हनुमान जी के प्रकटोत्सव पर जानिए बीमारियों से बचने के लिए कैसे करें पूजा

यदि आप गठिया, वात, सिरदर्द, कंठ रोग, जोड़ों का दर्द आदि तरह के दर्द से परेशान हैं तो हनुमान बाहुक का पाठ करें.

हनुमान जी के प्रकटोत्सव पर जानिए बीमारियों से बचने के लिए कैसे करें पूजा
भगवान हनुमान जी

नई दिल्ली: कलयुग में इस समय धरती पर मौजूद भगवान या देवों में हनुमान जी भी हैं.  

"अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:। 
 कृप:परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।"

अर्थात इन आठ देवों में अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि अजर अमर हैं. इनमें  हनुमान जी विशेष हैं.

राम का नाम लेने से या भाव पूर्ण तीव्र अनुभूति और ध्यान करने से ही हनुमान जी अपने भक्तों की तुरंत सुनते हैं क्योंकि वो धरती पर मौजूद हैं और ध्यान लगाकर अपने भक्तों से खुद भी जुड़े रहते हैं. सुनने का मतलब ये है कि वो तुरंत आपको वो हल भेज देंगे जो आप ढूंढ रहे हैं. सबसे ज्यादा उदाहरण बजरंग बाण और हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले लोगों का हैं.

अधिकांश लोगों का ये अनुभव है कि बजरंग बाण का पाठ करने से भयानक से भयानक रोग जिसका उपचार नहीं मिल रहा था वो उपचार मिल गया. इसी तरह हनुमान चालीसा पढ़ने वाले लोगों ने अनुभव बताए हैं कि बड़े से बड़ा काम करने से पहले उनका डर समाप्त हो गया और वो आत्मविश्वास के साथ वो काम कर पाए.

बजरंग बाण पढ़ने के कुछ नियम हैं उन नियम का पालन करने से लोगों ने राहत मिलने की बात बताई है. 

हनुमान जी एक तरह से सॉल्यूशन पसंद देव हैं. जब राम जी को जरुरत पड़ी तो उन्हें लक्ष्मण के साथ हवाई मार्ग से कंधे पे बिठा लाए, संदेश देना था तो लंका चले गए, मां सीता की काउंसलिंग भी की और चिर अमर रहने का वरदान भी ले लिया. फिर रणभूमि में हर तरह के राक्षसों को मारने के लिए नए तरीके ढूंढ लिए, इसके अलावा जब लक्ष्मण जी बेहोश हुए तो वो जड़ी-बूटी का पर्वत उठा लाए. हर समय अपने वचन यानि वादे से बंधें रहे और अपने आराध्य श्रीराम का कहना माना.

एक फिल्म आई थी ऐप वर्ल्ड उसमें बताया गया कि वानर सोच सकते हैं और हर वो काम कर सकते हैं जो इंसान करता है. देखा जाए तो इस तरह के चरित्र को हम हनुमान जी के रूप में पूजते आए हैं. हम हनुमान को ज्ञानियों में सबसे आगे,अतुलित बल के योद्धा कहते आए हैं और जो लोग हनुमान भक्त हैं उनके तरह-तरह के अनुभव हमें देखने को मिले भी हैं.

पंडित सकला नंद बलोदी बताते हैं- हनुमान जी को केसरी नंदन भी कहा जाता हैं. केसरी नंदन जो ग्यारहवें रूद्र हैं, जो सभी गुणों के भण्डार हैं, ज्ञानियों में सर्वश्रेष्ठ, दुष्टों का विनाश करने वाले, सुवर्ण कान्ति के समान देह वाले वानर वीर महावीर श्री हनुमान जी का ही नाम है, जो भगवान शंकर का ही अवतार हैं. श्री हनुमान जी के विषय में नारद पुराण में कहा गया है-

"सः सर्वरूपः सर्वज्ञ सृष्टि स्थिति करोवतु। स्वयं ब्रह्मा स्वयं विष्णुः साक्षाद् देवो महेश्वरः।।"

वे सर्व स्वरूप तथा सृष्टि रचते और उसका पालन करते हैं और विनाशक भी वही हैं. वे ही स्वयं ब्रह्मा, विष्णु तथा साक्षात शिव हैं. चैत्र पूर्णिमा हनुमान जी के प्रकटोत्सव के अवसर पर हम हनुमान जी को प्रसन्न करने के कुछ उपाय बताते हैं. 

हनुमान जी को सॉल्यूशन पसंद है वो अपने भक्तों को भी सॉल्यूशन ही देते हैं. कुछ आजमाएं हुए तरीके देखिए-

सबसे पहले तो राम नाम की माला जाप 1,3 या 5 की गिनती में करें. हनुमान जी की पूजा बड़ी साधारण है लेकिन भाव बिना कोई भी पूजा नहीं सुनी जाएगी. हनुमान जी को चोला चढ़ाना, सिंदूर लगाना, चमेली का तेल लगाना फल चढ़ाने और राम राम कहने भर से भी पूजा हो जाती है. पर विशेष कार्य के लिए हनुमान जी की शक्ति का आह्वान करना हो तो वो अलग है. जैसे-

भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र :- हं हनुमंते नम:

प्रेत भूत बाधा दूर करने के लिए:- हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:

द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र :- ऊँ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट

मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए :- महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते

हनुमान बाहुक का पाठ:- यदि आप गठिया, वात, सिरदर्द, कंठ रोग, जोड़ों का दर्द आदि तरह के दर्द से परेशान हैं तो हनुमान बाहुक का पाठ करें. इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी. हनुमान जी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ाओं से आपको मुक्ति मिल सकती है.

अब कुछ नियम जानिए जो हमेशा हनुमान जी की कृपा पाने के लिए काम आएंगे. हनुमान जी की पूजा में ब्रह्मचर्या का बहुत महत्व है इसका पालन करें, जब सूर्योदय हो रहा हो और सूर्यास्त हो रहा हो तब राम नाम की माला के जाप के बाद पूजा करें. इन दोनों समय पीपल के पेड़ के पास देसी गाय के घी का दीपक लगाएं और "रां रामाय नमः" मंत्र का जाप करें. मां सीता को परमश्रेष्ठ नारी मानने वाले हनुमान जी नारी समुदाय के सम्मान से प्रसन्न होते हैं. इसीलिए ध्यान रहे कि नारी अपमान न हो. कुछ लोग हनुमान जी के नाम पर नारियों के मामले में बेवजह भ्रम पाल लेते हैं.

हनुमान जी का जीवन भी बताता है कि अपनी शक्ति का भान कराने के लिए आपके पास जामवंत जैसा सच्चा हितैषी होना चाहिए. भक्त को भी चाहिए कि वो हनुमान जी का ध्यान लगाकर राम नाम का जाप करके, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ करके याद दिलाते रहे कि भक्त आपको याद कर रहा है. कभी-कभी संकट काल में प्राणों का भय हो, डर लग रहा हो या बुरे सपने ज्यादा आ रहे हैं तो लोगों का अनुभव है कि "दीन दयाल विरद संभारी, हरहु नाथ मम संकट भारी" चौपाई दोहराने से राहत मिलती है. वहीं "रामरक्षास्त्रोत" पाठ करने से शत्रु बाधाएं दूर हुई हैं. राम लोगों के मन में बसे हैं जहां राम का नाम है वहां हनुमान जी अपनी शक्ति का आशीर्वाद सहज ही दे देते हैं.

LIVE TV