not live with Problems

दिल्ली के चंद्रपाल रावत कहते हैं कि ''बच्चों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हैरानी तब होती है जब बुढ़ापे में ये ही बच्चे मां-बाप को उनके हाल पर अकेला छोड़ देते हैं''. 89  वर्षीय सत्यपाल सिंह रावत , पेशे से रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं, उन्होंने बताया की उनके 2 लड़के हैं. एक विदेश में रहता है और एक दिल्ली में. पर वो उनके साथ नहीं रहते , अपनी 84 वर्षीय धर्मपत्नी के साथ अलग रहते हैं. उनके बेटे अपनी मर्ज़ी से जीना चाहते है कोई  ''चिक चिक नहीं चाहते'' इसलिए नहीं रखते. पेंशन से काम चलाता हूं.  मुझे इज्जत से जीना है और वही कर रहा हूं." 

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बच्चों से होना पड़ता है अपमानित

Children have to be humiliated

देशभर के 71 प्रतिशत बुजुर्गों को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. पिछले साल हेल्पएज इंडिया की स्टडी में ये आंकड़े 60 प्रतिशत थे जो साल में बढ़कर 71 प्रतिशत हो गए.  ससुर के साथ दुर्व्यवहार करने वाली बहुओं की संख्या तो 38 प्रतिशत है जबकि अपने ही मां-बाप का शोषण करने वाले बेटों की संख्या 57 प्रतिशत.बुजुर्गों को जिस तरह के दुर्व्यवहार का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है वह है- तिरस्कार 56 प्रतिशत, गाली-गलौज 49 प्रतिशत, अनदेखी 33 प्रतिशत.

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बच्चों का माता पिता की प्रति हो जाता है आक्रामक व्यवहार

Parental copy of children gets aggressive behavior

मां- बाप को साथ रखने वाले 25 प्रतिशत बच्चो को  निराशा महसूस होती है और वह परिणामस्वरूप परिवार के पुराने सदस्यों के प्रति आक्रामक रवैया अपना लेते हैं! मैथ्यू चेरियन, हेल्पएज इंडिया, सीईओ, ने कहा की - आश्चर्यजनक है कि दुर्व्यवहार के बावजूद मां-बाप अपने बच्चों के पास  परिवार के दायरे में बने रहना चुनते हैं. उनका समाधान हमेशा अपने बच्चों, उनके प्राथमिक देखभालकर्ताओं को संवेदनशील बनाना है, न कि उनसे दूर जाना.

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आने वाले दौर के समाज की भयावह तस्‍वीर

Fearful picture of society in the coming era

एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में बुजुर्गों खासकर 60 साल या उससे अधिक की उम्र वाले लोगों की आबादी में 2050 तक करीब 20 फीसद का इजाफा हो सकता है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो पीढ़ी दर पीढ़ी होते ऐसे बदलाव कही संस्कारो का गाला न घोंट दें.

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बुजुर्गों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को 6 कैटिगरीज में बांटा जा सकता है-

Abuse of the elderly can be divided into 6 categories-

- सरंचनात्मक और सामाजिक दुर्व्यवहार  - अनदेखी और परित्यक्तता  - असम्मान और वृद्धों के प्रति अनुचित व्यवहार करना  - मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और गाली-गलौज करना  - शारीरिक रूप से मारपीट करना  - आर्थिक रूप से दुर्व्यवहार करना

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बच्चे अपने घर पर किसी बड़े की देख रेख के कारण आक्रामक रवैया अपनाते हैं.

Children adopt aggressive attitudes due to the care of a large at home.

- 84% परिवार अपने घर के बूढ़े व्यक्ति को नौकर/मेड के भरोसे छोड़ते हैं.  - सिर्फ  62% पुत्र 26 प्रतिशत बहुऐं और 23% बेटियां ही अपने मां-बाप के फाइनेंसियल बर्डन का ध्यान रखते हैं, यानी उनकी देख रेख के लिए पैसे देते हैं.  - 25.5 % बच्चे अपने घर पर किसी बड़े की देख रेख के कारण आक्रामक रवैया अपनाते हैं.  - 70 % वृद्ध  अपने बच्चों से इमोशनल सपोर्ट की इच्छा रखते है.  - 29% बूढ़े माँ बाप डिप्रेशन में अपने बच्चो के साथ न रहने/समय न देने  के कारण ही होते ही.  - 29% बच्चे (40 साल की उम्र से ज़्यादा)  अपने माँ बाप को अपने साथ रखने और उनकी देखभाल को  एक मुश्किल समझते हैं.  - भारत मे 15% बच्चे(40 की उम्र से ऊपर)  अपने बूढ़े माँ बाप को साथ ही नही रखना चाहते.