क्‍या राहुल का दादी इंदिरा गांधी की तरह 'बेलछी मोमेंट' आ गया है?

1977 में बिहार के नालंदा जिले के बेलछी गांव में 11 दलितों को गोली मारकर उनको जिंदा जला दिया गया. इंदिरा गांधी बिना देरी किए बिहार पहुंचीं.

क्‍या राहुल का दादी इंदिरा गांधी की तरह 'बेलछी मोमेंट' आ गया है?
अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी सदन में आकर्षण का केंद्र बने.(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: राहुल गांधी ने शुक्रवार को लोकसभा में अविश्‍वास प्रस्‍ताव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला. सिर्फ इतना ही नहीं अपना भाषण खत्‍म करने के बाद वह अप्रत्‍याशित रूप से पीएम मोदी के गले लगे (बीजेपी के मुताबिक गले पड़े). कई राजनीतिक विश्‍लेषक इसको राहुल गांधी का 'बेलछी मोमेंट' करार दे रहे हैं. ऐसा इसलिए क्‍योंकि उस दिन भले ही अविश्‍वास प्रस्‍ताव बीजेपी ने जीता हो लेकिन परंपरागत से लेकर सोशल मीडिया तक करवेज पूरी तरह से राहुल गांधी को समर्पित रही. ये भी संभवतया पहली बार हुआ कि पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आकर्षण का केंद्र राहुल गांधी बन गए.

कांग्रेस का बड़ा ऐलान
कांग्रेस ने इसको भुनाने में तनिक देर नहीं लगाई. अविश्‍वास प्रस्‍ताव के तत्‍काल बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक (सीडब्‍ल्‍यूसी) में एक बड़ा फैसला लेते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि आगामी 2019 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव से पहले और चुनाव के बाद गठबंधन पर निर्णय लेंगे.

पार्टी ने यह भी कहा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के अभियान में राहुल गांधी ही पार्टी का चेहरा होंगे और वह ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी होंगे. गठबंधन पर अंतिम फैसला लेने के लिए राहुल गांधी को अधिकृत किए जाने का निर्णय इस धारणा के बीच लिया गया है कि सोनिया गांधी की मौजूदा और संभावित सहयोगियों के बीच व्यापक स्वीकार्यता है.

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लोकसभा में अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर चर्चा के दौरान अपना भाषण खत्‍म करने के बाद राहुल गांधी अचानक पीएम नरेंद्र मोदी के गले मिले.(फाइल फोटो)

इसी पृष्‍ठभूमि में राजनीतिक विश्‍लेषकों का कहना है कि जिस तरह 1977 में सत्‍ता से बेदखल होने के बाद इंदिरा गांधी ने बिहार के नालंदा जिले में स्थित 'बेलछी' जाकर राजनीतिक पुनर्वास किया, उसी तरह सदन में अविश्‍वास प्रस्‍ताव के बाद अचानक राहुल गांधी का जिस तरह से सियासी कद अचानक बढ़ा है और कांग्रेस जिस तेजी से उनको विपक्षी महागठबंधन के निर्विवाद नेता के रूप में पेश कर रही है, उसको राहुल गांधी के 'बेलछी मोमेंट' के रूप में देखा जा रहा क्‍योंकि कांग्रेस अब राहुल गांधी को सीधे-सीधे पीएम मोदी को टक्‍कर देने वाले विपक्ष के सर्वाधिक बड़े चेहरे के रूप में पेश कर रही है.

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1977 में चुनावी हार के बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति के रूप में इंदिरा गांधी बाढ़ के पानी को हाथी पर बैठकर पार करते हुए बेलछी पहुंचीं.(फाइल फोटो)

बेलछी मोमेंट
आपातकाल के बाद 1977 के आम चुनावों में कांग्रेस हारकर सत्‍ता से बाहर हो गई थी. इंदिरा गांधी राजनीतिक बियाबान में चली गई थीं. कांग्रेस काफी अलोकप्रिय हो गई थी. इस बीच उसी साल बिहार के नालंदा जिले के बेलछी गांव में 11 दलितों को गोली मारकर उनको जिंदा जला दिया गया. इंदिरा गांधी बिना देरी किए बिहार पहुंचीं. बाढ़ के पानी को हाथी पर बैठकर पार करते हुए वह बेलछी पहुंची और पीडि़तों को सांत्‍वना दी. वहीं पास के एक स्‍कूल में छोटा सा भाषण दिया. चुनावी हार के बाद इंदिरा गांधी की किसी सार्वजनिक मंच पर यह पहली उपस्थिति थी. उस एक तस्‍वीर ने इंदिरा गांधी की खोई हुई राजनी‍तिक हैसियत को फिर से बहाल करने का काम किया. उनकी लोकप्रियता का ग्राफ अचानक चढ़ने लगा और अगले तीन साल के भीतर 1980 में उन्‍होंने एक बार फिर सत्‍ता में वापसी की.