मिट्टी के ज्वालामुखी अपने अनोखे गुणों के कारण दुनियाभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं. इन ज्वालामुखियों का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से लेकर 100 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है. खास बात यह है कि लोग इनका उपयोग मड बाथ यानी मिट्टी के स्नान के लिए करते हैं, जिसे स्वास्थ्य के लिहाज़ से लाभकारी माना जाता है.
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यह प्रक्रिया कई देशों में काफी प्रसिद्ध है और पर्यटन का भी एक बड़ा आकर्षण है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इन मिट्टी के ज्वालामुखियों से निकलने वाली गैसों में लगभग 86 फीसदी मीथेन होती है, जबकि थोड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन गैस भी पाई जाती है.
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अजरबैजान में होने वाले ऐसे ज्वालामुखी विस्फोट न सिर्फ प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक बार फिर मिट्टी के ज्वालामुखियों की अनोखी प्रकृति और उनके उपयोग को लेकर चर्चा में आ गया है.
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मड वॉल्कैनो से निकलने वाले पदार्थों का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में भी किया जाता है, खासकर औद्योगिक और निर्माण कार्यों में. वैज्ञानिकों के लिए ये ज्वालामुखी भूगर्भीय गतिविधियों और गैस उत्सर्जन को समझने का अहम स्रोत भी हैं.
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मिट्टी के ज्वालामुखी से निकलने वाला कीचड़ खनिजों से भरपूर होता है, जिसकी वजह से लोग इसमें घंटों तक नहाना पसंद करते हैं. माना जाता है कि यह कीचड़ त्वचा रोगों और जोड़ों के दर्द में राहत देने में मददगार होता है. इसी कारण ये स्थान पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं.
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अजरबैजान को दुनिया में मिट्टी के ज्वालामुखियों का केंद्र माना जाता है. यहां दुनिया के लगभग एक-तिहाई मड वॉल्कैनो पाए जाते हैं. ये ज्वालामुखी पारंपरिक लावा उगलने वाले ज्वालामुखियों से बिल्कुल अलग होते हैं. इनमें से गर्म लावा की जगह ठंडा कीचड़, गैस और खनिज पदार्थ बाहर निकलते हैं.
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