Jupiter Transit: 13 महीने बाद हो रहा है देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन, आप पर होगा कैसा असर जानें
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Jupiter Transit: 13 महीने बाद हो रहा है देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन, आप पर होगा कैसा असर जानें

देवगुरु बृहस्पति मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. गुरु के इस राशि परिवर्तन का देश दुनिया के साथ ही आप पर होगा कैसा असर, जानने के लिए यहां पढ़ें.

Jupiter Transit: 13 महीने बाद हो रहा है देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन, आप पर होगा कैसा असर जानें

नई दिल्ली: सबसे बड़ा ग्रह देवगुरु बृहस्पति 5 अप्रैल की सुबह 5 बजे सूर्योदय से पहले अपनी राशि परिवर्तित (Brihaspati Rashi change) करने जा रहा है. बृहस्पति फिलहाल शनिदेव की पहली राशि मकर (Capricorn) में है जहां से निकलकर वह शनिदेव की ही दूसरी राशि कुंभ (Aquarius) में प्रवेश करने वाला है. ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी की मानें तो बृहस्पति एक राशि में करीब 13 महीने तक वक्री और मार्गी (Vakri and Margi) दोनों गति से संचरण करते हैं. ज्योतिष की दृष्टि से बृहस्पति का गोचर यानी राशि परिवर्तन एक बड़ा परिवर्तन माना जाता है क्योंकि शनि, राहु और केतु के बाद एक राशि में सबसे अधिक समय तक रहने वाला ग्रह बृहस्पति ही है. 

विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव डालता है बृहस्पति

ऐसे में निश्चित तौर पर गुरु के राशि परिवर्तन का सभी लोगों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई न कोई असर अवश्य होगा (Effect of Jupiter Rashi Change). बृहस्पति को भाग्य, खर्च, विवेक, ज्ञान, ज्योतिष, अध्यात्म, परामर्श, सत्य, विदेश में घर, तीर्थ यात्रा, नदी, मीठा खाद्य पदार्थ, मंत्र, दाहिना कान, नाक, स्मृति, पदवी, बड़ा भाई, पवित्र स्थान, धामिर्क ग्रंथ का पठन, अध्यापक, धन, बैंक, धार्मिक कार्य, ईश्वर के प्रति निष्ठा, दान, परोपकार, फलदार वृक्ष, पुत्र, पति, पुरस्कार, लीवर और हर्निया इत्यादि का कारक ग्रह माना जाता है. इसका अर्थ ये हुआ कि इन सभी क्षेत्रों पर देवगुरु अपना अधिक प्रभाव डालते हैं.

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बृहस्पति के राशि परिवर्तन का भारत पर होगा कैसा असर?

धनु और मीन बृहस्पति की अपनी राशि है तो वहीं चंद्रमा की राशि कर्क में बृहस्पति उच्च के और शनि की राशि मकर में नीच के होते हैं. 1 साल से भी ज्यादा समय के बाद जब बृहस्पति का राशि परिवर्तन हो रहा है तो भारत के दृष्टिकोण से देवगुरु का यह गोचर किस तरह से प्रभावित कर सकता है, यहां जानें:
 
1. स्वतंत्र भारत की कुंडली कर्क राशि और वृष लग्न की है, इसलिए देवगुरु षष्ठ भाव और भाग्य भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव में विद्यमान रहेंगे. इस दौरान देश के धन में वृद्धि होगी, आमजन में सुख की अनुभूति और व्यापारिक साझेदारी सहित लाभ में वृद्धि हो सकती है. लेकिन देश के अंदर ही कुछ जगहों पर अशांति और प्रगति में अवरोध भी आ सकता है.

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2. विश्व स्तर पर भारत के पराक्रम, यश और सम्मान में वृद्धि होगी, शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है, भारत को मित्र राष्ट्रों का सहयोग मिल सकता है.  

3. भारत के धन भाव और सुख भाव पर गुरु की दृष्टि होगी जिससे भारत के बौद्धिक, नए शोध, अन्वेषण और व्यापारिक लाभ, इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि होगी. सामरिक महत्त्व में वृद्धि होगी और न्याय तंत्र मजबूत होगा.

4.  चूंकि गुरु प्राण वायु भी हैं, ऐसे में जब देवगुरु राहु शनि के प्रभाव से बाहर आ रहे हैं, तो अच्छी और प्रभावकारी वैक्सीन की खोज के साथ ही कोरोना वायरस कमजोर होता दिख रहा है. 

5. राहु की दृष्टि शनि पर पड़ने के कारण प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूकंप, आग से क्षति, भूस्खलन, चक्रवात, सहित अन्य प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं, विशेषकर किसी भी देश के दक्षिणी क्षेत्र में.
 
6. भारत में आंतरिक विद्रोह, आंदोलन, जातीय एवं साम्प्रदायिक दंगे जैसी गतिविधियों में कमी हो सकती है. भारत सहित पूरे विश्व में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए सजगता और सावधानी जरूरी है. 

- उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक और ज्योतिर्विद पंडित दिवाकर त्रिपाठी

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