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देश में है एक ऐसी अंडरग्राउंड खदान, जिसमें आप एसयूवी में बैठ कर देख सकते हैं खुदाई

जी न्यूज की इस खास पेशकश में आप अपने शहरों की कुछ चुनिंदा और खास खबरें हिन्दी में बस एक क्लिक में पढ़ सकते हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Sep 02, 2018, 14:29 PM IST

नई दिल्ली: अपने NRI पाठकों के लिए ZEE News Hindi ने एक नई शुरुआत की है. जी न्यूज की इस खास पेशकश में आप अपने शहरों की कुछ चुनिंदा और खास खबरें हिन्दी में बस एक क्लिक में पढ़ सकते हैं.

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ये है देश की पहली अंडरग्राउंड माइंस, जहां दौड़ती है एसयूवी

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भीलवाड़ा: दैनिक भास्कर के सूरत संस्करण के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर छपी एक खबर में बताया गया है कि खदान के नाम पर हमारे जेहन में एक ही तस्वीर आती है वह भी हाथों से खुदाई करते मजदूर और ट्रॉली में मिनरल भरकर ले जाते हुए श्रमिक. लेकिन दुनिया की तीसरी बड़ी जिंक खान की कहानी थोड़ी अलग है. खबर में आगूचा क्षेत्र की हिंदुस्तान जिंक लि. की माइंस की बात की गई है. इसमें 900 मीटर की गहराई पर खुदाई करके जिंक, लेड और सिल्वर निकाली जा रही है. खबर में दावा किया गया है कि यह देश की एक मात्र ऐसी अंडरग्राउंड माइंस है, जिसमें एसयूवी गाड़ी में बैठकर एसी का आनंद लेते हुए गहराई में हो रही खुदाई को देख सकते हैं. उत्पादन और तकनीक सभी में यह देश की अव्वल दर्जे की खान है. यहां 100 फीसदी कंप्यूटराइज्ड मशीन से खुदाई होती है.

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घर में बनाएं कचरा निस्तारण प्लांट

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लखनऊ: नवभारत टाइम्स के लखनऊ संस्करण के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि सिर्फ 450 रुपये खर्च कर एक ड्रम, बोतल और प्लास्टिक की बोरी से घर में ही कूड़े का निस्तारण किया जा सकता है. खबर के मुताबिक यह मुमकिन होगा कचरा निस्तारण की ड्रम तकनीक के जरिए. खबर में जानकारी दी गई है कि पिछले तीन महीनों से आईएएस अधिकारियों के लिए बने सीएसआई टावर में इस तकनीक का सफल प्रयोग हो रहा है. इसके इस्तेमाल से यहां सफाई के साथ मैदान की हरियाली भी बढ़ गई है. आईआईटी कानपुर के तीन हॉस्टलों में भी कचरा इसी तकनीक से निस्तारित किया जा रहा है. खबर में दावा किया गया है कि घरेलू कचरे के किफायती निस्तारण की ड्रम तकनीक मुस्कान ज्योति संस्था के सचिव मेवालाल ने विकसित की है.

 

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नींद उड़ाता है सोशल मीडिया

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लंदन: हिन्दुस्तान अखबार के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि सोशल मीडिया की लत सेहत के लिए उतनी ही खतरनाक है, जितना धूम्रपान और शराब पीना. खबर के मुताबिक ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी ऑफ पब्लिक हेल्थ (आरएसपीएच) ने यह चेतावनी जारी की है. खबर में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि कई शोधों में यह पुष्टि हो चुकी है कि सोशल मीडिया के ज्यादा प्रयोग से तनाव और अवसाद बढ़ता है. खुद की छवि को लेकर शंका भी पैदा होती है. खबर में जानकारी दी गई है कि इससे बचाव के लिए आरएसपीएच रविवार से शुरू हो रहे अपनी तरह के पहले अभियान 'स्क्रॉल फ्री सितंबर' में भाग लेने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है.

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शांति के लिए सेना सिखा रही है सब्जी उगाना

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नई दिल्ली: दैनिक भास्कर के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि भारतीय सेना विश्व शांति में भी अहम योगदान निभा रही है. खबर के मुताबिक भारतीय सेना की एक टुकड़ी दक्षिणी सूडान में आदिवासियों को सब्जी उगाने की ट्रेनिंग दे रही है. दरअसल, दक्षिण सूडान में गरीबी और भुखमरी के चलते पनपे दशकों पुराने संघर्ष को खत्म करने का यह अनूठा तरीका है. खबर में जानकारी दी गई है कि सेना ने हाल ही में करीब दर्जनभर सब्जियों को उगाने का प्रशिक्षण दिया. यही नहीं आदिवासियों को खेती के लिए हल भी दिए गए हैं. खबर में बताया गया है कि यहां भारतीय सेना संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना का हिस्सा है. जहां एक दर्जन से ज्यादा आदिवासी समुदायों में दशकों से खूनी संघर्ष है.

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नवजात के लिए जहर बन रहा नशेड़ी मां का दूध

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फिरोजपुर: दैनिक जागरण के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि जन्म के बाद मां का दूध बच्चे के लिए अमृत होता है, लेकिन नशे ने पंजाब में ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि मां का दूध बच्चे के लिए जहर बनने लगा है. खबर में जानकारी दी गई है कि फिरोजपुर जिले में 22 दिन पहले जन्मे बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टरों ने नशे की आदी मां पर बच्चे को दूध पिलाने पर पाबंदी लगा दी है. खबर के मुताबिक पिछले सात सालों में इस मां के खून में हेरोइन ऐसे घुल चुकी है कि उसका दूध तक शिशु के लिए घातक बन गया है. खबर में आगे बताया गया है कि पेशे से कलाकार (आर्केस्ट्रा डांसर) 32 वर्षीय महिला फिरोजपुर के नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवा रही है.