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मां लक्ष्‍मी-श्रीकृष्‍ण के बीच रूठने-मनाने की अनोखी कहानी का प्रतीक है मथुरा का यह मंदिर

मथुरा की मांट तहसील के बेलवन में मां लक्ष्‍मी का मंदिर है. माना जाता है कि मां लक्ष्‍मी आज भी श्रीकृष्‍ण की बेलवन में आराधना कर रही हैं.

मां लक्ष्‍मी-श्रीकृष्‍ण के बीच रूठने-मनाने की अनोखी कहानी का प्रतीक है मथुरा का यह मंदिर
मथुरा की मांट तहसील के बेलवन में स्थित है मां लक्ष्‍मी का अनोखा मंदिर.

नई दिल्ली (रिया मलिक): भगवान श्रीकृष्ण और राधा के बीच के अटूट और निस्‍वार्थ प्रेम की कहानियां तो आपने सुनी होंगी. भगवान श्रीकृष्‍ण की लीलाओं के बारे में भी भक्‍तों को पता है. चाहे माखन चोरी करना हो या उनकी रासलीला या फिर यशोदा मैय्या को परेशान करना हो. राधा और गोपियों संग उनके नृत्‍य को भक्‍त महारास या रासलीला के नाम के रूप में जानते हैं. आज भी बहुत से धार्मिक कार्यक्रम में युवाओं द्वारा कान्हा और राधा का रूप धारण कर य‍ह नृत्य किया जाता है.

जिस तरह भक्तों के बीच भगवान श्रीकृष्‍ण की रासलीला लोकप्रिय है. उसी तरह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी-देवता भी मनमोह लेने वाली इस रासलीला को देखने के लिए उत्‍साहित रहते थे. इसी बात को दर्शाता है मथुरा की मांट तहसील के घने जंगल में स्थित मां लक्ष्‍मी का बेलवन मंदिर. धार्मिक मान्‍यताओं में श्रीकृष्‍ण की नगरी मथुरा में मां लक्ष्‍मी के इस मंदिर की स्‍थापना के पीछे अनोखी कहानी है. आइये हम आज आपको इसके बारे में बताते हैं...

'बेलवन' के नाम से जाना जाता है मंदिर
बेलवन मंदिर वृंदावन से यमुना पार मांट की ओर जाने पर रास्ते में आता है. यह मंदिर काफी पुराना और प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि इस जगह पर पहले बेल के पेड़ों का घना जंगल था. इसीलिए इसे बेलवन के नाम से जाना जाता है. इन जंगलों में भगवान श्रीकृष्‍ण और बलराम अपने मित्रों के साथ गायें चराने आते थे. इन्‍हीं जंगलों के बीच स्थित है मां लक्ष्‍मी का सिद्ध मंदिर.

अनोखी है भगवान श्रीकृष्ण और लक्ष्‍मी की कहानी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि एक बार ब्रज में श्रीकृष्ण राधा और 16,108 गोपियों के साथ रासलीला कर रहे थे. माना जाता है कि मां लक्ष्मी को भी भगवान श्रीकृष्‍ण की इस रासलीला के दर्शन करने की इच्छा हुई. इसके लिए वह सीधे ब्रज जा पहुंचीं. लेकिन गोपिकाओं के अलावा किसी अन्‍य को इस रासलीला को देखने के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं थी. ऐसे में उन्‍हें रोक दिया गया.

इसके बाद वह नाराज होकर वृंदावन की ओर मुख करके बैठ गईं और तपस्‍या करने लगीं. धार्मिक मान्‍यताओं के मुताबिक उसी समय श्रीकृष्ण रासलीला करके थक चुके थे और मां लक्ष्‍मी से उन्‍होंने भूख लगने की बात कही. ऐसे में मां लक्ष्‍मी ने अपनी साड़ी का हिस्‍सा फाड़कर उससे अग्नि प्रज्‍जवलित की और उन्‍हें अपने हाथ से खिचड़ी बनाकर खिलाई.

इसे देख श्रीकृष्ण प्रसन्न हो गए. इसी दौरान मां लक्ष्‍मी ने उनसे ब्रज में रहने की इच्‍छा जताई. इस पर श्रीकृष्ण ने उन्‍हें अनुमति दे दी. मान्‍यताओं के अनुसार यह वाक्या पौष माह का है. इसलिए यहां हर पौष माह में बड़े मेले का आयोजन किया जाता है. माना जाता है कि मां लक्ष्‍मी आज भी श्रीकृष्‍ण की यहां आराधना कर रही हैं.

भक्‍त मनाते हैं खिचड़ी महोत्सव
बेलवन मंदिर में पौष माह के हर गुरुवार को खिचड़ी महोत्‍सव का आयोजन होता है. इस मेले में भक्त दूर-दूर से आते हैं और अपने साथ खिचड़ी बनाने की सामग्री लेकर आते हैं. वह यहां चूल्‍हा बनाते हैं और बैठकर उसमें खिचड़ी पकाते हैं. इसके बाद वे इस खिचड़ी को प्रसाद के रूप में बांटते हैं.

कैसे पहुंचें बेलवन मंदिर
मथुरा से बेलवन मंदिर करीब 20-22 किमी दूर है. वृंदावन से यमुना पार बेलवन मंदिर की दूरी करीब तीन किलोमीटर है. वृंदावन से यहां नाव के जरिये पहुंचा जा सकता है. जबकि मथुरा से यहां आने के लिए ऑटो और बस से जाया जा सकता है. इसके अलावा भक्‍त मांट, नौहझील, बाजना, राया से आने वाले श्रद्धालु मांट के रास्ते बेलवन पहुंचते हैं.