गुजरात: बीजेपी ने कांग्रेस से छीन ली 5 जिला पंचायतें, कांग्रेस पार्षदों ने की क्रॉस वोटिंग

आज के चुनाव से पहले कांग्रेस के पास 23 थी, लेकिन अब 18 जिला पंचायतें बची हैं.

गुजरात: बीजेपी ने कांग्रेस से छीन ली 5 जिला पंचायतें, कांग्रेस पार्षदों ने की क्रॉस वोटिंग
बीजेपी ने अहमदाबाद, पाटन, भावनगर, महिसागर और दाहोद जिला पंचायतों को कांग्रेस से छीन लिया.

अहमदाबाद: गुजरात में कांग्रेस पार्षदों की क्रॉस वोटिंग की वजह से बीजेपी जिला पंचायत की पांच सीटों को विपक्षी पार्टी से छीनने में कामयाब रही. यह चुनाव अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए हुआ था. समूचे गुजरात में 200 से ज्यादा तालुका पंचायतों और 31 जिला पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए बुधवार को चुनाव हुआ था. 

आज के चुनाव से पहले कांग्रेस के पास 31 जिला पंचायतों में से 23 थी, लेकिन बीजेपी ने अहमदाबाद, पाटन, भावनगर, महिसागर और दाहोद जिला पंचायतों को विपक्षी पार्टी से छीन लिया. कांग्रेस के पास अब 18 जिला पंचायतें हैं. कांग्रेस ने 2015 में इन स्थानीय निकायों को जीता था. पार्टी का आरोप है कि सत्तारुढ़ बीजेपी धन-बल का इस्तेमाल कर उसके निर्वाचित सदस्यों को ‘खरीद’ रही है. बहरहाल, बीजेपी ने दावा किया कि कांग्रेस ने अंदुरुनी लड़ाई की वजह से शिकस्त खाई है. 

गुजरात कांग्रेस प्रमुख अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने क्रॉस वोटिंग के लिए कांग्रेस के पार्षदों को 25 लाख रुपये से लेकर दो करोड़ रुपये दिए हैं. चावड़ा ने आरोप लगाया, "आज के नतीजे स्पष्ट बताते हैं कि बीजेपी ने पांच जिला पंचायतों में कांग्रेस से सत्ता छीनने के लिए धन-बल का इस्तेमाल किया है. बीजेपी ने चुनाव में निष्ठा बदलने के लिए इन सदस्यों को 25 लाख रुपये से लेकर दो करोड़ रुपये तक दिए हैं. बीजेपी ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया है."

चावड़ा ने संवाददाताओं से कहा, "हालांकि बीजेपी ने हमारी आधा सीटें छीनने की कोशिश की लेकिन केवल पांच ही छीन सके. यह दिखाता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता अभी भी एकजुट हैं."  

 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ पार्षदों को बीजेपी ने ‘ब्लैकमेल’ किया है ताकि वे पाला बदल सकें. पलटवार करते हुए गुजरात बीजेपी प्रमुख जितू वघानी ने कहा कि कांग्रेस के सदस्यों ने बीजेपी उम्मीदवारों के पक्ष में इसलिए मतदान किया है क्योंकि वह कांग्रेस नेतृत्व से ऊब चुके हैं. 
  
चुनावों से पहले पार्षदों को राज्य से भेजा था बाहर 
इससे पहले, गुजरात कांग्रेस ने सत्तारुढ़ बीजेपी द्वारा रिझाने का प्रयास करने की आशंका के चलते अपने पार्षदों को राज्य के बाहर भेजा था. लेकिन इसका फायदा पार्टी को नहीं मिला. गुजरात में स्थानीय निकाय के चुनाव भले ही पांच वर्षों में होते हैं लेकिन नये प्रमुखों का चुनाव कार्यकाल के माध्यम से बीच में होता है. 

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