ZEE जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में दिखी मिट्टी की छाप, लगा है साहित्य प्रेमियों का जमावड़ा

जयपुर में ZEE जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) का 12वां संस्करण शुरू होने के साथ दिग्गी पैलेस परिसर गुरुवार को तेज ढोल की आवाज और राजस्थानी संगीत से गूंज उठा. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jan 24, 2019, 14:30 PM IST

भारत और विदेशों के कुछ मशहूर लेखक-लेखिकाएं पांच दिवसीय साहित्य महोत्सव में हिस्सा लने के लिए गुलाबी नगरी में जुटे हुए हैं, इसे सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव माना जाता है. साहित्य उत्सव की शुरुआत के साथ ही यहां पर बच्चों, अध्यापकों और साहित्य प्रेमियों का जमावड़ा लग गया है. साहित्य प्रेमियों के लिए यह जगह जितनी खास है, उतनी ही राजनैतिक, इतिहास और पौराणिक कथाओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी खास मानी जाती है.

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कई सत्र में होगा महोत्सव

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साहित्य महोत्सव में सामाजिक-राजनीतिक परदिृश्य से लेकर इतिहास, पौराणिक कथाओं और विज्ञान जैसे विषयों पर सैकड़ों सत्र होंगे. जयपुर साहित्य महोत्सव टीमवर्क आर्ट्स के संजय रॉय की पेशकश है और लेखिका नमिता गोखले और विलियम डेलरिम्पल इसके सह-निर्देशक हैं. 

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अहसमति के लिए एक जगह- संजय रॉय

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रॉय ने कहा, "हर साल, हम जश्न मनाने, बातचीत करने, बहस करने, चर्चा करने जुटते हैं और सबसे महत्वपूर्ण रूप से असहमति के लिए एक जगह बनाते हैं. आज की दुनिया में उन लोगों के लिए बहुत कम जगह है जो किसी विषय पर असहमति जताना चाहते हैं." 

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ये खास मेहमान नहीं बन पाएंगे महोत्सव का हिस्सा

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कुछ सप्ताह पहले पिता के निधन के चलते डेलरिम्पल इस बार महोत्सव में शामिल नहीं हो रहे हैं, वहीं रॉय और नमिता हाथ जोड़े नमस्ते करते हुए सभी आगंतुकों का स्वागत करते नजर आए.

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भविष्य के हालातों पर होगी चर्चा

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आयोजकों ने बताया, ‘हमारी दुनिया तेजी से बदल रही है...इस साल हमने कृत्रिम मेधा, आनुवांशिकी और भविष्य में हमारा ग्रह कैसा होगा, इस पर सत्र रखा है. इस साल ‘क्लाइमेट फिक्शन (जलवायु गल्प)’ जैसा नया शब्द है. यदि मधुमक्खियां गायब हो जाएं तो क्या होगा, इस पर आधारित क्ली-फाई (क्लाइमेट फिक्शन) पर हमने बेहद सुंदर सत्र रखा है.

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साहित्य ही नहीं विज्ञान पर भी होगी चर्चा

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साहित्य उत्सव की सह निदेशक नमिता गोखले ने कहा, ‘‘मुझे ऐसा लगता है कि इस समय हमारे देश में अनुभवजन्य सोच को प्रोत्साहन देना बेहद जरूरी हो गया है.’’ इस साहित्य उत्सव में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वेंकी रामकृष्णन ‘विज्ञान के महत्व’ पर बोलेंगे, खगोल विज्ञानी प्रियंवदा नटराजन और कृत्रिम बुद्धिमता के प्रोफेसर टोबी वाल्श श्रोताओं को ‘अंतरिक्ष का मानचित्र’ और ‘वर्तमान में भविष्य कैसा है’ जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे.