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अधर में पड़ सकती है नारायण राणे के पार्टी विलय की मंशा, विरोध में उतरा BJP का एक खेमा

राणे ने विधानसभा चुनाव से स्वाभिमानी पार्टी के बीजेपी में विलय की खबरों से राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई थी. 

अधर में पड़ सकती है नारायण राणे के पार्टी विलय की मंशा, विरोध में उतरा BJP का एक खेमा
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे की फाइल फोटो.

मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे की पार्टी में विलय होने की चर्चाएं खटाई में पड़ सकती है. जानकारी के मुताबिक, बीजेपी शीर्ष नेतृत्व का एक धड़ा राणे की बीजेपी में एंट्री का विरोधी बन गया है और राणे को बीजेपी में शामिल न करने को लेकर पार्टी पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का दबाव बढ़ा दिया है. अब बदले सियासी समीकरम में नारायण राणे की स्वाभिमानी पार्टी का बीजेपी में विलय का प्लान खटाई में पड़ गया है. 

अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने की जुगत में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे अपनी पार्टी को बीजेपी में विलय के लिए हाथ पांव मार रहे हैं. राणे ने विधानसभा चुनाव से स्वाभिमानी पार्टी के बीजेपी में विलय की खबरों से राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई थी. 

बताया जा रहा है कि एक सितंबर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के दौर पर आ रहे हैं. नारायण राणे इसी मौके पर अपनी पार्टी को बीजेपी में विलय कर समर्थकों समेत बीजेपी मेँ शामिल होने की कोशिशों में हैं. नारायण राणे 1999 में शिवसेना और बीजेपी गठबंधन सरकार में चंद महीने तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. शिवसेना से नाता तोड़ने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए थे और बाद में उन्होंने कांग्रेस से भी नाता तोड़कर अपनी एक नई पार्टी का गठन किया था. 

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वहीं, राणे और बीजेपी के इस नए सियासी रिश्ते से शिवसेना असहज महसूस कर रही है. दरअसल, नारायण राणे शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के राजनीतिक तौर पर धुर विरोधी है और यही वजह है कि इस नए सियासी बदले समीकरण से दोनों पार्टियों के मधुर रिश्तों मे खटास घुल सकती है. महाराष्ट्र में अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन एक है लेकिन राणे की बीजेपी में एंट्री को लेकर दोनों पार्टियों में खींचतान है. ऐसे में अगर राणे अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय होता है तो विधानसभा चुनाव से पहले इस गठबंधन में बड़ी दरार आ सकती है.