close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

आरटीआई संशोधन बिल राज्‍यसभा में पास, कांग्रेस ने किया विरोध

सरकार के लिए इस बि‍ल को राज्‍यसभा में पास कराना उसके लिए बड़ी चुनौती थी. लेकिन टीआरएस जैसे दलों का समर्थन मिलने से सरकार ने आरटीआई बिल को पास करा लिया. कांग्रेस समेत यूपीए के कुछ दल इसके विरोध में थे. इस मौके पर कांग्रेस, आरजेडी और टीएमसी ने सदन से वॉकआउट किया.

आरटीआई संशोधन बिल राज्‍यसभा में पास, कांग्रेस ने किया विरोध

नई दिल्‍ली: राज्‍यसभा में गुरुवार को आरटीआई संशोधन विधेयक पास हो गया. इस बिल को सरकार पहले ही लोकसभा में पास करा चुकी थी. लेकिन इसे राज्‍यसभा में पास कराना उसके लिए बड़ी चुनौती थी. लेकिन टीआरएस जैसे दलों का समर्थन मिलने से सरकार ने आरटीआई बिल को पास करा लिया. कांग्रेस समेत यूपीए के कुछ दल इसके विरोध में थे. इस मौके पर कांग्रेस, आरजेडी और टीएमसी ने सदन से वॉकआउट किया.

इसके लिए यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बाकायदा कांग्रेस सांसदों से बैठक भी की थी. कांग्रेस इस बिल का तीखा विरोध कर रही थी.

लोकसभा में सोमवार को हो चुका था पास
आरटीआई संशोधन विधेयक इससे पहले सोमवार को लोकसभा में पास कर दिया गया. मुख्‍ य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और सूचना आयुक्तों के कार्यकाल व वेतन निर्धारित करने की शक्ति केंद्र सरकार को देने संबंधी एक विधेयक सोमवार को विपक्ष की कड़ी आपत्ति के बीच लोकसभा में पारित कर दिया गया था. सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2019 को मत विभाजन के बाद 178 सदस्यों की सहमति के साथ पारित किया गया. कुल 79 सदस्य इसके खिलाफ रहे.

विधेयक सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 13 और 16 में संशोधन के लिए लाया गया है. धारा-13 में सीआईसी और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) निर्धारित किया गया है. विपक्ष ने तर्क दिया कि विधेयक आरटीआई की स्वतंत्रता छीन लेगा.

19 जुलाई को सदन में पेश किए गए विधेयक को पारित करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीआईसी और आईसी दोनों के लिए वर्तमान कार्यकाल पांच वर्ष है. लेकिन, विधेयक इस प्रावधान को हटाने की बात करता है और केंद्र सरकार को इस पर फैसला लेने की अनुमति देता है. उन्होंने कहा, "सीआईसी का वेतन मुख्य चुनाव आयुक्त के समान होता है. मगर विधेयक इसे बदलकर सरकार को वेतन तय करने की अनुमति देने का प्रावधान करता है."

बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे वापस लेने की मांग की थी. विधेयक से आरटीआई ढांचे को कमजोर करने और सीआईसी व सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने तर्क दिया कि इसे किसी भी सार्वजनिक बहस के बिना संसद में लाया गया है. थरूर ने इसे जानबूझकर किया गया परिवर्तन बताया.