8th Pay Commission Latest News: केंद्र सरकार की तरफ से आठवें वेतन आयोग का गठन कर दिया गया है. आयोग की तरफ से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्ते तय किये जाएंगे. करीब एक करोड़ लोग इससे सीधे तौर पर प्रभावित होंगे. आयोग का काम शुरू हो गया है और इसे अगले 18 महीने में रिपोर्ट सौंपनी है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी जानकारी को आसान भाषा में-
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सरकार की तरफ से आयोग को काम की पूरी लिस्ट सौंप दी है. आयोग की तरफ से सैलरी, पेंशन और नियमों की जांच की जाएगी. इनको महंगाई और इकोनॉमी के हिसाब से देखा जाएगा. अगर संभव हुआ तो सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में सुधार किया जाएगा. इसका मकसद सरकारी कर्मचारियों का भला करने के साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि सरकारी खजाना नहीं डगमगाए.
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हर वेतन आयोग का गठन 10 साल में होता है. सातवां आयोग 1 जनवरी 2016 से शुरू हुआ है. इसलिए आठवें वेतन आयोग के 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है. लेकिन इसके लिए पहले आयोग की तरफ से रिपोर्ट सौंपी जाएगी, उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी. रिपोर्ट के साल 2025 के अंत तक आने की उम्मीद है.
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आठवें वेतन आयोग के तहत सैलरी कितनी बढ़ेगी? यह एक बड़ा सवाल है और इस पर किसी तरह का पक्का जवाब नहीं है. यह सब निर्भर करेगा फिटमेंट फैक्टर पर. सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था.
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आठवें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर को 2.8 से 3.0 तक रखा जा सकता है. इसमें बदलाव होने का असर बेसिक सैलरी पर पड़ने के साथ ही इसका फायदा डीए, एचआरए आदि पर भी मिलेगा. यह सब इस पर डिपेंड करेगा कि सरकार के पास खजाने में कितना पैसा है?
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आठवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय सिविल कर्मचारी, सेना के जवान और अफसर, केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और केंद्रीय पेंशनर्स को फायदा मिलेगा. करीब 69 लाख पेंशनर्स को डर है कि कहीं उनका आयोग की सिफारिश से बाहर न कर दिया जाए. आयोग की तरफ से पेंशन का जिक्र किया गया है लेकिन इस पर पूरा फैसला बाद में लिया जाएगा.
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सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने से सरकारी खजाने पर काफी बोझ बढ़ जाएगा. केंद्र की तरफ से सैलरी में सुधार किये जाने के बाद राज्य भी बढ़ाएंगे. सरकार की तरफ से कहा गया कि वित्तीय स्थिरता जरूरी है. राजस्व की कमी के दौरान सावधानी जरूरी है. कर्मचारियों की खुशी के साथ ही देश का खजाना भी मजबूत रहने की जरूरत है.
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