Karwa Chauth 2019: आई रात सुहागों वाली...इस शुभ मुहूर्त में पूजा कर मांगें पति की लंबी उम्र की दुआ

हिंदू धर्म में सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं. इस बार करवा चौथ पर ग्रहों का शुभ संयोग भी है. रोहिणी नक्षत्र में मंगल का योग शुभ हैं. 

Karwa Chauth 2019: आई रात सुहागों वाली...इस शुभ मुहूर्त में पूजा कर मांगें पति की लंबी उम्र की दुआ
इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रहती हैं.

नई दिल्ली: सुहागन महिलाओं के लिए करवा चौथ (Karwa Chauth ) बड़े पर्वों में से एक है. देशभर में आज (17 अक्टूबर) करवा चौथ का पर्व मनाया जा रहा है. सुहाग और प्रेम का प्रतीक करवा चौथ न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है बल्कि यह व्रत उन लोगों के रिश्तों को भी एक मौका देता है, जिनके रिश्ते में न चाहते हुए भी गांठ पड़ जाती है. ये व्रत उन ऐसे लोगों को रिश्तों को सहेजने का एक मौका देता है. हिंदू धर्म में सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं. इस बार करवा चौथ पर ग्रहों का शुभ संयोग भी है. रोहिणी नक्षत्र में मंगल का योग शुभ हैं. 

यह त्यौहार दिवाली से कुछ दिन पहले कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रहती हैं. सुबह सूर्योदय होने के साथ ही पूजा-पाठ की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो रात को चंद्र दर्शन के साथ समाप्त होती हैं. 

पूजा का शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 17 अक्टूबर की सुबह 6:48 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त-  18 अक्टूबर को सुबह 7:29 मिनट तक
करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 6:37- रात्रि 8:00 तक चंद्रोदय

करवा चौथ व्रत की कथा
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी. एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी के साथ उसकी सातों बहुओं और बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा. रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा. इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है. चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं भोजन करूंगी.

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ. साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी. घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है. अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो. साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो. ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं.

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया. इस पवजह से करवा चौथ का व्रत भंग हो गया और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए. गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया.

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साहूकार की बेटी को जब अपनी गलती का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ. उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया. उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया. इस प्रकार उस लड़की की श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान दिया. उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया.

कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है.