भारत समेत दुनिया के कई हिस्‍सों में दिखा सूर्य ग्रहण, दुबई के आसमान में दिखी 'रिंग ऑफ फायर'

भारत में देश के दक्षिणी हिस्से कर्नाटक, केरल और तनिलनाडु में सूर्यग्रहण वलयाकार तो वही दिल्ली समेत देश के बाक़ी हिस्सों में सूर्य ग्रहण आंशिक रूप में दिखा.

भारत समेत दुनिया के कई हिस्‍सों में दिखा सूर्य ग्रहण, दुबई के आसमान में दिखी 'रिंग ऑफ फायर'
फोटो- ANI

आज देश-दुनियाभर के कई हिस्‍सों में साल 2019 का आखिरी सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) देखा गया. इस सूर्य ग्रहण को 'रिंग ऑफ फायर' का नाम दिया गया. भारत में सूर्य ग्रहण सुबह 8 बजकर 21 मिनट से शुरू हुआ, जोकि 11 बजकर 14 मिनट तक रहा. बता दें कि सूतक 12 घंटे पहले यानी 25 दिसंबर को रात 8 बजकर 17 मिनट पर ही लग गया था. देश और दुनियाभर के हिस्‍सों में जहां-जहां सूर्य ग्रहण दिखा, वहां लोगों ने उत्‍सुकता के साथ इसका नजारा देखा. भारत में खास तौर पर बच्‍चों ने इस अद्भुत नजारे को देखा.

भारत में देश के दक्षिणी हिस्से कर्नाटक, केरल और तनिलनाडु में सूर्यग्रहण वलयाकार तो वही दिल्ली समेत देश के बाक़ी हिस्सों में सूर्य ग्रहण आंशिक रूप में दिखा. आंशिक सूर्य ग्रहण सुबह 8.04 मिनट पर शुरू हुआ. 9.24 से चंद्रमा ने सूर्य के किनारे को ढकना शुरू कर द‍िया. सुबह 9.26 तक पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई द‍िया और 11 बजे के बाद समाप्त हो गया. सूर्यग्रहण दक्षिण भारत के कन्नौर, कोयंबटूर, कोझिकोड, मदुरै, मंगलोर, ऊटी, तिरुचिरपलल्ली से होकर गुजरा. भारत में सूर्य का क़रीब 93 फ़ीसदी हिस्सा चांद से ढका रहा.

इस तरह का संयोग 296 वर्ष पहले बना था
सूर्य ग्रहण जिस राशि पर लगा है, उस राशि पर छह ग्रहों की युति होगी. इस तरह का संयोग 296 वर्ष पहले बना था और अब बन रहा है. ग्रहण धनु राशि पर लग रहा है, जोकि इस राशि पर छह ग्रहों की युति होगी, जिससे राशियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण रहा, जिसका मतलब पूर्णग्रास नहीं, बल्कि खंडग्रास सूर्य ग्रहण. इस सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) को भारत, ऑस्ट्रेलिया, फिलिपिंस, सउदी अरब और सिंगापुर में भी देखा गया. इसी साल 6 जनवरी और 2 जुलाई को आंशिक सूर्यग्रहण लगा था. 

हालांकि, सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में भय रहा, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एक खगोलीय घटना से अधिक कुछ नहीं है. वहीं, सूर्य और चंद्र ग्रहण को लेकर कुछ सावधानियां भी बरतने को कहा जाता है. जैसे- इस ग्रहण काल के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए. साथ ही इस दौरान भोजन भी नहीं बनाना चाहिए. 

ग्रहण काल के दौरान पूजा-पाठ न करें
माना जाता है कि ग्रहण काल के दौरान पूजा-पाठ भी नहीं करना चाहिए. साथ ही कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए. कई पंडितों की मानें तो, इस बार के सूर्यग्रहण की विशेष बात यह होगी कि ये ग्रहण षडग्रही योग में पड़ रहा है. जिसका अर्थ है कि एक ही राशि में एकसाथ 6 ग्रह रहेंगे.

सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से देखने की कोशिश कतई न करें
वहीं, नासा ने सूर्य ग्रहण लगने से पहले एक चेतावनी जारी की थी. नासा ने कहा कि लोग इसे नग्न आंखों से देखने की कोशिश कतई न करें. इसे देखने के लिए सनग्लास का प्रयोग करना ही ठीक होगा. बता दें कि इस सूर्य ग्रहण का कई राशियों पर प्रभाव भी पड़ेगा.

मंदिरों के कपाट बंद 
अयोध्या में सूर्य ग्रहण के सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे. राम जन्मभूमि रामलला के आज प्रथम पाली में श्रद्धालु दर्शन नहीं कर पाए. ग्रहण के मोक्षकाल पर दूसरी पाली में दोपहर 1 बजे से दर्शन शुरू होंगे.

वहीं, सूर्य ग्रहण के कारण मां वैष्णो देवी की दिव्य आरती भी प्रात: काल के बजाए सुबह 11:20 बजे हुई. पारंपरिक तौर पर मां वैष्णो देवी की दिव्य आरती प्रातकालीन सुबह 6:20 बजे रोजाना होती है पर सूर्य ग्रहण के चलते दिव्य आरती के समय में तब्दीली की गई और यह दिव्य आरती सुबह 11:20 पर की गई.