जानें कब है धनतेरस, क्या है पूजा और खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन सोने-चांदी के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है. इस दिन धातु खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है.

जानें कब है धनतेरस, क्या है पूजा और खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली : अक्टूबर महीने का अंत आते ही देश के बाजार दिवाली की लाइटों से सजा गए हैं. दिवाली की तैयारी से पहले घरों में धनतेरस के दिन खरीददारी की बात चलने लगी है. इस बार धनतेरस का त्योहार 5 नवंबर को मनाया जाएगा. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है. धनतेरस के दिन से ही धन की देवी मां लक्ष्मी की अराधना शुरू होती है. धनतेरस को धन त्रयोदशी व धन्वन्तरी त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है.

पौराणित मान्यता है कि इसी दिन भगवान धनवन्‍तरी का जन्‍म हुआ था जो कि समुन्‍द्र मंथन के दौरान अपने साथ अमृत का कलश व आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे और इसी कारण से भगवान धनवन्‍तरी को औषधी का जनक भी कहा जाता है. धनतेरस के दिन सोने-चांदी के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है. इस दिन धातु खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है.

धनतेरस के दिन खरीददारी का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचारर्यों के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 05 नवम्बर 2018 को मनाया जाने वाला है. धनतेरस के दिन पूजा का शुभ समय शाम 6 बजकर 05 मिनट से रात को 8 बजकर 01 मिनट तक है. यानि की धन की देवी लक्ष्मी के आगमन के लिए भक्त कुल 1 घंटे 55 मिनट तक पूजा कर सकेंगे. 

दक्षिण भारत में गायों को सजाने की पंरपरा
सौभाग्य सूचक के तौर पर धनतेरस के दिन दिन लोग सोना या चांदी या बर्तन खरीदते हैं. जमीन, कार खरीदने, निवेश करने और नए उद्योग की शुरुआत के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है. गांवों में इस दिन लोग पशुओं की पूजा करते हैं. वह मानते हैं कि उनकी आजीविका पशुओं से चलती है इसलिए आय के स्रोत के तौर पर उनकी पूजा करना चाहिए. दक्षिण भारत में इस दिन गायों को खूब सजाया जाता है और फिर उनकी पूजा की जाती है. गायों को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. धनतेरस के दिन दक्षिण भारत में गायों कई प्रकार के व्यंजन भी परोसे जाते हैं.