कोरोना वायरस: अब समझ में आई बचपन की बात, हमारे गाँव की बात...

कोरोना ने हमें हमारे संस्कारों और भूली परंपराओं को फिर से याद दिलाया दिया है.

कोरोना वायरस: अब समझ में आई बचपन की बात, हमारे गाँव की बात...

नई दिल्ली: हिंदुस्तान में हमारा धर्म, ज्ञान और उसकी  परंपरा हमेशा से समृद्ध रही है. आज कोरोना वायरस (Coronavirus) ने हमें फिर से अपने संस्कारों की याद दिला दी है, उनका असली महत्व हमें बताया है. वरना हमने तो अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित नियमों को ढकोसला समझ छोड़ दिया था और पश्चिम का अंधा अनुसरण करने लगे थे. आज वक्त है अपनी आंखो पर पड़ी धूल झाड़ने और ये उच्च संस्कार अपने परिवार और बच्चों को देने का, उन्हें  वो गाँव की बात साद दिलाने का...

1. आखिर क्यों शौचालय और स्नानघर को निवास स्थान के बाहर होते थे.
2. क्यों बाल कटवाने के बाद या किसी के दाह संस्कार से वापस घर आने पर बाहर ही स्नान करना होता था और बिना किसी व्यक्ति या सामान को हाथ लगाए हुए.
3. क्यों चप्पल या जूता घर के बाहर उतारे जाते थे, उन्हें घर के अंदर लाना निषेध था.
4. क्यों घर के बाहर पानी रखा जाता था और कही से भी घर वापस आने पर हाथ पैर धोने के बाद अंदर प्रवेश मिलता था. 
5. क्यों जन्म या मृत्यु के बाद घरवालों को 10 या 13 दिनों तक सामाजिक कार्यों से दूर रहना होता था.
6. क्यों किसी घर में मृत्यु होने पर भोजन नहीं बनता था.
7. क्यों मृत व्यक्ति और दाह संस्कार करने वाले व्यक्ति के वस्त्र शमशान में त्याग देना पड़ता था.
8. क्यों भोजन बनाने से पहले स्नान करना जरूरी था.
9. क्यों स्नान के पश्चात किसी अशुद्ध वस्तु या व्यक्ति के संपर्क से बचा जाता था.
10. क्यों प्रातःकाल स्नान कर घर में अगरबत्ती,कपूर,धूप एवम घंटी और शंख बजा कर पूजा की जाती थी.

ये सभी वो सवाल हैं जो बचपन में हमारे मन में उठते थे. लेकिन कभी इनका पीछे का असली महत्व हमने समझने की कोशिश नहीं की. समय के साथ लोग इन परंपराओं को मानों भूल ही बैठे थे. लेकिन कोरोना वायरस के देश में खौफ ने सभी को इनका स्मरण करा दिया. लोगों को ये एहसास हुआ है कि जिन परंपराओं को वो भूल बैठे थे आज उन्हीं परंपराओं को अपनाकर वो अपने आपको सुरक्षित कर पा रहें हैं. आज लोगों को अपनी बचपन की बात, गाँव की बात याद आ गईं हैं.

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