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India's First Item Dancer: फिल्मों में गानों का चलन काफी पुराना है. वहीं, मूवीज में दिखाए जाने आइटम डांस को भी काफी पसंद किया जाता है. फिल्मों में आइटम डांस भी काफी समय से हो रहा है. पहले और अब के सिनेमा में इतना अंतर है कि पहले कुछ मूवीज में आइटम डांस देखने को मिलता था लेकिन अब अधिकतर फिल्मों में यो होता है. इंडियन सिनेमा में आइटम डांस की चर्चा होती है तो हेलन और कुक्कू मोरे का नाम लिया जाता है. इन डांसर्स अपने जमाने में काफी नाम कमाया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे पहले किसने आइटम डांस किया था यानी पहली आइटम डांसर कौन थी. हम आपको बताएंगे कि भारत की पहली आइटम कौन थी.
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भारत की पहली आइटम डांसर एना मैरी यानी मैडम अजूरी थीं. बॉलीवुड में 'आइटम गर्ल' शब्द आने से पहले ही मैडम अज़ूरी ने इसका मतलब दिखा दिया था. वो सिर्फ डांसर नहीं थीं, बल्कि अपने समय की एक बड़ी शख्सियत थीं, जिन्होंने 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.
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उस दौर में जब एक्ट्रेस ज़्यादातर तय भूमिका ही निभाती थीं, मैडम अज़ूरी ने डांस को ही अपनी पहचान बना लिया. मैडम अजूरी का जन्म साल 1907 में हुआ था. उनकी मां हिंदू ब्राह्मण थीं और पिता यहूदी जर्मन थे. माता-पिता के अलग होने के बाद वह अपने पिता के साथ रहीं. पिता उन्हें बैले सीखने के लिए तो इंस्पायर करते थे, लेकिन इंडियन डांस पसंद नहीं करते थे. इसके बावजूद अज़ूरी ने दोनों तरह के डांस को अपनाया और अपनी खुद की कला का रास्ता बनाया.
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बहुत से लोग मानते हैं कि आइटम नंबरों की शुरुआत कूकू की फिल्मों ‘आवारा’ (1951), ‘आन’ (1952) और ‘शबिस्तान’ (1951) से हुई. लेकिन इन क्लासिक फिल्मों से काफी पहले भी भारतीय सिनेमा में आइटम जैसी परफॉर्मेंस दिखाई देती थीं. मैडम अज़ूरी उन शुरुआती कलाकारों में थीं, जिन्होंने ऐसे बोल्ड और अलग तरह के डांस सीक्वेंस को फिल्मों में जगह दी. उनकी मौजूदगी ने साबित किया कि आइटम सॉन्ग कोई नया चलन नहीं, बल्कि 1930 के दशक से चली आ रही एक परंपरा है.
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अज़ूरी ने कई तरह के डांस में ट्रेनिंग ली थी, जिसकी वजह से वो फिल्म इंडस्ट्री में अलग नजर आती थीं. उन्होंने साल 1934 में अपने करियर की शुरुआत की थी. उनकी पहली फिल्म ‘नदीरा’ ने उनके लिए नए रास्ते खोल दिए, जिसके बाद उन्होंने ‘परदेसी सैयां’, ‘क़त्ल-ए-आम’, ‘द बॉम्बे टॉकीज़’ और ‘नया संसार’ जैसी फिल्मों में काम किया. दर्शकों को उनका लचीला और खूबसूरत डांस स्टाइल बहुत पसंद आता था, और फिल्ममेकर्स जानते थे कि वह किसी भी सीन को खास बना सकती हैं.
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आज़ादी के बाद अज़ूरी ने एक मुस्लिम इंसान से शादी की और रावलपिंडी, पाकिस्तान चली गईं. वहां भी उन्होंने अपना कला-सफर जारी रखा और कुछ पाकिस्तानी फिल्मों में काम किया. डांस के लिए अपने प्यार को ज़िंदा रखते हुए उन्होंने एक क्लासिकल डांस अकैडमी खोली, जहां उन्होंने कई छात्रों को ट्रेनिंग दी.
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