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नवरात्रि 2019: सातरुंडा माता मंदिर में बाल्य, युवा और वृद्धावस्था में दर्शन देती हैं मां कंवलका जी

कहा जाता है कि पांडवकाल में भीम अज्ञात वास कें समय यहां आए थे और अपनी गाय गुम होने पर उसकी तलाश करने के लिए यह ऊंची पहाड़ी बनाई थी.

नवरात्रि 2019: सातरुंडा माता मंदिर में बाल्य, युवा और वृद्धावस्था में दर्शन देती हैं मां कंवलका जी

रतलामः मध्यप्रदेश के रतलाम में स्थित प्राचीन मां सातरुंडा मंदिर पर नवरात्रि में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है. सातरुंडा माता का मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, लेकिन चारों तरफ दूर तक समतल जमीन के बीच यह पहाड़ी कुदरत के अनोखे रूप को दर्शाती है और इस तरह दूर-दूर तक समतल धरातल पर सिर्फ एक पहाड़ी को लेकर चर्चित कहानी भी सच साबित होती है. कहा जाता है कि पांडवकाल में भीम अज्ञात वास कें समय यहां आए थे और अपनी गाय गुम होने पर उसकी तलाश करने के लिए यह ऊंची पहाड़ी बनाई थी. 

रतलाम जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर सातरुंडा माताजी की पहाड़ी है. सातरुंडा पहाड़ी पर पांडव कालीन ऐतिहासिक मंदिर में मां कवलका विराजित हैं. मान्यता है कि मां कालका अपने तीन रूप जिसमें सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था में भक्तों को दर्शन देती हैं. ऐसी किवंदती है कि भीम अपने अज्ञातवास के दौरान यहां आए थे और उनकी गाय यहां से खो गई थी जिस पर उन्हें खोजने के लिए अपने विशाल मुठ्ठियों से डेढ़ मुठ्ठी मिट्टी से इस पहाड़ी का निर्माण किया था. और इस पहाड़ी पर चढ़कर अपनी गायों को खोजा था. 

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मंदिर के पुजारी बताते हैं कि नवरात्र में भी बड़ी दूर-दूर से भक्त यहां माता के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं. मां की प्रतिमा को मदिरा का भोग लगाया जाता है. श्रद्धालु आम दिनों में भी मदिरा का भोग लगाते हैं. मां सतरुंडा के दर्शन के लिए रतलाम जिले सहित आसपास के उज्जैन, धार, झाबुआ, देवास, इंदौर आदि जिलों से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं. इस ऐतिहासिक पांडवकालीन प्राचीन मंदिर में मुख्य रूप से 4 मूर्तियां विराजित हैं, जिनमें मां कवलका की प्रतिमा उनके समीप कालिका माता फिर कालभैरव और भगवान भोलेनाथ शिवजी की प्रतिमाएं आदिकाल से विराजित हैं.