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खास है मराठा काल में बना यह मंदिर, मुगल शासन में भी खण्डित नहीं हुईं यहां की एक भी मूर्ति

इस मंदिर की चारों तरफ दीवारों पर पत्थर को काट कर नायाब हस्तशिल्प कला द्वारा अद्भुत आकृति और अनोखी शिल्पकलाओं का प्रदर्शन किया गया है. मंदिर की दीवारों पर शिल्पकारों द्वारा की गई नक्कासी को देखकर आप भी दंग हो जाएंगे.

खास है मराठा काल में बना यह मंदिर, मुगल शासन में भी खण्डित नहीं हुईं यहां की एक भी मूर्ति
इस मंदिर में एक शिवलिंग भी स्थापित है जो अपने आप मे चमत्कारी है

रवीन्द्र निगम, हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जिसके बारे में जानकार आप भी वहां एक बार दर्शन करने की इच्छा करने लगेंगे. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां की दीवारों पर पत्थरों को तराश कर रामायण, महाभारत और कृष्ण लीला का चित्रण सहित वर्णन किया गया है. यह अनोखा मंदिर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक छोटे से गांव खण्डह में स्थित है. आपको बता दें कि इस गांव का नाम मराठा सरदार खण्डराव पेशवा के नाम पर खण्डह पड़ा है. इस मंदिर का निर्माण मराठाओं के शासन काल में करवा गया था. इस मंदिर के निर्माण में लाल पत्थर का इस्तेमाल किया गया है जो कि चित्रकूट के पहाड़ी इलाकों से मंगवाया गया था.

जानकारी के मुताबिक इस मंदिर की चारों तरफ दीवारों पर पत्थर को काट कर नायाब हस्तशिल्प कला द्वारा अद्भुत आकृति और अनोखी शिल्पकलाओं का प्रदर्शन किया गया है. मंदिर की दीवारों पर शिल्पकारों द्वारा की गई नक्कासी को देखकर आप भी दंग हो जाएंगे. इस मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर की दीवारों पर पूरी रामायण राम जन्म से लेकर रावण युद्ध आदि का उल्लेख चित्रण द्वारा किया गया है. ऐसे ही कृष्ण जन्म से लेकर कंश वध तक और पूरी महाभारत का भी चित्रण किया गया है. मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई इस कलाकृति को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.

यही नहीं इस मंदिर में एक शिवलिंग भी स्थापित है जो अपने आप मे चमत्कारी है. यहां के लोगों का मानना है कि सच्चे मन से आप जिस चीज के लिए प्राथना करते हैं वह मुराद जल्द ही पूरी हो जाती है. शायद यही वजह है कि लोग इस मंदिर में अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं. आपको बता दें कि यह मंदिर मराठा काल से अब तक अनेकों रहस्य समेटे हुए है. यह एक ऐसा मंदिर है जिसमें एक भी मूर्तियों को मुगल शासन काल में खण्डित नहीं किया गया. लेकिन समय के साथ-साथ अब इसे भी देख-रेख की जरूरत होने लगी है. लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा इसकी देख-रेख नहीं की जा पा रही है.

इस अनोखे मंदिर में पत्थरों को तराश कर अनूठी कलाकृतियों को उभारा गया है जो शायद आपको खजुराहो के मंदिरों में भी देखने को नहीं मिलेगी. इस नायब नक्कासी को अब प्रदेश सरकार की मदद का इंतजार है. क्योंकि अब यह मंदिर धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है.