भौम प्रदोष 2018 : मंगल दोष के लिए ऐसे करें शिव उपासना, दूर होंगे सारे सकंट

मंगलवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत को मंगल प्रदोष या भौम प्रदोष कहते हैं. 

भौम प्रदोष 2018 : मंगल दोष के लिए ऐसे करें शिव उपासना, दूर होंगे सारे सकंट
(फाइल फोटो)

नई दिल्ली : प्रदोष व्रत शिव उपासना की एक अहम पूजा है. आज 4 दिसंबर को भौत प्रदोष व्रत है और मंगलवार के दिन पड़ने पर इस पूजा का महत्व और बढ़ जाता है. शिव जी को प्रसन्न करने से आप आज मंगल दोष का निवारण कर सकते है. जीवन में चल रही कठिनाइयों और कष्ट को दूर करने के लिए भौम प्रदोष व्रत पर भोलेनाथ की पूजा करना शुभ बताया गया है. 

आज के दिन हनुमान जी की पूजा करने से कर्ज से छुटकारा मिलता है. इस दिन उपवास करने से गोदान का फल मिलता है. भौम प्रदोष के दिन हनुमान जी की उपासना करने से हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है. मंगलवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत को मंगल प्रदोष या भौम प्रदोष कहते हैं. 

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भौम प्रदोष व्रत कथा 
पौराणिक व्रत कथा के अनुसार नगर में एक वृद्धा रहती थी. उसका एक ही पुत्र था. वृद्धा की हनुमानजी पर गहरी आस्था थी. वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमानजी की आराधना करती थी. एक बार हनुमानजी ने उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने की सोची. हनुमानजी साधु का वेश धारण कर वृद्धा के घर गए और पुकारने लगे- है कोई हनुमान भक्त, जो हमारी इच्छा पूर्ण करे? पुकार सुन वृद्धा बाहर आई और बोली- आज्ञा महाराज. हनुमान (वेशधारी साधु) बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तू थोड़ी जमीन लीप दे. वृद्धा दुविधा में पड़ गई. अंतत: हाथ जोड़कर बोली- महाराज. लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी. साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- तू अपने बेटे को बुला. मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा. यह सुनकर वृद्धा घबरा गई, परंतु वह प्रतिज्ञाबद्ध थी. उसने अपने पुत्र को बुलाकर साधु के सुपुर्द कर दिया. 

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वेशधारी साधु हनुमानजी ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लिटवाया और उसकी पीठ पर आग जलवाई. आग जलाकर दु:खी मन से वृद्धा अपने घर में चली गई. इधर भोजन बनाकर साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा- तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोग लगा ले. इस पर वृद्धा बोली- उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न पहुंचाओ. लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज लगाई. अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा को बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी. हनुमानजी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए और वृद्धा को भक्ति का आशीर्वाद दिया.