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Navratri 2019: नवरात्रि के 5वें दिन करें स्कंदमाता की पूजा, पाएं बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद

 पौराणिक कथाओं के अनुसार स्कंदमाता को दुनिया की रचियता कहा जाता है और जो भी सच्चे मन से मां की पूजा और अराधना करता है तो माता उसे प्रसन्न होकर मन इच्छा फल देती है.

Navratri 2019: नवरात्रि के 5वें दिन करें स्कंदमाता की पूजा, पाएं बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद
(फोटो साभारः Twitter)

नई दिल्लीः नवरात्रि के 5वें दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है. स्कंदमाता भगवान कार्त‍िकेय यानि स्‍कंद जी की मां हैं इसलिए दुनिया माता के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहकर बुलाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्कंदमाता को पहाड़ों पर रहकर दुनिया के जीवों में नवचेतना का निर्माण करती हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार स्कंदमाता को दुनिया की रचियता कहा जाता है और जो भी सच्चे मन से मां की पूजा और अराधना करता है तो माता उसे प्रसन्न होकर मन इच्छा फल देती है. कथाओं के अनुसार स्कंदमाता को सफेद वस्त्र बेहद प्रिय हैं और वह सदैव कमल पर विराजमान रहती है. 

इस रंग के पहने कपड़े
नवरात्रि के पांचवे दिन सफेद रंग पहनना अच्छा होता है. इस रंग की धार्मिक मान्यता भी है. ब्रह्मा जी को सफेद रंग प्रिय है. ब्रह्मा जी सफेद वस्त्र धारण करते हैं, जो इस बात को प्रमाणित करते हैं कि ब्रह्म, यानी ईश्वर सभी लोगों के प्रति समान भाव रखते हैं. सफेद रंग पारदर्शिता और कोमलता का भी प्रतीक है.

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मां को लगाएं शहद का भोग
मां को केले व शहद का भोग लगाएं व दान करें. इससे परिवार में सुख-शांति रहेगी और शहद के भोग से धन प्राप्ति के योग बनते हैं.

मां स्कंदमाता उपासना मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥

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स्कंदमाता पूजन विधि
सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें. स्कंदमाता की एक प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करें और सबसे पहले कलश और भगवान गणेश की पूजा करें. इसके बाद वरुण, नवग्रह और सप्त घृत मातृका स्थापित करें. इसके बाद माता के पूजन के लिए सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें और इसके बाद स्कंदमाता की आरती करें. प्रसाद के रूप में खीर या फिर शहद का भोग लगाकर प्रसाद बांटें.