DNA Of Soldiers Under Sea: वैज्ञानिकों ने सालों से समुद्र के नीचे दबे ग्रुम्मन TBF एवेंजर विमान को रिसर्च सेंटर बनाया है और मलबे में दबे दशकों पुराने मानव DNA के अंश का पता लगा रहे हैं.
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ग्रुम्मन TBF एवेंजर विमान के सालों तक समुद्र में पड़े रहने के बाद अब वैज्ञानिकों ने इसको एक रिसर्च सेंटर बना दिया है. साइंटिस्ट अमेरिकी रक्षा POW/MIA अकाउंटिंग एजेंसी (DPAA) के साथ मिलकर साइंटिस्ट एक eDNA का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका मकसद समुद्री मलबे में दबे दशकों पुराने मानव DNA के अंश का पता लगाना है.
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eDNA टेक्नीक के जरिए वैज्ञानिक पानी से जीवित या मृत जीवों द्वारा छोड़े गए DNA के अंश इकट्ठा करते हैं. यह तकनीक पहले संरक्षण प्रयासों में सफल रही है, लेकिन अब इसे मानव अवशेषों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
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WHOI की समुद्री जीवविज्ञानी कर्स्टिन मेयर काइजर ने कहा कि यह तकनीक पारंपरिक महीनों लंबी खुदाई की प्रक्रिया की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हो सकती है. इस प्रोजेक्ट में साइपन, इटली और लेक ह्यूरन के पानी में डूबे कुल 12 विमान और जहाजों से सैंपल लिए गए.
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समुद्र से लिए गए इन नमूनों को जांच के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन भेजा गया, जहां मेटाजीनोमिक्स टेक्नीक से सभी DNA सीक्वेंस की जांच की गई. वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ सैंपल में 40 बेस पेयर लंबे DNA अंश मौजूद थे, जो पुराने DNA के इंडिकेटर्स माने जाते हैं. वहीं कुछ सैंपल में 150 बेस पेयर से ज्यादा लंबे DNA अंश भी मिले, जो हालिया मानव उपस्थिति को दर्शाते हैं.
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वैज्ञानिकों को साइपन और इटली के 2 विमान दुर्घटना स्थलों से लिए गए नमूनों में पुराने DNA की अधिकता पाई गई. इससे यह साफ संकेत मिला कि इन जगहों पर मानव अवशेष मौजूद हो सकते हैं. बता दें कि समुद्र में 40 हजार से ज्यादा जवान गायब हुए थे.
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यह तकनीक भले ही अभी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह हजारों लापता सैनिकों की खोज में क्रांतिकारी साबित हो सकती है. DPAA के चीफल आर्कियोलॉजिस्ट जेसी स्टीफन ने कहा,' हमने यह साबित कर दिया है कि हम पुराने और नए DNA में फर्क कर सकते हैं. यह हमारी खोज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.'
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