गिरिराज सिंह ने किया कांग्रेस के बयान का समर्थन, कहा- पहली बार ऐसा कर रहा हूं

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पहली बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का समर्थन करते हुए दिखाई दिए.

गिरिराज सिंह ने किया कांग्रेस के बयान का समर्थन, कहा- पहली बार ऐसा कर रहा हूं

नई दिल्ली: अपनी बयानीबाजी के लिए चर्चित और विपक्षी दल कांग्रेस पर लगातार हमलावर रहने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पहली बार उसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का समर्थन करते हुए दिखाई दिए. उन्होंने पश्चिम बंगाल के चिटफंड घोटाले को लेकर दिए गए कांग्रेस के बयान पर अपना समर्थन जताया.

कांग्रेस ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से राहुल गांधी के बयान के अंश को ट्वीट किया था, जिसमें लिखा, ''पश्चिम बंगाल के चिट फंड घोटाले में 20 लाख लोग अपना पैसा गंवा चुके हैं.'' इसको केंद्रीय सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम राज्यमंत्री सिंह ने रिट्वीट किया. साथ मंत्री ने लिखा, ''पहली बार कांग्रेस के ट्वीट को रिट्वीट कर रहा हूं.'' दरअसल, कांग्रेस ने यह ट्वीट 8 मई 2014 में किया था, जो कि इन दिनों पश्चिम बंगाल में चल रहे राजनीतिक ड्रामे के बीच एक बार फिर वायरल हो रहा है.

बता दें कि नरेंद्र मोदी-नीत केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार में एक अभूतपूर्व टकराव के तहत, सीबीआई और राज्य पुलिस के आमने-सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गईं कि मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनके राज्य को अस्थिर कर तख्तापलट का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने साथ ही कहा कि यह 'संवैधानिक ढांचा नष्ट' करने का प्रयास है.

यह टकराव तब शुरू हुआ, जब सीबीआई कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास के पास पहुंची. कुमार चिट फंड घोटाला मामले में पहले से ही एजेंसी की नजर में हैं.

यह घोटाला कुल 20 हजार करोड़ रुपये का है. इस पूरे मामले में दो बड़े घोटालों का आरोप है. पहला मामला शारदा चिटफंड का है जिसमें करीब 2500 करोड़ रुपये के हेराफेरी का आरोप है. दूसरा मामला रोज वैली से जुड़ा है. यह करीब 17000 करोड़ रुपये का घोटाला है. मामले की जांच रहे अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोपियों को सपोर्ट किया था. दोनों मामलों की जांच फिलहाल CBI कर रही है.

क्या है पूरा मामला?
2008 में शारदा कंपनी की शुरुआत हुई थी. फर्जी वादे कर कंपनी ने लाखों निवेशकों से निवेश करवाया और बाद में पैसे देने से मना कर दिया. 2013 में इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ था. जांच के लिए SIT का गठन किया गया, जिसके चीफ राजीव कुमार बनाए गए थे. 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच CBI को सौंप दी गई. सीबीआई का कहना है कि राजीव कुमार ने कई अहम सबूत पुलिस को नहीं सौंपे. सीबीआई की टीम इसी सिलसिले में पूछताछ के लिए उनके घर पहुंची थी. सीबीआई का कहना है कि पहले उन्हें कई बार समन जारी किया गया. जब उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, तब हमने उनके घर पहुंच कर पूछताछ करने का फैसला किया.