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अविश्वास प्रस्ताव: जब पूरी बीजेपी हैरान-परेशान थी, जयंत सिन्हा खुशी से ताली बजाने लगे

राहुल के भाषण के दौरान ही कई बार दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प हुई और एक बार तो सदन की कार्रवाई भी रोकनी पड़ी. इसलिए अब जयंत सिन्हा की बॉडी लैंग्वेज को लेकर सवाल किया जा रहा है.

अविश्वास प्रस्ताव: जब पूरी बीजेपी हैरान-परेशान थी, जयंत सिन्हा खुशी से ताली बजाने लगे
फाइल फोटो

नई दिल्ली: लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपना भाषण खत्म करके अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जाने लगे तो पूरा सदन हैरान था. सत्ता पक्ष हैरान होने के साथ साथ परेशान भी था कि राहुल गांधी आखिर क्या करने वाले हैं. सत्ता पक्ष की अगली बैंचों वाले सभी नेता अपनी जगह पर ही बैठे रहे, लेकिन पीछे बैठे केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा अचानक उठे और खुशी से ताली बजाने लगे. हालांकि तुरंत ही उन्होंने खुद को थोड़ा संयमित किया.

राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर कई गंभीर और चुभने वाले आरोप लगाए. ये माना गया कि काफी समय बाद राहुल गांधी अपने भाषण से प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे. ऐसे में सत्ता पक्ष के लिए खुश होने और ताली बजाने वाली कोई बात नहीं थी. राहुल के भाषण के दौरान ही कई बार दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प हुई और एक बार तो सदन की कार्रवाई भी रोकनी पड़ी. इसलिए अब जयंत सिन्हा की बॉडी लैंग्वेज को लेकर सवाल किया जा रहा है.

राहुल गांधी जब प्रधानमंत्री के पास गए तो अचानक उन्हें अपने पास पाकर खुद प्रधानमंत्री भी सहज नहीं थे. जाहिर था कि हर तरह से इस घटनाक्रम का फायदा राहुल गांधी ही ले जाएंगे. शायद यही वजह है कि सत्ता पक्ष से जयंत सिन्हा को छोड़कर किसी ने भी राहुल गांधी का किसी भी रूप में स्वागत नहीं किया. जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री से गले मिलने के लिए उनसे खड़े होने के लिए कह रहे थे, तो सत्ता पक्ष के कुछ लोगों ने हल्का सा प्रतिवाद भी किया. लेकिन जयंत सिन्हा न सिर्फ अपनी जगह से खड़े हुए, बल्कि उन्होंने तालियों के साथ राहुल गांधी का स्वागत भी किया. 

जयंत सिन्हा पिछले दिनों उस समय विवादों में आए थे, जब उन्होंने मॉब लिंचिंग के आरोपियों के साथ भेंट की. इस पर उनके पिता यशवंत सिन्हा ने अपने बेटे की आलोचना करते हुए कहा कि वो नालायक बेटे के लायक पिता हैं. यशवंत सिन्हा अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में केंद्रीय मंत्री थे और अब मोदी सरकार के मुखर आलोचक हैं. ऐसे में कई बार जयंत सिन्हा के सामने मुश्किल स्थिति पैदा होती है.