Bhadrapada 2020: भक्ति और मुक्ति से जुड़ा है भाद्रपद मास, पूजा करने से पहले जान लें इसके ये नियम

ऐसा माना जाता है कि इसी पावन मास में भगवान श्रीकृष्ण (Shri Krishna) ने पृथ्वी पर जन्म लिया था. इसलिए श्रावण मास की तरह ही इस मास को भी अत्यंत पावन माना जाता है. तमाम हिंदी महीनों की तरह भाद्रपद माह में भी पूजन, दान, खान-पान आदि के अपने नियम हैं. जिन्हें अपने सामथ्र्य के अनुसार जरूर करना चाहिए. 

Bhadrapada 2020: भक्ति और मुक्ति से जुड़ा है भाद्रपद मास, पूजा करने से पहले जान लें इसके ये नियम
फोटो साभार-इंटरनेट

नई दिल्ली: भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित श्रावण मास पूर्ण होने के साथ ही भाद्रपद (Bhadrapada) मास शुरू हो गया है जो 04 अगस्त 2020 से 02 सितंबर 2020 तक रहेगा. ऐसा माना जाता है कि इसी पावन मास में भगवान श्रीकृष्ण (Shri Krishna) ने पृथ्वी पर जन्म लिया था. इसलिए श्रावण मास की तरह ही इस मास को भी अत्यंत पावन माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद या भादौं का महीना छठा महीना माना जाता है. इस मास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेशोत्सव समेत कई पावन पर्व आते हैं. तमाम हिंदी महीनों की तरह भाद्रपद माह में भी पूजन, दान, खान-पान आदि के अपने नियम हैं. जिन्हें अपने सामथ्र्य के अनुसार जरूर करना चाहिए. भाद्रपद माह में विधि-विधान से स्नान, दान और व्रत करने से साधक के पूर्व जन्मों के पापों का भी नाश हो जाता है.

भाद्रपद मास का महत्व— 
1. मन को शुद्ध करके अपने आराध्य की साधना के लिए यह मास काफी सिद्ध माना जाता है.
2. इस मन में सच्चे मन से व्रत, उपवास और साधना करने से पूर्व जन्मों में किए गए पापों का भी प्रायश्चित हो जाता है.

इन उपायों से पूरी होगी मनोकामना— 
1. यदि आप अब तक संतान सुख से वंचित हैं या फिर आप अपनी संतान की सुख-समृद्धि की कामना रखती हैं तो आपको इस मास में भगवान ​श्रीकृष्ण की विशेष रूप से साधना करनी चाहिए.
2. भाद्रपद मास में घर में लड्डू गोपाल बिठाकर संतान प्राप्ति की इच्छा से संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए.
3. भगवान कृष्ण की पूजा-आराधना में तुलसी दल विशेष रूप से अर्पित करना चाहिए.
4. आलस्य को दूर भगाने के लिए प्रतिदिन प्रात: काल और सायंकाल स्नान करना चाहिए.

भूलकर भी न करें ये कार्य
1. यदि आप भाद्रपद मास में पूजा-तप आदि करते हुए पुण्य की कामना रखते हैं तो आपको भूलकर भी झूठ नहीं बोलना चाहिए.
2. भाद्रपद मास में पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
3. भाद्रपद मास में पलंग में नहीं सोना चाहिए.
4. भाद्रपद मास में भूलकर भी मांस-मदिरा, गुड़, दही, शहद, हरी पत्तेदार और कच्ची सब्जी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. हालांकि भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान जरूर कराना चाहिए.
5. भाद्रपद मास में नए घर का निर्माण, शादी, सगाई जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.

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