इस बार नहीं सजेगा 'लालबाग के राजा' का पंडाल, आयोजकों ने किया ये बड़ा ऐलान

आयोजकों के मुताबिक इस साल लालबाग के राजा की मूर्ति स्थापित नहीं की जाएगी.

इस बार नहीं सजेगा 'लालबाग के राजा' का पंडाल, आयोजकों ने किया ये बड़ा ऐलान

नई दिल्ली: मुंबई (Mumbai) के सबसे प्रसिद्ध गणेश मंडल में से एक लालबाग के राजा (Lalbagh) सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ने एक बड़ा फैसला लिया है. आयोजकों के मुताबिक इस साल लालबाग के राजा की मूर्ति स्थापित नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. कोषाध्यक्ष मंगेश दलवी ने बताया कि कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए मंडल ने इस साल गणपति की मूर्ति स्थापित करने के बजाय 11 दिनों तक ब्लड डोनेशन और प्लास्मा डोनेशन कैंप आयोजित करने का फैसला लिया है.

गौरतलब है कि लालबाग के राजा की स्थापना 1934 में हुई थी और तब से लेकर अब तक यहां हर साल गणेशोत्सव को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है. मन्नतों के राजा के नाम से भी प्रसिद्ध इस गणपति की ख्याति का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि पिछले साल तकरीबन सवा करोड़ गणेशभक्तों ने लालबाग के राजा के दर्शन किए और तकरीबन 9 करोड़ रुपए तक का चढ़ावा चढ़ाया गया. लालबाग के राजा की मूर्ति हर साल तकरीबन 14 फीट ऊंची होती है जो कि मुंबई में गणेश महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होती है.

इतना ही नहीं गणेशोत्सव के आखिरी दिन लालबाग से शुरू होकर गिरगांव चौपाटी तक निकलने वाली लालबाग के राजा की विसर्जन यात्रा में लाखों की तादात में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. इन तमाम वजहों के चलते ही लालबाग के राजा सार्वजनिक गणेश मंडल ने ये अहम फैसला लिया है. इससे पहले एक और प्रसिद्ध मंडल 'मुंबई के राजा' की ओर से भी 20 फीट के बजाय 4 फीट की मूर्ति स्थापित कर उसे कृत्रिम तालाब में विसर्जित करने का फैसला लिया था. जाहिर है इन आयोजकों ने शहर के तमाम सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों के सामने एक मिसाल तैयार की है.

खुद सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जनता से भी रक्तदान और प्लासमा डोनेशन की मुहिम में शामिल होने का आग्रह कर चुके हैं. कोरोना से ठीक होकर लौटे मरीजों के शरीर में एंटी बॉडीज निर्माण होने से वे प्लाज्मा डोनेशन कर सकते हैं, जिसे संक्रमित मरीजों को देकर उनका इलाज किया जा सकता है. निश्चित तौर पर इस साल गणेशोत्सव की रौनक कम जरूर होगी लेकिन गणेशभक्तों के लिए प्लाज्मा डोनेशन या रक्तदान ही अपने आराध्य देव के लिए सबसे बड़ा चढ़ावा होगा.

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