कल से शुरू हो रहा मार्गशीर्ष मास, जानिए महत्व और व्रत-त्योहार

धार्मिक दृष्टि से मार्गशीर्ष महीने का बहुत अधिक महत्व है. इस माह में अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करें. इस समयावधि में दान पुण्य करके समस्त धार्मिक कार्यों में हिस्सा लेना चाहिए. 

कल से शुरू हो रहा मार्गशीर्ष मास, जानिए महत्व और व्रत-त्योहार

नई दिल्लीः आज हम आपको हिंदू वर्ष के 9वें माह मार्गशीर्ष मास के बारे में बता रहे हैं. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2020 में मार्गशीर्ष माह कार्तिक पूर्णिमा के बाद यानी 1 दिसंबर से शुरू हो  रहा है. आम बोलचाल की भाषा में इस महीने को अगहन मास भी कहा जाता है. धार्मिक दृष्टि से मार्गशीर्ष महीने का बहुत अधिक महत्व है. इस माह में पूर्वजों को याद करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करने के साथ दान पुण्य करने का विधान है. जानिए इस माह का खास महत्व और दिसंबर में आने वाले कई बड़े और महत्वपूर्ण त्योहार. 

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इसी माह में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था उपदेश
मार्गशीर्ष मास भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है. भक्तवत्सल भगवान ने स्वयं अपनी वाणी से कहा है कि मार्गशीर्ष मास स्वयं मेरा ही स्वरूप है. इस पवित्र माह में तीर्थाटन और नदी स्नान से पापों का नाश होने के साथ मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. मार्गशीर्ष  की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में धनुर्धारी अर्जुन को गीता का उपदेश सुनाया था. इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनायी जाती है. इस माह में गीता का दान भी शुभ माना जाता है. गीता के एक श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष मास की महिमा बताते हुए कहते हैं 
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्। 
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः

इसका अर्थ है गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम, छंदों में गायत्री तथा मास में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में बसंत हूं. शास्त्रों में मार्गशीर्ष का महत्व बताते हुए कहा गया है कि हिन्दू पंचांग के इस पवित्र मास में गंगा, युमना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से रोग, दोष और पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है. दिसंबर के इस महीने में कई बड़े और महत्वपूर्ण त्योहार हैं. तो आइये आपको सभी व्रत-त्‍योहारों की पूरी जानकारी देते हैं. 

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7 दिसंबर, कालभैरव जयंतीः कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी के रूप में मनाई जाती है. काल भैरव बीमारी, भय, संकट और दुख को हरने वाले स्वामी माने जाते हैं.

10 दिसंबर, उत्पन्ना एकादशीः  हिन्दू पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है. एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है.

12 दिसंबर, प्रदोष व्रतः 12 दिसंबर को को कृष्ण प्रदोष व्रत रखा जाएगा. प्रदोष व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है. यह व्रत प्रति माह में दो बार (कृष्ण और शुक्ल पक्ष में) त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है.

13 दिसंबर, मासिक शिवरात्रिः हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. ये दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है.

14 दिसंबर, मार्गशीर्ष अमावस्याः इस तिथि को अगहन और पितृ अमावस्या, अगहन व दर्श अमावस्या भी कहा जाता है. धार्मिक रूप से इस अमावस्या का महत्व भी कार्तिक अमावस्या के समान ही फलदायी माना जाता है. इस दिन भी माता लक्ष्मी का पूजन शुभ माना जाता है. स्नान, दान व अन्य धार्मिक कार्यों के लिये भी यह दिन बहुत शुभ है. दर्श अमावस्या को पित्रों का पूजन किया जाता है जिससे पित्र दोष खत्म हो जाता है. इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है.

15 दिसंबर, धनु संक्रांतिः  सूर्य देव 15 दिसंबर मंगलवार के दिन धनु राशि में प्रवेश करेंगे और इस राशि में ये 14 जनवरी 2021 तक स्थित रहेंगे. सूर्य के गोचर को संक्रांति कहा जाता है.

19 दिसंबर, विवाह पंचमीः अमावस्या के बाद शुरूहोगा मार्गशीर्ष माह का शुक्ल पक्ष. मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पंचमी को विवाह पंचमी भी कहा जाता है. माना जाता है प्रभु श्री राम का माता सीता से विवाह इसी दिन संपन्न हुआ था. इसलिये यह दिन मांगलिक कार्यों के लिये भी बहुत शुभ माना जाता है.

25 दिसबंर, मोक्षदा एकादशीः  मोक्षदा एकादशी का तात्पर्य है मोह का नाश करने वाली. इसलिए इसे मोक्षदा एकादशी कहा गया है. मान्यता है कि इस एकादशी का उपवास रखने व्रती को मोक्ष मिलता है. साथ ही यह भी मान्यता है हिंदूओं के महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ श्रीमद्भगवदगीता की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी. इसी दिन क्रिसमस और वैकुणड एकादशी भी मनाई जाएगी. इसलिये इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है.

30 दिसंबर, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व दत्तात्रेय जयंतीः मार्गशीर्ष पूर्णिमा का भी धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है. इस दिन को दत्तात्रेय जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. दत्तात्रेय, भगवान विष्णु का स्वरूप ही माने जाते हैं. 

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